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सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान छीना माइक, वकील ने जंतर-मंतर केस से खुद को अलग किया

सुप्रीम कोर्ट में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़े मामले में तीखी बहस देखने को मिली। सुनवाई के दौरान दो वकीलों के बीच माइक खींचने की नौबत आ गई। इस घटना के बाद आहत होकर एक वकील ने खुद को केस की पैरवी से अलग कर लिया।
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नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस
राष्ट्रीय संपादकीय ब्यूरो•16 अक्टूबर 2026 • अपडेटेड•46
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सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान छीना माइक, वकील ने जंतर-मंतर केस से खुद को अलग किया
📷 सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान छीना माइक, वकील ने जंतर-मंतर केस से खुद को अलग किया — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • सुप्रीम कोर्ट में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़े मामले में तीखी बहस देखने को मिली। सुनवाई के दौरान दो वकीलों के बीच माइक खींचने की नौबत आ गई। इस घटना के बाद आहत होकर एक वकील ने खुद को केस की पैरवी से अलग कर लिया।
  • इस खबर से जुड़े सभी पहलुओं की जांच और निगरानी संबंधित विभागों द्वारा की जा रही है।
  • विशेषज्ञों के अनुसार इस घटनाक्रम का आम जनता पर सीधा असर पड़ सकता है।

नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — सुप्रीम कोर्ट के भीतर मंगलवार को अचानक तीखी बहस देखने को मिली। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की इजाजत से जुड़े एक मामले में सुनवाई चल रही थी। कोर्ट रूम में दो वकीलों के बीच जोरदार बहस शुरू हो गई। बात इतनी बढ़ गई कि एक वकील ने दूसरे के हाथ से माइक छीन लिया। इस अप्रत्याशित घटना से कोर्ट रूम में मौजूद सभी लोग दंग रह गए। पीठ के सामने हुई इस घटना के बाद एक वकील ने खुद को मामले से अलग कर लिया। उन्होंने साफ कहा कि वे इस माहौल में आगे बहस नहीं कर सकते।

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच के सामने यह पूरा मामला लगा था। यह याचिका राजधानी के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण धरना देने की मांग से जुड़ी थी। याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से एक से अधिक वकील अपनी दलीलें रखने के लिए आगे बढ़े थे। दोनों ही वकील कोर्ट के सामने अपनी बात पहले रखना चाहते थे। इसी होड़ में पोडियम पर लगे माइक को लेकर खींचतान हो गई। एक वकील ने जोर से माइक अपनी तरफ खींच लिया। इसके बाद कोर्ट रूम का माहौल काफी असहज हो गया।

कोर्ट रूम में माइक छीनने पर क्यों मचा बवाल?

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अनुशासन का बहुत कड़ा नियम होता है। पोडियम पर आमतौर पर एक समय में एक ही मुख्य वकील अपनी बात रखता है। लेकिन इस मामले में याचिकाकर्ता की पैरवी को लेकर दो वकीलों में तालमेल नहीं दिखा। जब पहले वकील अपनी दलील शुरू कर रहे थे, तभी दूसरे वकील ने बीच में हस्तक्षेप किया। दूसरे वकील ने सीधे हाथ बढ़ाकर माइक अपनी तरफ मोड़ लिया। इस पर पहले वकील ने सख्त आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि उनके साथ ऐसा बर्ताव बेहद अपमानजनक है।

पीठ ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर सख्त नाखुशी जाहिर की। जजों ने कहा कि देश की सबसे बड़ी अदालत में इस तरह का आचरण बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है। वकीलों को अपनी मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए। लेकिन अपमानित महसूस कर रहे वकील ने तुरंत बेंच से कहा कि वे अब इस केस की पैरवी नहीं करेंगे। उन्होंने भरी अदालत में खुद को इस याचिका से अलग करने का एलान कर दिया। इसके बाद वे अपनी फाइलें समेटकर सीधे कोर्ट रूम से बाहर निकल गए।

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जंतर-मंतर और लद्दाख प्रदर्शनकारियों से जुड़ा है पूरा मामला

यह पूरा कानूनी विवाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति न मिलने से जुड़ा है। राजधानी दिल्ली में हाल के दिनों में कई सामाजिक और राजनीतिक समूहों ने प्रदर्शन की कोशिश की थी। इनमें लद्दाख से आए जलवायु कार्यकर्ता और सामाजिक संगठन भी शामिल थे। दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देकर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया था। प्रशासन ने जंतर-मंतर और लुटियंस दिल्ली के आसपास धारा 163 लागू कर दी थी। पुलिस की इस पाबंदी के खिलाफ कई लोग सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे।

याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। पुलिस बिना ठोस वजह के लोगों को प्रदर्शन स्थल पर जाने से नहीं रोक सकती। दूसरी तरफ पुलिस और प्रशासन का कहना था कि लुटियंस दिल्ली अति संवेदनशील इलाका है। यहां संसद, राष्ट्रपति भवन और दूतावास स्थित हैं। बिना पूर्व अनुमति के बड़े जमावड़े से कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है। इसी संवेदनशील कानूनी मुद्दे पर कोर्ट में अंतिम फैसला होना था।

कनॉट प्लेस और दिल्ली में जमीनी स्तर पर बढ़ता तनाव

अदालत के बाहर राजधानी की सड़कों पर भी इस मामले को लेकर हलचल तेज है। हाल ही में सामाजिक कार्यकर्ता अभिजीत दीपके और उनके साथियों ने कनॉट प्लेस में जुटने का आह्वान किया था। वे हिरासत में लिए गए अपने साथियों की रिहाई की मांग कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे किसी सत्ता परिवर्तन की मांग नहीं कर रहे हैं। वे केवल छात्रों और कार्यकर्ताओं की बिना शर्त रिहाई चाहते हैं। लेकिन पुलिस ने कनॉट प्लेस के इनर और आउटर सर्कल में भारी बैरिकेडिंग कर रखी है।

जमीनी स्तर पर दिल्ली पुलिस ने मध्य दिल्ली में गश्त बढ़ा दी है। जंतर-मंतर जाने वाले हर रास्ते पर अर्धसैनिक बलों के जवान तैनात हैं। मेट्रो स्टेशनों के बाहर भी सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। किसी भी समूह को पांच से ज्यादा संख्या में इकट्ठा नहीं होने दिया जा रहा है। प्रदर्शनकारी संगठनों का आरोप है कि उन्हें शांतिपूर्ण बात रखने का मंच भी नहीं दिया जा रहा है। वहीं प्रशासन का दावा है कि त्योहारों और संसद सत्र के मद्देनजर सुरक्षा में कोई ढील नहीं दी जा सकती।

वकील के हटने के बाद अब आगे क्या होगा?

मुख्य वकील के हटने के बाद अब याचिकाकर्ता पक्ष को नया वकील तय करना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए कुछ समय दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अगली तारीख पर पूरे अनुशासन के साथ दलीलें सुनी जाएंगी। पीठ ने दोनों पक्षों को निर्देश दिया है कि वे अपनी लिखित दलीलें पहले से जमा कराएं। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन बनाना जरूरी है।

इस घटना ने बार काउंसिल और वकीलों के पेशेवर आचरण पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के कई वरिष्ठ सदस्यों ने घटना पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि जजों के सामने संयम खोना बार की गरिमा के खिलाफ है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अगली सुनवाई में कोर्ट जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर क्या गाइडलाइन तय करता है। दिल्ली की सड़कों से लेकर अदालत की दहलीज तक यह टकराव अभी थमता नहीं दिख रहा है।

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