नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की राजधानी दिल्ली में इन दिनों राजनीतिक हलचल बहुत ज्यादा बढ़ गई है। सूत्रों से मिल रही खबरों के मुताबिक सरकार इस महीने संसद का एक विशेष सत्र बुला सकती है। इस संभावित सत्र को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। सबसे बड़ी चर्चा यह है कि सरकार लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने वाला बिल ला सकती है। इसके साथ ही देश में नए परिसीमन पर भी बड़ा कदम उठाया जा सकता है।
बीते कुछ दिनों से राजनीतिक दलों के बीच इस बात की चर्चा आम हो गई है कि सरकार अचानक से संसद का विशेष सत्र बुलाएगी। विपक्षी दल भी इस संभावित कदम पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के बड़े फैसलों के लिए लंबे समय से जमीन तैयार की जा रही थी। अब वह समय पास आ गया है जब सरकार इस पर कोई ठोस कदम उठा सकती है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर अभी तक सत्र की तारीखों का ऐलान नहीं किया गया है।
लोकसभा सीटें बढ़ाने और परिसीमन की रणनीति
भारत में नई संसद के बनने के बाद से ही लोकसभा सीटों के बढ़ने की चर्चाएं तेज हो गई थीं। मौजूदा समय में संसद भवन में सीटों की संख्या काफी ज्यादा है, जिससे भविष्य में सांसदों की संख्या बढ़ाना संभव हो गया है। सरकार चाहती है कि देश की बढ़ती आबादी के हिसाब से लोकसभा क्षेत्रों का नया नक्शा तैयार किया जाए। इसे ही परिसीमन कहा जाता है, जिसके तहत राज्यों की सीटों का कोटा दोबारा तय किया जाएगा। दक्षिण भारत के राज्यों और उत्तर भारत के राज्यों के बीच सीटों के संतुलन को लेकर भी कई तरह की बहस चल रही है।
नया परिसीमन होने से देश के चुनावी भूगोल में बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। जानकारों का कहना है कि अगर इसमें और ज्यादा देरी की गई, तो साल 2029 के आम चुनावों से पहले इसे लागू करना बहुत कठिन हो जाएगा। यही वजह है कि सरकार इसी साल इस दिशा में कोई बड़ा और कड़ा फैसला ले सकती है। महिला आरक्षण बिल को भी इसी प्रक्रिया के साथ जोड़कर देखा जा रहा है ताकि राजनीतिक समीकरणों को साधने में आसानी हो सके।
बहुमत के आंकड़े और राजनीतिक दलों की गणित
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या सरकार के पास इस तरह के बड़े बिल पास कराने के लिए पर्याप्त बहुमत है। संविधान संशोधन और परिसीमन से जुड़े बिलों के लिए संसद में मजबूत समर्थन की जरूरत होती है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि सरकार ने जरूरी समर्थन जुटा लिया है। वहीं दूसरी तरफ कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एनडीए गठबंधन के पास दो-तिहाई बहुमत का जादुई आंकड़ा नहीं है। इसके बिना इतने बड़े बदलाव करना आसान नहीं होगा।
संसद के इस संभावित विशेष सत्र को लेकर विपक्ष की रणनीति भी काफी दिलचस्प रहने वाली है। क्षेत्रीय दल इस बात पर नजर गड़ाए बैठे हैं कि परिसीमन से उनके राज्यों की ताकत पर क्या असर पड़ेगा। उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे बड़े राज्यों में सीटें बढ़ने की पूरी उम्मीद है, जबकि दक्षिण के कुछ राज्य इसका विरोध कर सकते हैं। सरकार इन सभी राजनीतिक चुनौतियों से निपटने के लिए अंदरखाने पूरी तैयारी कर रही है।
आगामी राजनीतिक तस्वीर और जमीनी हलचल
जैसे-जैसे महीने के दिन आगे बढ़ रहे हैं, संसद भवन के आसपास सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियां भी तेज होने लगी हैं। हालांकि अभी तक कोई तारीख पक्की नहीं हुई है, लेकिन मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं की बैठकों का दौर शुरू हो चुका है। देश की जनता और राजनीतिक पंडित अब सिर्फ इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि सरकार की तरफ से कब आधिकारिक मुहर लगती है। 'द फ्रीलान्स' इस पूरी गतिविधि पर लगातार नजर बनाए हुए है और जैसे ही कोई नया अपडेट आएगा, हम सबसे पहले आप तक पहुंचाएंगे।









