नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की राजधानी में आज सियासी और अदालती पारा बेहद गर्म रहा। सुप्रीम कोर्ट के भीतर सुनवाई के दौरान जजों ने बहुत कड़े शब्दों में संदेश दिया। अदालत ने साफ कर दिया कि कोई भी न्यायपालिका पर दबाव नहीं बना सकता। कोई भी संस्था या दल जजों को डरा-धमका नहीं सकता है। यह टिप्पणी उस वक्त आई जब दिल्ली की सड़कों पर विपक्षी दल प्रदर्शन कर रहे थे। कुछ नेता सुप्रीम कोर्ट की तरफ मार्च निकालने की बात कह रहे थे।
अदालत की इस तल्ख टिप्पणी के बाद सियासी गलियारों में भारी हलचल मच गई। मुख्य न्यायाधीश और साथी जजों की पीठ ने साफ किया कि न्यायपालिका अपनी मर्यादा जानती है। जज किसी बंद कमरे या शीशमहल में नहीं बैठे हैं। उन्हें जमीन की हर सच्चाई और घटनाक्रम की पूरी जानकारी रहती है। लेकिन अदालत के फैसले भीड़ या नारों से तय नहीं होते। अदालत केवल संविधान और ठोस सबूतों के आधार पर ही चलती है।
अदालत में जजों ने साफ शब्दों में क्या कहा?
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि लोग अपनी राय रखने के लिए पूरी तरह आजाद हैं। लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सबको है। लेकिन अदालत के दरवाजे तक दबाव की राजनीति लाना पूरी तरह गलत है। कोर्ट ने कहा कि हम किसी भी पक्ष के हंगामे से प्रभावित नहीं होते हैं। जो लोग सोचते हैं कि वे अदालत पर दबाव बना लेंगे, वे गलतफहमी में हैं। कानून के सामने सभी पक्ष बराबर हैं और सुनवाई पूरी निष्पक्षता से ही होगी।
इसी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को एक औपचारिक नोटिस भी जारी किया। यह नोटिस चुनावों की पारदर्शिता और वोटर लिस्ट से जुड़ी याचिका पर दिया गया है। विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग के काम करने के तरीके पर सवाल खड़े किए थे। अदालत ने आयोग से इन सभी कानूनी सवालों पर जवाब दाखिल करने को कहा है। कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि याचिका पर विचार नियमों के तहत ही होगा।
दिल्ली की सड़कों पर सियासी हलचल और कड़ा पहरा
सुप्रीम कोर्ट की इस सख्त टिप्पणी का असर सड़कों पर भी साफ देखने को मिला। मंडी हाउस और जंतर-मंतर के आसपास पुलिस ने सुबह से ही कड़ा पहरा लगा रखा था। आम आदमी पार्टी और वाम दलों के कई बड़े नेता सड़कों पर उतरे। वे मुख्य चुनाव आयुक्त और आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। सुरक्षा बलों ने कई जगहों पर बैरिकेड लगाकर प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया।
इस पूरे मामले में विपक्षी खेमे के भीतर भी अलग-अलग रणनीतियां नजर आईं। जहां वाम दल और आम आदमी पार्टी सड़क पर पूरी ताकत दिखा रहे थे, वहीं कांग्रेस ने इस घेराव से थोड़ी दूरी बनाकर रखी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी आज पहले से तय कार्यक्रम के तहत चेन्नई के दौरे पर रहे। हालांकि कानूनी मोर्चे पर राहुल गांधी की तरफ से दायर याचिका पर वकील कोर्ट में डटे रहे।
सड़क से अदालत तक आगे क्या होगा?
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि यह मामला अभी शांत नहीं होने वाला है। विपक्षी दल आने वाले दिनों में चुनाव आयोग पर दबाव और बढ़ाना चाहते हैं। लेकिन आज सुप्रीम कोर्ट के रुख ने यह जता दिया है कि जजों पर किसी भी तरह का बाहरी असर नहीं पड़ेगा। आयोग को अब अदालत में अपना जवाब तय समय सीमा के भीतर देना होगा।
राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने निगरानी और कड़ी कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के आसपास अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात हैं। जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में जब आयोग का जवाब कोर्ट में आएगा, तब बहस और तीखी होगी। फिलहाल, अदालत के इस कड़े संदेश ने यह साफ कर दिया है कि इंसाफ कानून की किताबों से होगा, सड़क के हंगामे से नहीं।








