नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — अंतरराष्ट्रीय विमानन क्षेत्र से एक बेहद बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। फ्रांस की प्रमुख एयरलाइन कंपनी एयर फ्रांस ने इजरायल जाने वाली अपनी सभी उड़ानों में पाकिस्तानी पायलटों के उड़ान भरने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। यह सख्त नियम केवल एयर फ्रांस तक ही सीमित नहीं है, बल्कि कई अन्य अंतरराष्ट्रीय विमानन कंपनियों ने भी इस पर कड़ाई से अमल करना शुरू कर दिया है। सुरक्षा एजेंसियों और सरकारों की ओर से जारी नए आदेशों के बाद पाकिस्तान के पायलटों और क्रू मेंबर्स की उड़ानों पर गंभीर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
इस पूरे मामले की तह तक जाएं तो पता चलता है कि फ्लाईदुबई से जुड़ी एक गंभीर घटना के बाद इजरायल और फ्रांस के विमानन प्रशासन ने मिलकर यह कड़ा फैसला लिया है। पाकिस्तान के अलावा करीब 31 ऐसे देशों के पायलटों पर भी शिकंजा कसा गया है जिनके इजरायल के साथ राजनयिक संबंध नहीं हैं या जिनकी सुरक्षा प्रणालियों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठाए जाते रहे हैं। नए नियमों के मुताबिक, ऐसे देशों के पायलट न तो इजरायल की सीमा में प्रवेश करने वाली फ्लाइट्स उड़ा सकेंगे और न ही इजरायली हवाई क्षेत्र के ऊपर से गुजरने वाली उड़ानों का हिस्सा बन सकेंगे।
एयर फ्रांस का बड़ा फैसला और सुरक्षा के नए कड़े नियम
यूरोपीय विमानन बाजार में एयर फ्रांस के इस फैसले को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कंपनी ने साफ कह दिया है कि यात्रियों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। हाल के दिनों में मध्य पूर्व के आसमान में बढ़ते तनाव और सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। पाकिस्तानी पायलटों के पास मौजूद लाइसेंस और उनके ट्रेनिंग स्टैंडर्ड्स को लेकर पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उंगलियां उठती रही हैं। इसी पृष्ठभूमि में एयर फ्रांस ने एहतियात के तौर पर अपने रोस्टर से पाकिस्तानी पायलटों को तुरंत प्रभाव से हटा दिया है।
दैनिक भास्कर और आजतक जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों की रिपोर्टों के अनुसार, जिन देशों के इजरायल के साथ सीधे कूटनीतिक संबंध नहीं हैं, उन देशों के चालक दल के सदस्यों को लेकर इजरायली सुरक्षा एजेंसियों ने विशेष चिंता जताई थी। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि पाकिस्तान समेत कुल 31 देशों के पायलटों को अब इजरायल के ऊपर से उड़ान भरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस प्रतिबंध के दायरे में आने वाली उड़ानों के एयरलाइंस ऑपरेटरों को अपने क्रू शेड्यूल में तुरंत बदलाव करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी तरह की सुरक्षा चूक से बचा जा सके।
फ्लाईदुबई घटना के बाद उठाया गया एहतियाती कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि फ्लाईदुबई से जुड़ी एक संदिग्ध घटना के बाद से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एयरलाइंस की सुरक्षा व्यवस्था की नए सिरे से समीक्षा की जा रही है। इस घटना के बाद से ही मध्य पूर्व के संवेदनशील हवाई क्षेत्रों में काम करने वाले क्रू मेंबर्स की पृष्ठभूमि की बेहद बारीकी से जांच की जा रही है। पाकिस्तान के एविएशन सेक्टर की साख पहले ही पिछले कुछ सालों में अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के दौरान सामने आए फर्जी लाइसेंस वाले विवादों के कारण काफी गिर चुकी है। ऐसे में यह नया प्रतिबंध पाकिस्तानी पायलटों के लिए ग्लोबल करियर के लिहाज से एक बहुत बड़ा झटका साबित हो सकता है।
जमीनी स्तर पर एयरलाइंस कंपनियों के सामने अब अपने क्रू को मैनेज करने की एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। जिन उड़ानों में पहले पाकिस्तानी नागरिक या पायलट अपनी सेवाएं दे रहे थे, उन्हें अब एयरलाइंस द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना के हटाया जा रहा है। प्रभात खबर की रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रतिबंध के लागू होने के बाद से पाकिस्तान के एविएशन महकमे में भी हड़कंप मचा हुआ है और वहां के अधिकारी इस पूरे राजनयिक और व्यावसायिक संकट से निपटने के लिए आंतरिक बैठकों का दौर चला रहे हैं।
वैश्विक विमानन बाजार और कूटनीतिक संबंधों पर असर
इस ताजा घटनाक्रम का असर केवल एयर फ्रांस या पाकिस्तानी पायलटों तक सीमित नहीं रहने वाला है, बल्कि आने वाले दिनों में इसके गहरे कूटनीतिक और आर्थिक परिणाम देखने को मिल सकते हैं। इजरायल सरकार ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए अपने हवाई क्षेत्र और आने वाली उड़ानों के नियमों को बेहद सख्त कर दिया है। जो देश इजरायल को आधिकारिक मान्यता नहीं देते हैं या जिनके संबंध तनावपूर्ण हैं, उनके नागरिकों या कर्मचारियों को इजरायली उड़ानों में शामिल होने से रोकना इस दिशा में एक बड़ा प्रशासनिक कदम है।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि आने वाले हफ्तों में कुछ अन्य यूरोपीय और अमेरिकी एयरलाइंस भी इस तरह के कड़े प्रतिबंधों को अपने यहाँ लागू कर सकती हैं। इससे पाकिस्तानी पायलटों के लिए अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में नौकरियां पाना और भी ज्यादा मुश्किल हो जाएगा। यात्रियों की सुरक्षा को लेकर एयरलाइंस का यह सख्त रुख साफ संकेत देता है कि अब विमानन क्षेत्र में किसी भी तरह की लापरवाही या सुरक्षा जोखिम को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।








