नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने एक बार फिर देश की राजनीतिक हलचल के बीच तीखे बयान दिए हैं। हाल ही में एक सार्वजनिक मंच से बात करते हुए आठवले ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पूरे विपक्ष पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि राहुल गांधी और विपक्षी दल एसआईआर के नाम पर देश की सीधी-साधी जनता को लगातार गुमराह करने का काम कर रहे हैं। आठवले के मुताबिक विपक्ष के पास सरकार के खिलाफ कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वे अनावश्यक रूप से ऐसे मामलों को हवा दे रहे हैं जिनका जमीनी हकीकत से कोई लेना-देना नहीं है।
राजनीतिक गलियारों में इन दिनों मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर भी माहौल काफी गरमाया हुआ है। इसी विवाद के बीच जब अभिजीत दिपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर बयान दिया, तो रामदास आठवले उस पर बुरी तरह भड़क गए। आठवले ने दो टूक अंदाज में कहा कि ज्ञानेश कुमार अपना पद नहीं छोड़ेंगे और विपक्ष चाहे जो मर्जी कर ले, चुनाव आयोग के काम करने के तरीके पर इस तरह सवाल उठाना पूरी तरह गलत है। एनडीए के इस वरिष्ठ मंत्री ने जोर देकर कहा कि चुनाव आयोग पूरी निष्पक्षता से अपना काम कर रहा है और ऐसे बयानों से केवल देश की संवैधानिक संस्थाओं की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है जो किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पंजाब चुनाव और अकाली दल के साथ गठबंधन की वकालत
केवल राष्ट्रीय राजनीति ही नहीं, बल्कि राज्यों के आगामी चुनावों को लेकर भी रामदास आठवले ने अपनी बेबाक राय रखी है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल के बीच पुराने संबंधों का जिक्र करते हुए दोनों दलों के बीच फिर से गठबंधन की जोरदार वकालत की है। आठवले का मानना है कि यदि पंजाब में भाजपा और अकाली दल मिलकर चुनाव लड़ते हैं, तो राज्य की राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पंजाब की मौजूदा आम आदमी पार्टी सरकार के कामकाज से जनता बेहद नाराज है और आने वाले समय में पंजाब से आम आदमी पार्टी का राजनीतिक रूप से पूरी तरह सफाया होना तय माना जा रहा है।
रामदास आठवले के इन बयानों के बाद से राजनीतिक तापमान काफी बढ़ गया है और विभिन्न दलों के नेताओं की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार अपने संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के जरिए मनमानी करवा रही है, जबकि एनडीए के नेता इसे विपक्ष की राजनीतिक हताशा करार दे रहे हैं। आठवले की यह शैली हमेशा से ही काफी आक्रामक और चर्चा का विषय रही है, जिसमें वे बिना किसी झिझक के अपनी पार्टी और गठबंधन का पक्ष रखते हैं। जमीनी स्तर पर कार्यकर्ता इन बयानों को आने वाले चुनावी राज्यों की रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं।
संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार बढ़ते राजनीतिक हमले
देश में पिछले कुछ समय से चुनाव आयोग जैसी सर्वोच्च संस्थाओं के खिलाफ जिस तरह के बयान सामने आ रहे हैं, उसने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। रामदास आठवले का यह कहना कि सरकार चुनाव आयोग के साथ मजबूती से खड़ी है, यह साफ संकेत देता है कि एनडीए सरकार इन हमलों का पुरजोर राजनीतिक मुकाबला करने के लिए पूरी तरह तैयार है। आठवले ने स्पष्ट किया कि विपक्षी दल अपनी हार को छिपाने के लिए अब संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बना रहे हैं जो लोकतंत्र के हित में बिल्कुल भी सही नहीं है। जनता को यह समझना होगा कि कौन सी पार्टी देशहित में काम कर रही है और कौन सिर्फ राजनीतिक रोटियां सेक रहा है।
आगामी दिनों में इन राजनीतिक बयानों के और अधिक तेज होने के पूरे आसार हैं क्योंकि देश के कई राज्यों में चुनाव नजदीक आ रहे हैं। द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि नेता अपने बयानों के जरिए अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश में जुटे हैं। चाहे वह पंजाब में अकाली दल के साथ गठबंधन की बात हो या फिर चुनाव आयोग के कामकाज का बचाव, रामदास आठवले के इन बयानों ने राष्ट्रीय राजनीति में एक बार फिर गर्माहट पैदा कर दी है। आम जनता भी इन घटनाक्रमों पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है और आने वाले समय में इसका असर चुनावी परिणामों पर भी साफ तौर पर देखने को मिल सकता है।


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