चेन्नई से ग्राउंड रिपोर्ट — तमिलनाडु की राजनीति और सामाजिक कल्याण योजनाओं के बीच मुख्यमंत्री विजय की सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने नवजात बच्चों के लिए एक ग्राम सोने की अंगूठी देने की योजना का ऐलान किया है। इस महत्वाकांक्षी योजना को 'थाईमामन थंग मोतिरम थिट्टम' नाम दिया गया है, जिसे लेकर आम जनता में काफी चर्चा है। सरकार का यह कदम बच्चों के स्वास्थ्य और जच्चा-बच्चा पंजीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया है।
इस योजना के तहत मिलने वाली सोने की अंगूठी की कीमत और खरीद के लिए सरकार ने टेंडर प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार ने लगभग 4.41 लाख सोने की अंगूठियां खरीदने के लिए टेंडर जारी किए हैं। प्रत्येक सोने की अंगूठी के लिए करीब 17 हजार रुपये का बजट तय किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती जाएगी ताकि सही लाभार्थियों तक योजना का पूरा लाभ पहुंच सके।
योजना का लाभ लेने के लिए क्या हैं जरूरी शर्तें
इस योजना का लाभ हर किसी को नहीं मिलेगा, बल्कि इसके लिए सरकार ने कुछ कड़े नियम तय किए हैं। योजना का फायदा उठाने के लिए मां का तमिलनाडु का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है। इसके अलावा, सरकारी पोर्टल PICME में पंजीकरण कराना जरूरी है और साथ में आरसीएच आईडी (RCH ID) होना भी बेहद जरूरी है। इन दस्तावेजों के बिना अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्रों से इस योजना का लाभ मिलना संभव नहीं होगा।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस योजना को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को विशेष निर्देश दिए गए हैं। प्रसव के समय ही दस्तावेजों की जांच शुरू हो जाएगी ताकि बाद में किसी भी प्रकार की परेशानी न हो। कई जिलों में स्वास्थ्य केंद्रों पर इस योजना के बारे में जानकारी देने के लिए पोस्टर भी लगाए जा रहे हैं ताकि गरीब और जरूरतमंद परिवारों तक सही समय पर बात पहुंच सके।
28 सितंबर को होगी योजना की औपचारिक शुरुआत
इस योजना की शुरुआत इसी महीने की 28 तारीख को होने जा रही है। मंत्री राजमोहन और मुख्यमंत्री विजय खुद इस योजना का शुभारंभ करेंगे। शुरुआती चरण में इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग के सभी बड़े अधिकारियों के साथ बैठकें पूरी हो चुकी हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि सोने की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार की यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए एक बड़ी राहत साबित हो सकती है।
हालांकि, विपक्षी दलों ने इस योजना की वित्तीय स्थिरता और टेंडर प्रक्रिया को लेकर कुछ सवाल भी खड़े किए हैं। लेकिन सरकार का दावा है कि बच्चों के कल्याण के लिए उठाया गया यह कदम पूरी तरह से पारदर्शी है। द फ्रीलान्स की ग्राउंड टीम इस योजना के जमीनी क्रियान्वयन और पहले दिन मिलने वाले लाभों पर लगातार नजर बनाए हुए है।
सोने की अंगूठी खरीद और बजट का पूरा गणित
सरकार द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, इस योजना पर भारी-भरकम राशि खर्च की जाएगी। प्रति अंगूठी 17 हजार रुपये का आवंटन यह सुनिश्चित करता है कि गुणवत्ता से कोई समझौता न हो। बाजार में शुद्ध सोने के दाम ऊपर-नीचे होने के बावजूद सरकार ने तय मानकों के अनुसार ही अंगूठियां खरीदने का फैसला किया है। जिला स्तर पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति कर दी गई है जो टेंडर पाने वाली कंपनियों और गुणवत्ता की जांच करेंगे।
आम जनता और खासकर ग्रामीण इलाकों की महिलाओं में इस योजना को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है। कई महिलाओं का कहना है कि यह पहली बार है जब राज्य सरकार की ओर से बच्चों के लिए इस तरह का अनूठा उपहार दिया जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह योजना प्रशासनिक स्तर पर कितनी सफल साबित होती है और कितने परिवारों को इसका वास्तविक लाभ मिल पाता है।







