नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की राजधानी दिल्ली में नागरिक अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले कार्यकर्ता सौरव दास और आशुतोष रांका एक बार फिर कानूनी शिकंजे में फंस गए हैं। दिल्ली पुलिस ने इन दोनों कार्यकर्ताओं के खिलाफ नया मुकदमा दर्ज किया है और पुलिस का यह कड़ा दावा है कि जेल से रिहाई के ठीक एक दिन बाद ही इन्होंने शांति समझौते यानी पीस बॉन्ड के नियमों को तोड़ दिया है। यह पूरा विवाद तब गरमाया जब इन नेताओं ने जंतर-मंतर पर एक बड़ा प्रदर्शन करने का ऐलान किया था और मौके पर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, इस मामले में सीजेपी से जुड़े इन प्रमुख कार्यकर्ताओं को स्थानीय अदालत ने पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिन शर्तों पर इन्हें पहले छोड़ा गया था, उन शर्तों की सरेआम धज्जियां उड़ाई गईं। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने से पहले सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से लगातार यह संदेश दिया जा रहा था कि कार्यकर्ता भारी संख्या में इकट्ठा होंगे, जिससे प्रशासनिक अमला भी पूरी तरह सतर्क हो गया था और एयरपोर्ट से लेकर जंतर-मंतर तक सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
जंतर-मंतर प्रदर्शन और पीस बॉन्ड के उल्लंघन का मामला
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब नागरिक अधिकार मंच से जुड़े सौरव दास, आशुतोष रांका और उनके साथियों ने जंतर-मंतर पर जुटने का सार्वजनिक ऐलान किया था। पुलिस सूत्रों का कहना है कि जब किसी व्यक्ति को मुचलके या पीस बॉन्ड पर रिहा किया जाता है, तो उसे तय समय तक किसी भी तरह के विरोध प्रदर्शन या कानून हाथ में लेने वाले आयحोजनों से दूर रहना होता है। लेकिन इन कार्यकर्ताओं ने रिहाई के तुरंत बाद ही इस कानूनी पाबंदी को नजरअंदाज कर दिया और जंतर-मंतर पर पहुंचकर जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
दिल्ली पुलिस की स्थानीय इकाइयों और खुफिया तंत्र को जैसे ही इनके इस ऐलान की भनक लगी, वैसे ही राजधानी के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। एयरपोर्ट और जंतर-मंतर के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। हालांकि तमाम सुरक्षा घेरे और पुलिस की चेतावनी के बावजूद कार्यकर्ता प्रदर्शन स्थल पर पहुंचने में कामयाब रहे, जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कानूनी कार्रवाई करते हुए उन्हें हिरासत में ले लिया और बाद में अदालत के सामने पेश किया।
अदालत का फैसला और कार्यकर्ताओं की बढ़ती मुश्किलें
दिल्ली की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद कार्यकर्ताओं के समर्थकों में गहरी नाराजगी देखने को मिल रही है, उनका आरोप है कि सरकार लोकतांत्रिक अधिकारों और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन की आवाज को कुचलने का प्रयास कर रही है। दूसरी तरफ पुलिस प्रशासन का साफ कहना है कि कानून सबके लिए बराबर है और पीस बॉन्ड का उल्लंघन करने वाले किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कोई भी हो।
यह पूरा विवाद केवल दिल्ली तक ही सीमित नहीं रहा है, बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी इन कार्यकर्ताओं के संगठनों की गतिविधियों को लेकर तनाव देखा जा रहा है। कुछ दिन पहले ही जयपुर में एक स्कूल का निरीक्षण करने पहुंचे इन कार्यकर्ताओं को स्थानीय लोगों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा था, जहां प्रवक्ता आशुतोष रांका के साथ मारपीट की घटनाएं भी सामने आई थीं। इन तमाम घटनाओं से साफ जाहिर होता है कि इन कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनता तथा प्रशासन के बीच टकराव का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है, जिस पर आने वाले दिनों में और तीखी कानूनी व राजनीतिक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।







