नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — कांग्रेस पार्टी के भीतर राजनीतिक हलचल एक बार फिर तेज हो गई है। हाल ही में सामने आए घटनाक्रम में नेहा बोरा के नाम को लेकर पार्टी के भीतर ही खटपट की खबरें सामने आ रही हैं। कई नाराज नेताओं ने इस फैसले पर अपनी असहमति जताई है और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के सामने अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की है। द फ्रीलान्स की ग्राउंड टीम ने जब इस पूरे मामले की थाह ली, तो पता चला कि यह अंदरूनी कलह पिछले कुछ दिनों से लगातार सुलग रही थी। पार्टी के भीतर टिकट बंटवारे या सांगठनिक नियुक्तियों को लेकर अक्सर मतभेद सामने आते रहते हैं, लेकिन इस बार मामला थोड़ा अलग और गंभीर रूप लेता दिख रहा है।
सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक, पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता इस बात से खफा हैं कि संगठन में कुछ खास चेहरों को जरूरत से ज्यादा तरजीह दी जा रही है। इसी कड़ी में नेहा बोरा से जुड़े फैसलों पर भी सवाल खड़े किए गए। नाराज नेताओं का एक धड़ा लगातार दिल्ली पहुंचकर केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात कर रहा है और अपनी बात मजबूती से रख रहा है। उनका मानना है कि अगर समय रहते इस असंतोष को दूर नहीं किया गया, तो आने वाले चुनावों में इसका असर पार्टी के प्रदर्शन पर पड़ सकता है। हालांकि, पार्टी का दूसरा गुट इन आरोपों को खारिज कर रहा है और इसे अनुशासनहीनता का नाम दे रहा है।
राहुल गांधी का दो टूक और साफ जवाब
बढ़ते विरोध और आंतरिक कलह की खबरों के बीच कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इस पूरे मामले पर बेहद सख्त रुख अपनाया है। राहुल गांधी ने पार्टी के नाराज नेताओं से सीधे मुलाकात की और उन्हें दो टूक शब्दों में समझा दिया कि अनुशासनहीनता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि संगठन के हित सर्वोपरि हैं और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं के लिए पार्टी के फैसलों को चुनौती नहीं दी जा सकती। राहुल गांधी का यह कड़ा संदेश उन तमाम नेताओं के लिए एक बड़ा संकेत माना जा रहा है जो पार्टी लाइन से हटकर बयानबाजी कर रहे थे या विरोध जता रहे थे।
बैठक में मौजूद कुछ नेताओं ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि राहुल गांधी ने साफ कर दिया है कि जिसे भी पार्टी के साथ चलना है, उसे संगठन की तय नीति के अनुसार ही काम करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों को कोई भी शिकायत है, वे बंद कमरे में पार्टी के फोरम पर अपनी बात रख सकते हैं, लेकिन सार्वजनिक रूप से पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने वाले बयानों पर अब रोक लगनी चाहिए। इस दो टूक संदेश के बाद से पार्टी के भीतरखाने में खलबली मची हुई है और कई नेता अब सोच-समझकर कदम उठा रहे हैं।
जंतर मंतर पर प्रदर्शन और युवा कांग्रेस की तैयारी
एक तरफ जहां पार्टी के भीतर सांगठनिक कलह चल रही है, वहीं दूसरी तरफ युवा कांग्रेस ने भी अपने तेवर कड़े कर दिए हैं। हाल ही में युवा कांग्रेस के नेताओं ने जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन और रैलियों के लिए अनुमति मांगी है। इसे राजनीतिक गलियारों में 'जंतर मंतर 2.0' का नाम दिया जा रहा है। युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता बेरोजगारी, महंगाई और अन्य राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन खड़ा करने की तैयारी में हैं। इसके लिए प्रशासन से बीस दिन की अनुमति मांगी गई है, ताकि बड़े पैमाने पर देश भर के युवाओं को जुटाया जा सके।
इस बीच, चुनाव आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाओं से जुड़े मुद्दों पर भी विपक्ष लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के कामकाज को लेकर भी विपक्षी दल लगातार सवाल खड़े कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस पार्टी एक साथ दो मोर्चों पर लड़ रही है—एक तरफ वह केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ सड़क पर संघर्ष कर रही है, तो दूसरी तरफ अपने घर के भीतर यानी पार्टी संगठन में आपसी फूट को थामने की कोशिश में जुटी है।
मध्य प्रदेश में औद्योगिक कॉरिडोर और अन्य विकास कार्य
राजनीतिक उठापटक के बीच देश के अन्य हिस्सों से भी बड़े प्रशासनिक और विकासात्मक अपडेट सामने आ रहे हैं। मध्य प्रदेश में विकास को नई रफ्तार देने के लिए जबलपुर-भोपाल-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाने की तैयारी जोरों पर चल रही है। इस नए इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के बनने से राज्य में बड़े पैमाने पर निवेश आने की उम्मीद है। सरकार का दावा है कि इससे स्थानीय स्तर पर युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और औद्योगिक विकास को एक नई दिशा मिलेगी। जमीन अधिग्रहण और मास्टर प्लान पर काम शुरू हो चुका है, जिसे लेकर प्रशासनिक स्तर पर बैठकों का दौर जारी है।
दूसरी तरफ, आम नागरिकों से जुड़े मामलों में सख्ती भी देखने को मिल रही है। यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों पर भारी-भरकम जुर्माने लगाए जा रहे हैं। हाल ही में एक ही मामले में वाहन चालकों पर एक लाख ग्यारह हजार रुपये तक का भारी जुर्माना लगाया गया है, जिससे वाहन चालकों में हड़कंप मच गया है। इसके अलावा, आम जनता और मरीजों की सुविधा के लिए टेली मेडिसिन सेवाओं का दायरा भी बढ़ाया जा रहा है, ताकि अस्पतालों की लंबी कतारों से बचकर लोग घर बैठे ही डॉक्टरों से सलाह ले सकें। द फ्रीलान्स इन तमाम जमीनी और राजनीतिक गतिविधियों पर लगातार पैनी नजर बनाए रखेगा।





