नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश भर में आज से वर्ल्ड स्पेस वीक 2026 की शुरुआत हो गई है। अंतरिक्ष विज्ञान और रॉकेट तकनीक की दुनिया में इस बार कुछ नया देखने को मिल रहा है। इस हफ्ते का मुख्य उद्देश्य आम लोगों और खासकर युवाओं को अंतरिक्ष अनुसंधान की जानकारी देना है। देश के कई हिस्सों में अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े खास कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। विज्ञान प्रेमियों के लिए यह हफ्ता बहुत ही खास माना जा रहा है।
राजधानी दिल्ली समेत कई बड़े शहरों में इस आयोजन को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है। अंतरिक्ष अनुसंधान से जुड़ी संस्थाएं इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं। स्कूलों और विश्वविद्यालयों में विशेष कार्यशालाएं चलाई जा रही हैं। छात्र इन कार्यक्रमों में खुद रॉकेट के मॉडल बनाकर अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं। वैज्ञानिक और शिक्षक छात्रों को अंतरिक्ष की दुनिया से जुड़ी दिलचस्प जानकारियां दे रहे हैं।
प्रो. सतीश धवन को याद कर रहे हैं वैज्ञानिक
इस साल के वर्ल्ड स्पेस वीक के दौरान देश के महान वैज्ञानिक प्रो. सतीश धवन को विशेष रूप से याद किया जा रहा है। कई शहरों में उनके जीवन और कार्यों पर आधारित सेमिनार आयोजित किए गए हैं। वक्ताओं ने छात्रों को बताया कि कैसे प्रो. धवन ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। उनके योगदान को याद करते हुए युवा पीढ़ी को विज्ञान के क्षेत्र में आगे आने की प्रेरणा दी जा रही है।
देश के जाने-माने अनुसंधान केंद्रों में विशेष प्रदर्शनियां लगाई गई हैं। इन प्रदर्शनियों में भारतीय उपग्रहों और रॉकेटों के छोटे मॉडल रखे गए हैं। बच्चे और युवा इन्हें बहुत ही गौर से देख रहे हैं और वैज्ञानिकों से सवाल भी पूछ रहे हैं। आयोजकों का मानना है कि इस तरह के आयोजनों से देश में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा मिलता है। आने वाले दिनों में और भी कई बड़े सेमिनार होने की उम्मीद है।
रॉकेट तकनीक और अंतरिक्ष यात्रा पर हो रही चर्चा
इस बार के वर्ल्ड स्पेस वीक का मुख्य विषय अंतरिक्ष यात्रा और आधुनिक रॉकेट तकनीक पर आधारित है। दुनिया भर में अंतरिक्ष में इंसानों को भेजने वाले देशों की सूची और उनके इतिहास पर भी चर्चा हो रही है। भारत ने भी अंतरिक्ष के क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। गगनयान मिशन और अन्य आगामी योजनाओं पर भी इन सम्मेलनों में खुलकर बातचीत हो रही है।
आम जनता के लिए भी कई जगहों पर टेलिस्कोप के जरिए आसमान को देखने का इंतजाम किया गया है। रात के समय लोग खुले आसमान के नीचे अंतरिक्ष के रहस्यों को नजदीक से देख पा रहे हैं। इस अनोखे अनुभव का हिस्सा बनने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। स्थानीय प्रशासन और विज्ञान क्लब मिलकर इन आयोजनों को सफल बनाने में जुटे हुए हैं।
युवाओं को अंतरिक्ष विज्ञान से जोड़ने की बड़ी पहल
द फ्रीलान्स की ग्राउंड टीम ने पाया कि इस बार छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों के स्कूलों को भी जोड़ा गया है। ऑनलाइन माध्यमों से वैज्ञानिकों के लेक्चर गांवों के बच्चों तक पहुंचाए जा रहे हैं। इसका मकसद यह है कि देश के हर कोने के बच्चे को अंतरिक्ष विज्ञान के बारे में पता चले। विज्ञान के क्षेत्र में करियर बनाने की चाह रखने वाले युवाओं के लिए यह एक बहुत बड़ा मंच साबित हो रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजनों से देश को आने वाले समय में नए वैज्ञानिक और इंजीनियर मिलेंगे। अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन भी युवाओं को हरसंभव मदद देने के लिए आगे आ रहे हैं। इस हफ्ते के दौरान होने वाले सभी आयोजनों का पूरा ब्योरा जुटाया जा रहा है। आने वाले दिनों में इन कार्यक्रमों के नतीजे अंतरिक्ष क्षेत्र की दिशा तय करेंगे।







