नई दिल्ली के इंडिया गेट पर आज एक बार फिर से न्याय की गूंज सुनाई दी है। उत्तराखंड की बहुचर्चित बेटी अंकिता भंडारी के माता-पिता अपनी बेटी के लिए इंसाफ की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए हैं। इस गंभीर धरने की खबर मिलते ही राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा तुरंत इंडिया गेट पहुंचे। दोनों नेताओं ने धरने पर बैठे माता-पिता के पास बैठकर उनका हौसला बढ़ाया और उनकी पूरी बात ध्यान से सुनी।
यह पूरा विरोध प्रदर्शन सिर्फ न्याय की मांग तक सीमित नहीं है बल्कि इसके पीछे एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक विरोध भी शामिल है। अंकिता का परिवार और उनके समर्थक दुष्यंत गौतम को राज्यपाल बनाए जाने का कड़ा विरोध कर रहे हैं। परिवार का कहना है कि जिन लोगों पर गंभीर सवाल उठते रहे हैं, उन्हें ऐसे बड़े संवैधानिक पदों पर बैठाना पूरी तरह गलत है। इसी फैसले के खिलाफ परिवार ने दिल्ली आकर सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जाहिर करने का फैसला किया है।
उत्तराखंड से दिल्ली तक पहुंचा न्याय का संघर्ष
साल 2022 में उत्तराखंड में हुए अंकिता भंडारी हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। एक रिसॉर्ट रिसेप्शनिस्ट की हत्या के बाद से ही लगातार राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल उठते रहे हैं। इतने साल बीत जाने के बाद भी परिवार का दर्द कम नहीं हुआ है और वे आज भी हर मंच पर न्याय की गुहार लगा रहे हैं। उत्तराखंड से चलकर दिल्ली के इंडिया गेट तक पहुंचना यह बताता है कि परिवार को स्थानीय स्तर पर अब भी कई मोर्चों पर निराशा हाथ लग रही है।
इंडिया गेट पर चल रहे इस धरने के दौरान सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए गए हैं। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के वहां पहुंचने से अचानक मीडिया और समर्थकों की भारी भीड़ जमा हो गई। कांग्रेस नेताओं ने साफ कहा कि पार्टी अंकिता के परिवार के साथ हर कदम पर खड़ी है। उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए और कहा कि बेटी के परिवार को न्याय दिलाना देश के हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर क्यों भड़का है परिवार
अंकिता भंडारी के परिवार का गुस्सा मुख्य रूप से राजनीतिक नियुक्तियों और सिस्टम के रवैये को लेकर है। परिवार का आरोप है कि जिन नेताओं या पदाधिकारियों से उन्हें न्याय की उम्मीद थी, वे उलटा विवादों में घिरे रहे हैं। दुष्यंत गौतम को राज्यपाल बनाए जाने के विरोध में परिवार ने सीधे तौर पर केंद्र और राज्य सरकार को घेरा है। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर गंभीर विचार नहीं किया जाएगा, उनका यह संघर्ष यूं ही जारी रहेगा।
इस धरने के दौरान आसपास के इलाकों में यातायात और सुरक्षा व्यवस्था पर भी असर पड़ा है। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना न घटे। आम लोग भी इंडिया गेट पर इस विरोध प्रदर्शन को देखकर रुक रहे हैं और सोशल मीडिया पर भी यह मामला तेजी से ट्रेंड कर रहा है। देश की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस मामले में परिवार की आपत्तियों पर क्या प्रतिक्रिया देती है।
देशभर में गूंज रहा है अंकिता भंडारी का मामला
अंकिता भंडारी का यह मामला सिर्फ एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि देश में महिलाओं की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था का एक बड़ा प्रतीक बन चुका है। जब भी इस मामले में कोई नया मोड़ आता है, देश का युवा और आम नागरिक सड़क पर उतर आता है। राहुल और प्रियंका गांधी का इस तरह धरने पर जाकर बैठना इस आंदोलन को एक राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक ताकत दे रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या सरकार इस विरोध के बाद कोई ठोस कदम उठाती है या यह मामला और तूल पकड़ता है।





