नई दिल्ली से 'द फ्रीलान्स' की ग्राउंड रिपोर्ट। राजधानी के सबसे व्यस्त व्यावसायिक केंद्र कनॉट प्लेस इलाके में आज सुबह से ही भारी तनाव और गहमागहमी का माहौल देखने को मिला है। निर्धारित तिरंगा मार्च शुरू होने से पहले ही दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को छावनी में बदल दिया। पुलिस ने मार्च निकालने की कोशिश कर रहे प्रमुख कार्यकर्ताओं अभिजीत दीपके और नेहा बोरा को हिरासत में ले लिया है। मौके पर सुरक्षा इतनी सख्त है कि जरा भी नारेबाजी करने वाले हर व्यक्ति को तुरंत हिरासत में लिया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह एहतियाती कदम उठाया गया है ताकि शहर की शांति भंग न हो।
हिरासत में लिए जाने के दौरान मौके पर काफी तीखी नोकझोंक और बहस भी देखने को मिली। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस द्वारा रोके जाने पर अभिजीत दीपके ने अधिकारियों से तीखे सवाल किए और कहा कि वह पूरी तरह अकेले शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे हैं। इसके बावजूद सुरक्षाकर्मियों ने उनकी एक नहीं सुनी और उन्हें तथा उनके साथियों को गाड़ियों में बैठाकर थाने ले जाया गया। दूसरी तरफ, जेएनयू के छात्र आंदोलनों और अपनी लंबी भूख हड़ताल के चलते चर्चा में रहीं नेहा बोरा भी इस प्रदर्शन का हिस्सा थीं। थिएटर की दुनिया से लेकर राजनीति और सामाजिक संघर्ष तक का सफर तय करने वाली नेहा बोरा को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया है, जिससे उनके समर्थकों में भारी नाराजगी है.
कनॉट प्लेस पर भारी पुलिस पहरा और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
कनॉट प्लेस के भीतर और बाहर चप्पे-चप्पे पर भारी संख्या में पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों के जवानों को तैनात किया गया है। आने-जाने वाले हर संदिग्ध व्यक्ति और वाहन की कड़ी तलाशी ली जा रही है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके। पुलिस अधिकारियों का साफ निर्देश है कि इलाके में बिना अनुमति के किसी भी तरह का जुलूस, मार्च या विरोध प्रदर्शन नहीं होने दिया जाएगा। प्रदर्शनकारियों के हटने के बाद भी पुलिस बल लगातार गश्त कर रहा है और स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है। इलाके के दुकानदारों और आम नागरिकों को भी इस भारी सुरक्षा घेरे की वजह से आवाजाही में खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच दिल्ली के स्थानीय व्यापारियों और व्यापार मंडलों की चिंताएं भी काफी बढ़ गई हैं। आए दिन होने वाले प्रदर्शनों और सड़क मार्ग बंद होने के कारण व्यापार पर पड़ने वाले असर को लेकर व्यापारियों ने गहरी नाराजगी जताई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, व्यापारियों ने प्रधानमंत्री कार्यालय, मुख्य न्यायाधीश और विपक्ष के नेता राहुल गांधी को पत्र लिखकर अपनी परेशानी साझा की है। उनका कहना है कि इस तरह के लगातार विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा पाबंदियों के कारण कनॉट प्लेस जैसे बड़े बाजारों को हर दिन करोड़ों रुपये का भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है, जिससे आम कारोबारियों की कमर टूट रही है।
नेहा बोरा और अभिजीत दीपके के संघर्ष का पुराना इतिहास
अभिजीत दीपके और नेहा बोरा जैसे युवा चेहरे लगातार देश के विभिन्न मुद्दों पर मुखर होकर अपनी आवाज उठाते रहे हैं। नेहा बोरा का नाम तब देश भर में चर्चाओं में आया था जब उन्होंने अपनी विभिन्न मांगों के समर्थन में लगातार तेईस दिनों तक लंबी भूख हड़ताल की थी। छात्र राजनीति से जुड़े ये चेहरे कला, थिएटर और सांस्कृतिक माध्यमों से भी अपनी बात जनता के बीच रखते आए हैं। आज के इस मार्च का उद्देश्य क्या था और इसके पीछे कौन-कौन से संगठन जुड़े हैं, इस पर पुलिस और आयोजकों के अपने-अपने दावे हैं। पुलिस फिलहाल पकड़े गए सभी लोगों से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस प्रदर्शन के पीछे कौन लोग मुख्य रूप से शामिल थे।
जमीनी हकीकत यह है कि राजधानी दिल्ली में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों और पुलिसिया सख्ती का यह दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक तरफ जहां युवा कार्यकर्ता अपनी लोकतांत्रिक आजादी और विरोध दर्ज कराने के अधिकार की बात कर रहे हैं, वहीं प्रशासन और व्यापारी वर्ग सुरक्षा और आर्थिक नुकसान का हवाला देकर इस पर रोक की मांग कर रहा है। 'द फ्रीलान्स' की टीम इस पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है और जैसे ही पुलिस या प्रशासन की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने आता है, हम आप तक सबसे पहले सटीक जानकारी पहुंचाएंगे।
व्यापारियों की चिंता और भविष्य के सुरक्षा कदम
व्यापारियों का साफ कहना है कि राजधानी का दिल कहे जाने वाले कनॉट प्लेस में इस तरह के आयोजनों से ग्राहकों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो जाती है। त्योहारी सीजन और सामान्य दिनों में भी इस तरह के व्यवधानों से व्यापारिक गतिविधियां पटरी से उतर जाती हैं। स्थानीय पुलिस अब यह सुनिश्चित करने में जुटी है कि आने वाले दिनों में किसी भी कीमत पर यातायात और बाजार की व्यवस्था बाधित न हो। दूसरी तरफ, हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं के समर्थक कानूनी मदद और उनकी रिहाई के लिए थाने के बाहर डटे हुए हैं। कुल मिलाकर यह पूरा घटनाक्रम राजधानी दिल्ली की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से बेहद संवेदनशील बन चुका है।






