नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश भर में एसआईआर और मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक दलों के बीच घमासान लगातार तेज होता जा रहा है। इसी गहमागहमी के बीच चुनाव आयोग के आंकड़ों से एक बड़ी खबर सामने आई है। पिछले मात्र सात दिनों के भीतर देश भर में आठ लाख से अधिक नए मतदाताओं के नाम जोड़े गए हैं। चुनाव आयोग ने इस प्रक्रिया को और तेज करने के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया है। इस अभियान का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित न रहे। जमीनी स्तर पर ब्लॉक लेवल ऑफिसर्स यानी बीएलओ घर-घर जाकर फॉर्म जमा कर रहे हैं और नए नाम जोड़ने का काम कर रहे हैं।
राजधानी दिल्ली में भी वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने और पुरानी जानकारी में बदलाव करने की कवायद काफी तेज हो गई है। पिछले चौबीस दिनों के भीतर दिल्ली के मुख्य निर्वाचन कार्यालय को एक लाख चौदह हजार से अधिक नए आवेदन मिले हैं। युवा वर्ग और नए मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने को लेकर खासे उत्साहित नजर आ रहे हैं। दिल्ली के विभिन्न इलाकों में विशेष कैंप लगाए गए हैं जहां लोग आसानी से अपने फॉर्म जमा कर पा रहे हैं। चुनाव आयोग के अधिकारियों का कहना है कि लोगों की भीड़ को देखते हुए कर्मचारियों की संख्या भी बढ़ाई गई है ताकि किसी को लंबी कतारों में खड़ा न होना पड़े।
पश्चिम बंगाल एसआईआर और सुप्रीम कोर्ट का रुख
पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया को लेकर मामला देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। कोर्ट ने चुनाव आयोग से उन मतदाताओं का पूरा ब्योरा मांगा है जिन्हें हालिया सूची से बाहर किया गया है। राजनीतिक दलों के आरोपों और प्रत्यारोपों के बीच अदालत यह सुनिश्चित करना चाहती है कि किसी भी वैध नागरिक का नाम सूची से न कटे। इससे पहले अदालत ने उन दावों को खारिज कर दिया था जिनमें संदिग्ध सूची के सत्ताईस लाख मतदाताओं को तुरंत राहत देने की मांग की गई थी। इस आदेश के बाद साफ हो गया है कि जिन लोगों के नाम दस्तावेजों की कमी के कारण बाहर हुए हैं, वे आगामी चुनाव में वोट नहीं डाल पाएंगे।
दूसरी ओर राजनीतिक गलियारों में भी इस मुद्दे पर बयानों का दौर रुकने का नाम नहीं ले रहा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयानों पर पलटवार करते हुए भाजपा नेता तरुण चुग ने कड़ा हमला बोला है। तरुण चुग ने कहा है कि चुनाव आयोग के बयानों से यह पूरी तरह बेनकाब हो गया है कि विपक्ष अपनी नाकामी छुपाने के लिए संवैधानिक संस्थाओं पर झूठे आरोप लगा रहा है। भाजपा का यह भी कहना है कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संस्था है और उसका काम पूरी पारदर्शिता के साथ मतदाता सूची को दुरुस्त करना है। राजनीतिक दलों के इन तीखे बयानों के बीच आम जनता का ध्यान पूरी तरह से अपने दस्तावेजों को ठीक कराने और सूची में नाम दर्ज कराने पर केंद्रित है।
विशेष अभियान और बीएलओ की मैराथन दौड़
देश के कई राज्यों में चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे इस विशेष अभियान के तहत बीएलओ को सख्त निर्देश दिए गए हैं। हर मतदान केंद्र पर शनिवार और रविवार को विशेष शिविर आयोजित किए जा रहे हैं ताकि कामकाजी लोग भी आसानी से पहुंच सकें। मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र और आयु के प्रमाण के रूप में जन्म प्रमाण पत्र या स्कूल का सर्टिफिकेट मान्य किया जा रहा है। आयोग ने साफ कर दिया है कि फर्जी मतदाताओं को हटाने और वास्तविक नागरिकों को जोड़ने का यह काम पूरी कड़ाई से किया जाएगा। ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक कई जगहों पर लोग सुबह से ही फॉर्म जमा कराने के लिए लंबी कतारों में खड़े दिखाई दे रहे हैं।
आगामी चुनावों को देखते हुए इस प्रक्रिया के राजनीतिक और सामाजिक मायने बहुत गहरे हैं। एक तरफ जहां राजनीतिक दल अपने समर्थकों के नाम सूची में बनाए रखने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं, वहीं चुनाव आयोग अपनी निष्पक्षता साबित करने में जुटा है। सात दिन में आठ लाख नए मतदाताओं का जुड़ना इस बात का प्रमाण है कि देश के युवाओं और नए नागरिकों में लोकतंत्र के इस महापर्व को लेकर भारी उत्साह है। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगी और आगे भी हर अपडेट आप तक पहुंचाती रहेगी।










