नई दिल्ली से ग्राउंड ब्यूरो की रिपोर्ट। देश की राजधानी दिल्ली में राजनीतिक पारा इन दिनों सातवें आसमान पर है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद संबित पात्रा ने एक उच्च स्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कांग्रेस पार्टी को कटघरे में खड़ा कर दिया है। संबित पात्रा ने अपने ठेठ और आक्रामक अंदाज में विपक्ष पर जोरदार राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने चुटीले अंदाज में कहा कि भाजपा की मदद कोई और नहीं बल्कि भगवान गणेश खुद कर रहे हैं। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भाजपा प्रवक्ता ने कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से सीधे तौर पर दस तीखे सवाल पूछे हैं। इन सवालों में मुख्य रूप से यह मुद्दा उठाया गया है कि क्या राहुल गांधी और सोनिया गांधी जैसे बड़े नेता भी वोट चोरी के जरिए ही सांसद बने हैं। संबित पात्रा ने कांग्रेस के उन दावों पर सीधा पलटवार किया है जिनमें लगातार चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाए जा रहे थे। उन्होंने कहा कि विपक्ष अपनी हार का ठीकरा हमेशा दूसरों के सिर फोड़ने की पुरानी आदत से बाज नहीं आ रहा है।
संबित पात्रा के तीखे सवाल और कांग्रेस पर सियासी वार
संबित पात्रा ने मीडिया के सामने विस्तार से अपनी बात रखी और कांग्रेस पार्टी को आईना दिखाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि देश की जनता अब सब कुछ बहुत ही स्पष्ट रूप से देख रही है और समझ रही है। कांग्रेस पार्टी लगातार चुनाव हारने के बाद बहाने ढूंढने का काम कर रही है। पात्रा ने कहा कि जब-जब देश में विकास के काम होते हैं और जनता भाजपा को चुनती है, तब-तब विपक्ष ईवीएम और चुनाव आयोग पर बेबुनियाद आरोप लगाने लगता है। इस बार उन्होंने बहुत ही अनोखे अंदाज में भगवान गणेश का जिक्र करते हुए विपक्ष के हर एक आरोप को सिरे से खारिज कर दिया है।
संसद के अंदर और बाहर इस बयान के बाद प्रतिक्रियाओं का दौर बहुत तेजी से शुरू हो गया है। समाजवादी पार्टी की वरिष्ठ सांसद जया बच्चन ने भी संबित पात्रा के इस बयान पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद के सत्र के दौरान भी जोर-शोर से गूंज सकता है। दोनों तरफ से राजनीतिक दलों के नेता एक-दूसरे पर बयानबाजी करने में जुटे हुए हैं। आम जनता के बीच भी इस बात की खासी चर्चा है कि आखिर नेता लोग चुनावी हार-जीत को किस तरह से पेश कर रहे हैं।
चुनाव आयोग और संवैधानिक संस्थाओं पर घमासान
बीजेपी प्रवक्ता की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद राजनीतिक दलों के बीच वैचारिक तनातनी और अधिक बढ़ गई है। कांग्रेस पार्टी की तरफ से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक और विस्तृत जवाब सामने नहीं आया है, लेकिन स्थानीय स्तर के नेता विरोध दर्ज करा रहे हैं। संबित पात्रा ने साफ तौर पर कहा कि कांग्रेस पार्टी को देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए क्योंकि वे बार-बार देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास करते हैं। उन्होंने मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से कई पुराने मामलों का भी जिक्र किया और पूछा कि आखिर वंशवादी राजनीति देश को कब तक गुमराह करती रहेगी।
जमीनी स्तर पर हमारी टीम ने जब आम लोगों से इस बारे में बात की तो मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ लोगों का कहना है कि नेताओं को इस तरह की बयानबाजी से बचना चाहिए और असल मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। वहीं कुछ समर्थकों का मानना है कि विपक्ष के झूठे आरोपों का करारा जवाब देना बहुत जरूरी हो गया था। द फ्रीलान्स की इस ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार आने वाले दिनों में यह राजनीतिक टकराव और अधिक तीखा होने की पूरी संभावना है। सभी की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि कांग्रेस पार्टी इन दस सवालों का क्या और कब जवाब देती है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया और आगे की राजनीतिक चाल
राजनीतिक विश्लेषकों का ऐसा मानना है कि संबित पात्रा का यह बयान पूरी तरह से सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। भाजपा आने वाले चुनावी राज्यों में विपक्ष को हर मोर्चे पर घेरने की पूरी तैयारी कर चुकी है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल भी इस मुद्दे को लेकर अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में लगे हुए हैं। संसद सत्र के दौरान भी इस बयान के दूरगामी प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। द फ्रीलान्स इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा और हर ताजा अपडेट आप तक सबसे पहले पहुंचाता रहेगा।






