नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय रिजर्व बैंक ने देश की अर्थव्यवस्था और महंगाई को काबू में रखने के लिए एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने चार साल के लंबे समय के बाद रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट यानी 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है। इस ताजा फैसले के बाद अब रेपो रेट बढ़कर 5.5 प्रतिशत पर पहुंच गया है। साल 2023 के बाद यह पहला मौका है जब ब्याज दरों में सीधा इजाफा किया गया है। रिजर्व बैंक के इस कदम से देश भर के करोड़ों बैंक ग्राहकों को बड़ा झटका लगा है और उनके लोन महंगे होने तय माने जा रहे हैं।
रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक में यह फैसला लिया गया है। पिछले कुछ महीनों से देश में खुदरा महंगाई के आंकड़े लगातार चिंता का विषय बने हुए थे। बाजार के जानकारों का मानना है कि महंगाई पर लगाम कसने के लिए ही आरबीआई गवर्नर और समिति के सदस्यों ने ब्याज दरों को बढ़ाने का यह अहम फैसला लिया है। इस बदलाव से बैंकों के लिए रिजर्व बैंक से कर्ज लेना महंगा हो जाएगा। बैंक अपनी इस बढ़ी हुई लागत का सीधा बोझ आम ग्राहकों पर डालेंगे, जिससे लोन की ब्याज दरें ऊपर चली जाएंगी।
होम लोन और कार लोन की ईएमआई पर सीधा असर
रेपो रेट बढ़ने का सबसे सीधा और पहला असर आम आदमी के होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन पर पड़ेगा। जिन लोगों ने पहले से फ्लोटिंग ब्याज दर पर होम लोन ले रखा है, उनकी मासिक ईएमआई यानी किस्त अब बढ़ जाएगी। बैंक जल्द ही नए ब्याज दरों का ऐलान करेंगे। इसका मतलब यह है कि अब ग्राहकों को हर महीने अपनी जेब से अधिक पैसे चुकाने होंगे। चार साल तक ब्याज दरों में कोई बड़ा बदलाव न होने से राहत महसूस कर रहे मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए यह फैसला एक बड़ा वित्तीय झटका साबित हो सकता है।
रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़े जानकारों का कहना है कि लोन महंगे होने से मकान और फ्लैट खरीदने की सोच रहे खरीदार कुछ समय के लिए पीछे हट सकते हैं। जब घर खरीदना महंगा होता है, तो बाजार में प्रॉपर्टी की मांग पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ता है। पिछले कुछ समय से रियल एस्टेट बाजार में तेजी देखने को मिल रही थी, लेकिन ब्याज दरों में इस बढ़ोतरी के बाद अब डेवलपर्स और खरीदार दोनों ही सतर्क रुख अपनाते नजर आ रहे हैं।
बैंकों की ब्याज दरों में होगा बदलाव
आरबीआई के इस फैसले के तुरंत बाद देश के सभी बड़े सरकारी और निजी बैंक अपनी लोन और डिपॉजिट दरों की समीक्षा शुरू कर चुके हैं। आने वाले कुछ दिनों में बैंक अपने ग्राहकों के लिए लोन की नई ब्याज दरों की घोषणा करेंगे। केवल लोन ही नहीं, बल्कि जानकारों का यह भी मानना है कि बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी पर मिलने वाले ब्याज को भी बढ़ा सकते हैं। अगर एफडी पर ब्याज बढ़ता है, तो आम बचतकर्ताओं को इसका कुछ हद तक फायदा जरूर मिल सकता है, जो लोग बैंक में पैसा जमा करते हैं।
जमीनी स्तर पर आम लोगों ने इस फैसले पर अपनी चिंता जतानी शुरू कर दी है। पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे आम परिवारों का बजट अब और ज्यादा बिगड़ सकता है। घर का खर्च चलाने के साथ-साथ बढ़ी हुई ईएमआई चुकाना मध्यम वर्ग के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाएगा। वेतनभोगियों और छोटे कारोबारियों को अब अपनी मासिक वित्तीय योजना में बदलाव करना होगा ताकि इस अतिरिक्त बोझ को संभाला जा सके।
महंगाई को काबू करने के लिए उठाया गया कदम
केंद्रीय बैंक का यह साफ मानना है कि देश की लंबी अवधि की आर्थिक स्थिरता के लिए महंगाई को नियंत्रित करना सबसे जरूरी काम है। जब अर्थव्यवस्था में पैसों की आवाजाही को थोड़ा धीमा करना होता है, तो बैंक ब्याज दरों को बढ़ा देते हैं। इसी रणनीति के तहत रेपो रेट में यह बढ़ोतरी की गई है। हालांकि इससे थोड़े समय के लिए आम जनता को परेशानी उठानी पड़ सकती है, लेकिन केंद्रीय बैंक का उद्देश्य आने वाले दिनों में अर्थव्यवस्था को पटरी पर बनाए रखना है।
द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है। जैसे ही देश के प्रमुख बैंक अपनी नई ब्याज दरों और ईएमआई के नए आंकड़ों की आधिकारिक घोषणा करेंगे, हमारी टीम जमीनी रिपोर्ट के जरिए आप तक सबसे सटीक जानकारी पहुंचाएगी। फिलहाल हर बैंक ग्राहक को अपनी अगली किस्त और बैंक के अगले संदेश पर कड़ी नजर रखने की जरूरत है।




