नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश के निजी क्षेत्र के बड़े बैंकों में शुमार येस बैंक इस समय एक साथ कई मोर्चों पर बड़ी मुश्किलों का सामना कर रहा है। सर्वोच्च न्यायालय से बैंक को एक बड़ा कानूनी झटका मिला है जिसके तुरंत बाद शेयर बाजार में निवेशकों के बीच भारी हड़कंप मच गया। स्थिति इतनी खराब हो गई कि एक ही झटके में बैंक के शेयर बीस प्रतिशत तक नीचे लुढ़क गए। बाजार के जानकारों का कहना है कि इस अचानक आए झटके से छोटे और बड़े दोनों निवेशकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
बाजार में चल रही इस उथल-पुथल के बीच पंजाब के अमृतसर से एक बेहद डरावनी और सनसनीखेज खबर सामने आई है। अमृतसर में दिनदहाड़े येस बैंक के एक मैनेजर पर कुछ अज्ञात बदमाशों ने जानलेवा हमला कर दिया। पैसों के आपसी विवाद को लेकर बैंक परिसर के भीतर ही आरोपियों ने गोली चला दी, जो सीधे मैनेजर की टांग में जा लगी। इस खूनी हमले के बाद घायल बैंक अधिकारी को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उनकी हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। पुलिस इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है।
बैंक के भीतर खूनी खेल और बदमाशों की एंट्री
अमृतसर की इस घटना ने बैंक शाखाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर और बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अचानक तीन से चार युवक बैंक के अंदर जबरन घुस आए और गाली-गलौज करने लगे। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि हमलावरों ने पिस्तौल निकालकर फायरिंग शुरू कर दी। बैंक के अंदर गोली चलने की आवाज से कर्मचारियों और वहां मौजूद ग्राहकों में चीख-पुकार मच गई। इस खूनी खेल के दौरान मैनेजर गंभीर रूप से घायल हो गया और हमलावर मौके से फरार होने में कामयाब रहे।
स्थानीय पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां बैंक के सीसीटीवी फुटेज खंगालने में जुटी हुई हैं ताकि आरोपियों की जल्द से जल्द पहचान की जा सके। बैंक प्रबंधन ने इस घटना के बाद अपनी सभी स्थानीय शाखाओं में सुरक्षा गार्ड्स की संख्या बढ़ाने की मांग की है। कर्मचारियों में इस समय भारी डर का माहौल बना हुआ है क्योंकि पैसों के लेनदेन से जुड़े संस्थानों में इस तरह की हिंसा पहले कभी नहीं देखी गई थी। बैंक अधिकारियों का कहना है कि वे इस कठिन समय में अपने कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए हरसंभव कदम उठाएंगे।
वित्तीय मोर्चे पर एक तरफ संकट तो दूसरी तरफ मजबूती
एक तरफ जहां कानूनी लड़ाइयों और खूनी हमलों ने बैंक की साख को हिलाकर रख दिया है, वहीं दूसरी तरफ वित्तीय आंकड़ों में कुछ राहत भरी बातें भी सामने आई हैं। हाल ही में जारी दूसरी तिमाही के अपडेट के अनुसार येस बैंक का कुल लोन पोर्टफोलियो तीन लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया है। इसके साथ ही बैंक में आने वाला ग्राहकों का कुल डिपॉजिट यानी जमा राशि भी रॉकेट की रफ्तार से बढ़ रही है। इससे साफ पता चलता है कि आम जनता का भरोसा अभी भी बैंक की वित्तीय सेहत पर बना हुआ है।
दूसरी ओर, कॉरपोरेट जगत से आ रही खबरें बैंक के लिए मुश्किलें और बढ़ा रही हैं। रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर यानी आर-इन्फ्रा ने येस बैंक, जेएंडके बैंक और श्रेय के साथ कर्ज चुकाने में डिफॉल्ट कर दिया है। इस डिफॉल्ट की वजह से बैंक के फंसे हुए कर्ज यानी एनपीए का खतरा एक बार फिर से मंडराने लगा है। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में बैंक प्रबंधन को इन बड़े व्यावसायिक कर्जों को वसूलने के लिए कड़ी कानूनी कार्रवाई करनी होगी।
निवेशकों का मोहभंग और बाजार की भविष्य की चाल
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से निवेशकों का भरोसा थोड़ा डगमगाया जरूर है, लेकिन लंबी अवधि के जानकारों का मानना है कि बैंक धीरे-धीरे इन तमाम संकटों से उबरने की कोशिश कर रहा है। शेयर बाजार में आई इस भारी गिरावट को रोकने के लिए बैंक के शीर्ष अधिकारी लगातार निवेशकों को भरोसा दिलाने में जुटे हैं। हालांकि, जब तक कानूनी मामलों का कोई ठोस और स्थाई समाधान नहीं निकल जाता, तब तक निवेशकों में डर का माहौल बना रहेगा।
'द फ्रीलान्स' की इस जमीनी पड़ताल से यह साफ हो जाता है कि येस बैंक इस वक्त देश के सबसे संवेदनशील वित्तीय और सुरक्षा मामलों के केंद्र में है। एक तरफ जहां वित्तीय आंकड़े बैंक के मजबूत होने की गवाही दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अदालती झटके, कॉरपोरेट डिफॉल्ट और खूनी झड़पें बैंक की छवि को गंभीर नुकसान पहुंचा रही हैं। आने वाले हफ्तों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि बैंक प्रबंधन इन सभी चुनौतियों का सामना कैसे करता है और अपने ग्राहकों तथा निवेशकों का विश्वास कैसे बरकरार रखता है।






