नई दिल्ली से ग्राउंड रिपोर्ट — देश की राजधानी में राजनीतिक सरगर्मी एक बार फिर अपने चरम पर पहुंच गई है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कई प्रमुख विपक्षी सांसदों के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने नया मामला दर्ज किया है। इन सभी नेताओं पर बीते दिन एक बड़े विरोध प्रदर्शन के दौरान आकाशवाणी भवन के भीतर जबरन घुसने का गंभीर आरोप लगाया गया है। पुलिस और प्रशासनिक महकमे की तरफ से इस मामले में लगातार कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि यह उनकी आवाज को दबाने की एक सोची-समझी कोशिश है।
घटना की शुरुआत तब हुई जब संसद सत्र और अन्य मुद्दों को लेकर विपक्षी सांसदों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया था। प्रदर्शन के दौरान स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि पुलिस और सुरक्षा बलों के साथ तीखी नोकझोक देखने को मिली। आरोप है कि सुरक्षा घेरा तोड़कर कई सांसद सीधे आकाशवाणी भवन के अंदर दाखिल हो गए। इस दौरान वहां मौजूद कर्मचारियों और सुरक्षा कर्मियों के बीच भारी अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालात को संभालने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों को मौके पर तुरंत बुलाया गया था।
आठ घंटे का लंबा धरना और पुलिस की सख्त कार्रवाई
आकाशवाणी भवन के बाहर और भीतर चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद विपक्षी नेताओं ने परिसर के बाहर ही करीब आठ घंटे तक लंबा धरना दिया। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य सांसद जमीन पर बैठकर लगातार नारेबाजी करते रहे और सरकार के खिलाफ अपना रोष व्यक्त करते रहे। इस आठ घंटे के लंबे धरने ने दिल्ली की कानून व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया और अंततः सभी नामजद नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का औपचारिक फैसला लिया।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सरकारी संपत्ति में बिना अनुमति के घुसना और सरकारी कामकाज में बाधा डालना गंभीर कानूनी अपराध की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत यह मामला दर्ज किया गया है। वीडियो फुटेज और सीसीटीवी कैमरों की मदद से उन सभी लोगों की पहचान की जा रही है जो इस पूरी घटना के दौरान सुरक्षा घेरा तोड़कर अंदर दाखिल हुए थे। पुलिस का यह भी कहना है कि इस मामले में आगे और भी लोगों से पूछताछ की जा सकती है और जरूरत पड़ने पर कानूनी शिकंजा कसा जा सकता है।
खड़गे के आवास पर विपक्षी दलों की अहम बैठक
इस ताजा एफआईआर और कानूनी कार्रवाई के बाद विपक्षी खेमे में भी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने आधिकारिक आवास पर सभी प्रमुख विपक्षी सांसदों और नेताओं की एक आपातकालीन बैठक बुलाई। इस बैठक का मुख्य एजेंडा सरकार की इस कार्रवाई का एकजुट होकर मुकाबला करना और आगे की रणनीति तय करना था। माहौल को थोड़ा सहज बनाने और आपसी तालमेल मजबूत करने के लिए खड़गे ने सभी विपक्षी सांसदों को अपने आवास पर लंच पर भी आमंत्रित किया, जहां देश के मौजूदा राजनीतिक हालातों पर लंबी चर्चा हुई।
विपक्षी नेताओं ने एक सुर में इस एफआईआर को तानाशाही रवैया करार दिया है और कहा है कि वे इन मुकदमों से डरने वाले नहीं हैं। उनका साफ कहना है कि जनता के मुद्दों को उठाना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है और सरकार पुलिस के दम पर विपक्ष की आवाज को नहीं कुचल सकती है। दूसरी तरफ, सत्ता पक्ष के नेताओं ने विपक्षी दलों पर नियमों की धज्जियां उड़ाने और सरकारी संस्थानों में जबरन व्यवधान डालने का पलटवार किया है। आने वाले दिनों में यह विवाद संसद से लेकर सड़क तक और अधिक तूल पकड़ सकता है, जिस पर हमारी पैनी नजर बनी हुई है।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल और आगे की सुगबुगाहट
द फ्रीलान्स की टीम ने जब मौके पर जाकर हालात का जायजा लिया तो पाया कि आकाशवाणी भवन के आसपास अब भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। स्थानीय पुलिस और खुफिया विभाग के अधिकारी किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहे हैं। इस बीच चुनाव आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाओं से जुड़े कुछ अन्य विवादित मुद्दों पर भी चर्चाएं गर्म हैं, जिससे राजनीति का पारा लगातार हाई बना हुआ है। विपक्षी दल अब इस कानूनी कार्रवाई के खिलाफ संसद के भीतर और बाहर बड़े स्तर पर आंदोलन करने की योजना बना रहे हैं।




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