नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश के चुनावी मैदान में एक बार फिर से सरगर्मी तेज हो गई है। हालिया राजनीतिक बवालो और एसआईआर प्रक्रिया से जुड़ी बहसों के बीच भारत निर्वाचन आयोग ने एक बड़ा और दूरगामी फैसला लिया है। आयोग ने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और पंजाब समेत देश के 17 प्रमुख राज्यों में मतदाता सूचियों को नए सिरे से अपडेट करने का सख्त आदेश जारी कर दिया है। इस पूरी प्रक्रिया को स्पेशल समरी रिवीजन यानी एसएसआर नाम दिया गया है, जिसके तहत जमीनी स्तर पर जाकर वोटर लिस्ट की खामियों को दूर किया जाएगा और नए नाम जोड़े जाएंगे।
देश के अलग-अलग हिस्सों से मिल रही ग्राउंड रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों से वोटर लिस्ट की शुद्धता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे। कई जगहों पर नाम कटने या गलत पते दर्ज होने की शिकायतें आम जनता और राजनीतिक दलों द्वारा दर्ज कराई जा रही थीं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग ने अब राज्य स्तर के चुनाव अधिकारियों को निर्देश भेजा है कि वे बिना किसी देरी के अपने-अपने इलाकों में स्पेशल समरी रिवीजन का काम शुरू करें। इस प्रक्रिया से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि आगामी चुनावों में किसी भी असली मतदाता का नाम वोटर लिस्ट से छूटे नहीं।
किन-किन राज्यों में शुरू होगी वोटर लिस्ट की यह विशेष सफाई?
निर्वाचन आयोग के ताजा आदेश के दायरे में देश के कुल 17 राज्य आ रहे हैं। इनमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, पंजाब और महाराष्ट्र जैसे बड़े और राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य शामिल हैं। इन राज्यों के जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे घर-घर जाकर सर्वे का काम पूरा करें। बीएलओ यानी बूथ लेवल अफसरों की जिम्मेदारी तय कर दी गई है ताकि वे हर एक घर का दरवाजा खटखटाकर मतदाताओं की मौजूदा स्थिति की सही जानकारी जुटा सकें। पिछले कुछ समय से चल रहे तमाम विवादों के बीच इस प्रशासनिक कदम को बहुत अहम माना जा रहा है।
जमीनी हकीकत यह है कि इन 17 राज्यों में होने वाले इस बड़े बदलाव से करोड़ों मतदाताओं पर सीधा असर पड़ेगा। कई राज्यों में विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, ऐसे में समय रहते वोटर लिस्ट को त्रुटिहीन बनाना आयोग के सामने एक बड़ी चुनौती भी है। जिन लोगों के नाम पते बदल गए हैं या जो युवा हाल ही में अट्ठारह वर्ष के हुए हैं, उनके पास अब अपना नाम सूची में दर्ज कराने का सुनहरा मौका होगा। राजनीतिक दलों ने भी इस प्रक्रिया पर पैनी नजर रखनी शुरू कर दी है ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी को समय रहते रोका जा सके।
एसआरआर और एसआईआर के बीच क्या चल रहा है जमीनी गणित?
पिछले कुछ हफ्तों से देश की राजनीति में एसआईआर और एसएसआर जैसे शब्दों ने खासी हलचल मचा रखी है। विपक्षी दल लगातार यह मांग कर रहे थे कि मतदाता सूचियों की पारदर्शिता पूरी तरह से पारदर्शी होनी चाहिए। चुनाव आयोग के इस नए आदेश के बाद अब यह साफ हो गया है कि आयोग प्रशासनिक स्तर पर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। विशेष समरी रिवीजन के तहत न केवल पुराने नामों की छंटनी होगी, बल्कि मृत और स्थानांतरित हो चुके लोगों के नाम भी सूची से हटाए जाएंगे ताकि मतदाता सूची एकदम साफ-सुथरी बन सके।
आम जनता के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि इस प्रक्रिया के दौरान उन्हें क्या करना होगा। बीएलओ जब आपके घर आएं तो उन्हें आधार कार्ड, पहचान पत्र और पते से जुड़े वैध दस्तावेज सही समय पर दिखाएं। यदि किसी का नाम पिछली सूची में छूट गया है, तो वह निर्धारित फॉर्म भरकर अपना नाम दोबारा जुड़वा सकता है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी होगी और किसी भी पात्र नागरिक को अपने मताधिकार से वंचित नहीं होने दिया जाएगा।
भविष्य की प्रशासनिक तैयारियां और द फ्रीलान्स की अंतिम पड़ताल
द फ्रीलान्स की टीम द्वारा की गई शुरुआती पड़ताल से यह बात सामने आई है कि जिला प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है। सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को यह निर्देश दिए गए हैं कि वे हर हफ्ते की प्रगति रिपोर्ट सीधे दिल्ली मुख्यालय को भेजें। लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। आने वाले दिनों में यह अभियान और ज्यादा तेज होगा क्योंकि देश के कई हिस्सों में चुनावी बिछात बिछनी शुरू हो चुकी है। साफ है कि यह विशेष अभियान आने वाले समय में भारतीय लोकतंत्र की सेहत तय करने में एक मील का पत्थर साबित होगा।





