नई दिल्ली से ग्राउंड रिपोर्ट — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने राजनीतिक जीवन के 25 साल पूरे कर लिए हैं। इस खास मौके पर उन्होंने एक कार्यक्रम में खुलकर अपनी बात रखी। देश की राजनीति में इतने लंबे समय तक सक्रिय रहना कोई छोटी बात नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके आलोचकों ने ही उन्हें अपने भीतर झांकना सिखाया है। हर मुश्किल वक्त ने उनके धैर्य की कड़ी परीक्षा ली है। इस कार्यक्रम का नाम सेवा ज्योति रखा गया था जहां देश भर से लोग जुड़े।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में साफ किया कि वे आलोचनाओं से घबराते नहीं बल्कि उनसे सीखते हैं। उनका मानना है कि विरोध और आलोचना इंसान को बेहतर बनने का मौका देते हैं। इन पच्चीस सालों में उन्होंने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। चाहे गुजरात का मुख्यमंत्री रहना हो या देश का प्रधानमंत्री बनना, सफर काफी लंबा और चुनौतियों से भरा रहा है। लेकिन जनता का अटूट विश्वास हमेशा उनकी सबसे बड़ी ताकत बना रहा। उन्होंने देश की जनता को ईश्वर का रूप बताया है।
श्री विनायक मंदिर में टेका माथा और दोहराया संकल्प
इस25 साल के सफर को पूरा करने के बाद प्रधानमंत्री ने श्री विनायक मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना की। भगवान के सामने उन्होंने देश सेवा का अपना संकल्प फिर से दोहराया। मंदिर में उनके साथ कई स्थानीय लोग और पार्टी के नेता भी मौजूद थे। देश के अलग-अलग हिस्सों में भी भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने उनके इस संबोधन को सुना। बिहार और अन्य राज्यों में पार्टी दफ्तरों में खास इंतजाम किए गए थे। कार्यकर्ताओं ने इस मौके पर एक-दूसरे का मुंह मीठा कराया और जश्न मनाया।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री का यह बयान बहुत गहरे मायने रखता है। जब एक शीर्ष नेता आलोचनाओं को सकारात्मक रूप से लेता है तो इसका संदेश दूर तक जाता है। पिछले कुछ सालों में देश की राजनीति में काफी बदलाव आया है। विपक्ष लगातार सरकार की नीतियों पर सवाल उठाता रहता है। ऐसे माहौल में पीएम मोदी का यह रुख जनता के बीच एक अलग संदेश देता है। लोग इसे उनके मजबूत नेतृत्व और खुलेपन की निशानी मान रहे हैं।
जनता का भरोसा ही सबसे बड़ी ताकत
अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने बार-बार जनता के प्यार और समर्थन को याद किया। उन्होंने कहा कि उनका हर दिन और हर पल देश के नाम समर्पित है। उन्होंने विपक्ष के विरोध को दरकिनार करते हुए अपने काम पर ध्यान देने की बात कही। जनता-जनार्दन का आशीर्वाद उनके लिए किसी कवच से कम नहीं है। पिछले पच्चीस सालों में देश की तस्वीर काफी बदली है। डिजिटल इंडिया से लेकर बुनियादी ढांचे तक, कई बड़े काम हुए हैं।
जमीन पर लोगों का कहना है कि इतने लंबे समय तक सत्ता में रहने के बाद भी जमीन से जुड़े रहना बड़ी बात है। आम आदमी पार्टी के खिलाफ या समर्थन में चाहे जो कहे, लेकिन मोदी की कार्यशैली चर्चा में रहती है। आने वाले दिनों में देश में कई बड़े चुनाव भी होने हैं। ऐसे में इस तरह के कार्यक्रम राजनीतिक रूप से भी काफी अहमियत रखते हैं। द फ्रीलान्स की टीम ने पाया कि लोगों में इस बात की उत्सुकता है कि अगला कदम क्या होगा।
आलोचनाओं से सीखकर आगे बढ़ने का संदेश
देश के राजनीतिक इतिहास में यह पहला मौका नहीं है जब किसी नेता ने इतने साल पूरे किए हों। लेकिन जिस अंदाज में पीएम मोदी ने अपनी बात रखी, वह अनोखा था। उन्होंने किसी का नाम लिए बिना आलोचकों को धन्यवाद दिया। यह एक परिपक्व राजनेता की पहचान माना जाता है। संकट के समय धैर्य रखना हर किसी के बस की बात नहीं होती। उन्होंने साबित कर दिया है कि दबाव में भी काम कैसे किया जाता है।
हमारी ग्राउंड पड़ताल कहती है कि इस कार्यक्रम का असर आम जनता पर भी पड़ा है। लोग सोशल मीडिया पर उनके पुराने और नए सफर की तुलना कर रहे हैं। बिहार से लेकर दक्षिण भारत तक, हर जगह इस भाषण की चर्चा हो रही है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि राजनीति की यह दिशा देश को कहाँ ले जाती है। द फ्रीलान्स इस मामले पर आगे भी अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा।




