देश की प्रशासनिक व्यवस्था और अधिकारियों के कामकाज का तरीका इन दिनों चर्चा का बड़ा केंद्र बना हुआ है। कभी अपनी ड्यूटी से सालों साल गायब रहने वाले बाबू तो कभी ताबड़तोड़ तबादलों के आदेश आम लोगों को हैरान कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश से एक बेहद अनोखा मामला सामने आया है जहां एक महिला अधिकारी महज एक दिन नौकरी करने के बाद पूरे दस साल तक विभाग से गायब रही। विभाग ने जब उसे ढूंढ-ढूंढ कर थक हार, तब जाकर उसे आखिरकार नौकरी से बर्खास्त कर दिया। यह मामला इस बात की पोल खोलता है कि सरकारी तंत्र में निगरानी कितनी ढीली होती है कि कोई कर्मचारी एक दशक तक बिना बताए नदारद रह सकता है और किसी को भनक तक नहीं लगती है।
दूसरी ओर, प्रशासनिक महकमों में काम करने वाले अधिकारियों की सुरक्षा और उनके निजी जीवन पर मंडराते खतरों की तस्वीरें भी डराने वाली हैं। हाल ही में एक बड़ी घटना में इंडियन ऑयल के एक अधिकारी को बेरहमी से सात बार चाकू घोंपकर मौत के घाट उतार दिया गया। इस जघन्य हत्याकांड के बाद से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई है और इस मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय मंत्री ने भी पुलिस और प्रशासन से पूरी रिपोर्ट तलब की है। सरकारी पदों पर बैठे लोगों पर इस तरह के हमले यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि क्या कानून का डर अब अपराधियों के दिलों से पूरी तरह खत्म हो चुका है?
उत्तर प्रदेश में फिर चली ट्रांसफर एक्सप्रेस
प्रशासनिक फेरबदल की बात करें तो उत्तर प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी में इन दिनों ट्रांसफर एक्सप्रेस पूरी रफ्तार से दौड़ रही है। हाल ही में सरकार ने एक बार फिर बड़ा कदम उठाते हुए बीस आईपीएस अधिकारियों के ताबड़तोड़ तबादले कर दिए हैं। इस फेरबदल के तहत कई बड़े जिलों के पुलिस कप्तान यानी एसपी और एसएसपी बदल दिए गए हैं। सरकार का दावा है कि यह कदम कानून व्यवस्था को बेहतर बनाने और प्रशासनिक कसावट लाने के लिए उठाया गया है। हालांकि, इतने बड़े पैमाने पर होने वाले इन तबादलों से प्रशासनिक गलियारों में भी तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है और नए अधिकारियों के सामने कानून व्यवस्था को संभालने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
भ्रष्टाचार के मामलों में फंसे अधिकारियों की फेहरिस्त भी काफी लंबी है जो अक्सर सुर्खियों में बनी रहती है। देश के बहुचर्चित मामलों में आईएएस पूजा सिंघल का नाम आज भी लोगों की जुबान पर है। मनरेगा घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग के फेरे में फंसकर करीब अट्ठाइस महीने तक जेल की सलाखों के पीछे वक्त बिताने वाली पूजा सिंघल का मामला प्रशासनिक ईमानदारी पर बड़ा सवालिया निशान छोड़ गया है। हालांकि वे जेल से बाहर आ चुकी हैं, लेकिन उनके पीछे भ्रष्टाचार का यह साया और कानूनी पेचीदगियां आज भी पीछा नहीं छोड़ रही हैं। ऐसे मामले यह दिखाते हैं कि किस तरह से पद की ताकत का गलत इस्तेमाल करने वालों का अंजाम अंततः बुरा ही होता है।
चुनाव आयोग और राज्यों की प्रशासनिक तैयारियां
चुनावी राज्यों और वहां तैनात मुख्य निर्वाचन अधिकारियों की भूमिका भी इन दिनों खासी अहम बनी हुई है। महाराष्ट्र के मुख्य चुनाव अधिकारी ने हाल ही में चुनाव आयोग के सामने अपनी पांच सूत्रीय मांगें रखी हैं जिन पर उच्च स्तर पर मंथन जारी है। चुनाव से जुड़े इन बड़े अधिकारियों पर पूरी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने की जिम्मेदारी होती है। आयोग की बैठकों में यह तय किया जाता है कि मैदानी स्तर पर तैनात अधिकारी किस तरह से बिना किसी राजनीतिक दबाव के अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे और आम जनता को सुरक्षित माहौल देंगे।
इन तमाम घटनाओं का अगर बारीकी से विश्लेषण किया जाए तो यह साफ हो जाता है कि देश में प्रशासनिक तंत्र की चाल और चरित्र दोनों ही समय-समय पर कसौटी पर कसे जाते हैं। एक तरफ जहां कुछ अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से भागकर या भ्रष्टाचार में लिप्त होकर महकमे की साख को बट्टा लगाते हैं, वहीं दूसरी तरफ फील्ड में तैनात ईमानदार अधिकारियों को तमाम जोखिमों के बीच अपना काम करना पड़ता है। 'द फ्रीलान्स' की इस ग्राउंड पड़ताल से यह बात बिल्कुल साफ होती है कि नौकरशाही में सुधार और पारदर्शिता लाने के लिए अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है ताकि जनता का भरोसा इस तंत्र पर हमेशा बना रहे।
तंत्र की सुस्ती और जनता का बढ़ता सवाल
आम जनता के मन में अब यह सवाल उठने लगा है कि आखिर कैसे कोई बड़ा अधिकारी या कर्मचारी बिना डरे सालों तक ड्यूटी से गायब रह सकता है। जब तक जमीनी स्तर पर वरिष्ठ अधिकारी और सरकार कड़े कदम नहीं उठाएगी, तब तक ऐसी लापरवाही की घटनाएं रुकने का नाम नहीं लेंगी। तबादलों की राजनीति और फाइलों में धूल फांकती जांचों के बीच आम आदमी पिसता नजर आता है। 'द फ्रीलान्स' की टीम इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए रखेगी और आगे भी प्रशासनिक गलियारों की हर सच्ची और बेबाक तस्वीर आप तक पहुंचाती रहेगी, ताकि व्यवस्था में सुधार के लिए दबाव लगातार बना रहे।



