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देशपढ़ने में समय: 4 मिनट

सुप्रिया सुले की राजनीति के नए रंग: कभी राजनाथ सिंह के छुए पैर, तो कभी परिसीमन बिल पर सरकार को समर्थन के संकेत

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की नेता सुप्रिया सुले इन दिनों अपने राजनीतिक और पारिवारिक जीवन को लेकर चर्चा में हैं। दिल्ली में एक ऑल पार्टी मीटिंग के दौरान उनका रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पैर छूने का वीडियो सामने आया है। इसके अलावा, उन्होंने परिसीमन बिल पर सरकार को समर्थन देने के संकेत दिए हैं और एनडीए में जाने की अटकलों को खारिज किया है। दूसरी ओर, उनकी बेटी के रिसेप्शन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई दिग्गज नेता शामिल हुए।
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नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस
राष्ट्रीय संपादकीय ब्यूरो•8 अक्टूबर 2026 • अपडेटेड•26
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सुप्रिया सुले की राजनीति के नए रंग: कभी राजनाथ सिंह के छुए पैर, तो कभी परिसीमन बिल पर सरकार को समर्थन के संकेत
📷 सुप्रिया सुले की राजनीति के नए रंग: कभी राजनाथ सिंह के छुए पैर, तो कभी परिसीमन बिल पर सरकार को समर्थन के संकेत — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की नेता सुप्रिया सुले इन दिनों अपने राजनीतिक और पारिवारिक जीवन को लेकर चर्चा में हैं। दिल्ली में एक ऑल पार्टी मीटिंग के दौरान उनका रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पैर छूने का वीडियो सामने आया है। इसके अलावा, उन्होंने परिसीमन बिल पर सरकार को समर्थन देने के संकेत दिए हैं और एनडीए में जाने की अटकलों को खारिज किया है। दूसरी ओर, उनकी बेटी के रिसेप्शन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई दिग्गज नेता शामिल हुए।
  • इस खबर से जुड़े सभी पहलुओं की जांच और निगरानी संबंधित विभागों द्वारा की जा रही है।
  • विशेषज्ञों के अनुसार इस घटनाक्रम का आम जनता पर सीधा असर पड़ सकता है।

नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की सांसद सुप्रिया सुले इन दिनों दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र तक की राजनीति में केंद्र बिंदु बनी हुई हैं। एक तरफ जहां उनकी बेटी के शानदार रिसेप्शन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह जैसे बड़े नेता पहुंचे, वहीं दूसरी तरफ उनके राजनीतिक फैसलों ने सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। दिल्ली में हाल ही में हुई एक सर्वदलीय बैठक के दौरान सुप्रिया सुले का रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पैर छूने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो ने राजनीतिक शिष्टाचार और दलों की सीमाओं से परे आपसी सम्मान की एक अलग तस्वीर पेश की है।

लेकिन इस व्यक्तिगत शिष्टाचार के अलावा सुप्रिया सुले के नीतिगत बयानों ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा है। देश में चल रही परिसीमन की प्रक्रिया और उससे जुड़े बिल पर सुले ने सकारात्मक संकेत दिए हैं। उन्होंने साफ किया है कि अगर यह बिल देश और जनता के हित में है, तो उनकी पार्टी संसद में इसका समर्थन कर सकती है। हालांकि, इन अटकलों को तुरंत खारिज कर दिया गया है कि उनकी पार्टी एनडीए यानी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में शामिल होने जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे विपक्षी दलों के साथ वैचारिक रूप से जुड़ी हैं, लेकिन राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सरकार का साथ देने से परहेज नहीं करेंगी।

शिवसेना किसकी है और महाराष्ट्र की सियासत का नया रुख

महाराष्ट्र की राजनीति के पुराने और जटिल सवालों पर भी सुप्रिया सुले बेबाकी से अपनी राय रख रही हैं। जब उनसे यह पूछा गया कि असली शिवसेना किसकी है, तो उन्होंने बहुत सधा हुआ और तीखा जवाब दिया। उनका कहना था कि यह फैसला चुनाव आयोग और अदालत के दायरे का है, लेकिन जनता सब जानती है और असली ताकत जनता के हाथ में होती है। महाराष्ट्र में महा विकास अघाड़ी गठबंधन के भीतर भी तालमेल को लेकर अक्सर चर्चा होती रहती है, ऐसे में सुले का यह बयान राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है।

राज्य की राजनीति के अलावा सुप्रिया सुले के साथ हाल ही में एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना भी घटी। एक्सप्रेसवे पर सफर के दौरान उनकी कार का एक मामूली एक्सीडेंट हो गया। गनीमत यह रही कि इस हादसे में उन्हें कोई गंभीर चोट नहीं आई और वह पूरी तरह सुरक्षित हैं। घटना के तुरंत बाद उन्होंने सतर्कता दिखाते हुए टक्कर मारने वाली गाड़ी का नंबर सोशल मीडिया पर साझा किया और पुलिस को इसकी जानकारी दी ताकि उचित कार्रवाई हो सके। इस घटना के बाद उनके समर्थकों ने राहत की सांस ली।

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बेटी के रिसेप्शन में जुटा पूरा राजनीतिक विपक्ष और सत्ता पक्ष

राजनीतिक उठापटक और व्यस्तता के बीच सुप्रिया सुले के परिवार में एक बड़ा और सुखद आयोजन हुआ। उनकी बेटी के विवाह के उपलक्ष्य में आयोजित रिसेप्शन समारोह में देश की राजनीति के दिग्गज हस्तियों ने शिरकत की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत पक्ष और विपक्ष के कई बड़े नेता इस कार्यक्रम में पहुंचे। इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि राजनीतिक कटुता के बावजूद व्यक्तिगत रिश्तों और पारिवारिक आयोजनों में भारतीय राजनीति के नेता एक मंच पर आ सकते हैं।

द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि सुप्रिया सुले अपनी राजनीतिक रणनीति को बहुत ही सावधानी से आगे बढ़ा रही हैं। एक तरफ वे विपक्षी मोर्चे पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रही हैं, तो दूसरी तरफ राष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार के साथ संवाद के रास्ते भी खुले रख रही हैं। आने वाले दिनों में संसद के सत्र और महाराष्ट्र के स्थानीय चुनावों में उनकी यह संतुलित नीति किस तरह रंग लाती है, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा। फिलहाल, उनके हर एक कदम पर राजनीतिक विश्लेषकों की पैनी नजर बनी हुई है।

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