केरल की राजनीति और पुलिस महकमे में इन दिनों आर श्रीलेखा का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। राज्य की पहली महिला आईपीएस अधिकारी और अब भाजपा नेता बन चुकीं आर श्रीलेखा पर पोक्सो कानून के तहत गंभीर मामले दर्ज किए गए हैं। इस हाई-प्रोफाइल मामले में केरल हाई कोर्ट ने उन्हें बड़ी अंतरिम राहत दी है। अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर पर फिलहाल रोक लगा दी है जिससे उन्हें कुछ समय के लिए कानूनी शिकंजे से राहत मिल गई है।
यह पूरा विवाद तब और गहरा गया जब आर श्रीलेखा ने राज्य के पुलिस प्रशासन और सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह भी कहा था कि किस तरह से एक वरिष्ठ अधिकारी को दरकिनार किया जाता है। पुलिस विभाग में अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने कई बड़े मामलों की जांच की थी। लेकिन अब खुद उनके खिलाफ इस तरह के कानूनी पचड़े में फंसने से राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
पोक्सो मामले में हाई कोर्ट का बड़ा फैसला और कानूनी लड़ाई
आर श्रीलेखा ने अपने ऊपर लगे इन तमाम आरोपों को बेबुनियाद और राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया है। उन्होंने तुरंत केरल हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अपने ऊपर दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की। अदालत ने उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए पुलिस को नोटिस जारी किया और अंतरिम राहत प्रदान की। इस आदेश के बाद फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है, लेकिन कानूनी जांच की प्रक्रिया अभी भी जारी है।
कानूनी जानकारों का मानना है कि यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति विशेष से जुड़ा नहीं है, बल्कि पुलिस और राजनीति के बीच के रिश्तों को भी उजागर करता है। श्रीलेखा ने अपनी सेवा के दौरान कई विवादित और सनसनीखेज मामलों में निष्पक्ष जांच का दावा किया था। ऐसे में उनके खुद पोक्सो जैसे संवेदनशील मामले में घिरने से उनके समर्थकों और आलोचकों के बीच बहस छिड़ गई है। अदालत के अगले आदेश पर ही इस बात का फैसला होगा कि कानूनी आंच कितनी दूर तक जाती है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा और इस्तीफे की अटकलें
आर श्रीलेखा के केरल भाजपा में शामिल होने के बाद से ही उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे। हाल ही में उनके कुछ बयानों से यह बात सामने आई थी कि वे पार्टी के भीतर कुछ व्यवस्थाओं से असंतुष्ट थीं। 'डीजीपी को थमाया कॉन्स्टेबल का काम' जैसी चर्चाओं ने मीडिया में खूब सुर्खियां बटोरी थीं। इन अंदरूनी खबरों ने राजनीतिक सरगर्मी को और बढ़ा दिया है कि क्या वे पार्टी में अपनी भूमिका से पूरी तरह संतुष्ट हैं या नहीं।
स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पोक्सो मामले के तूल पकड़ने से भाजपा की छवि पर भी असर पड़ सकता है। विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर लगातार सरकार और भाजपा पर हमलावर हैं। हालांकि, श्रीलेखा ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है और कहा है कि वे न्याय के लिए कानूनी लड़ाई लड़ेंगी। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि अदालत इस मामले में क्या अंतिम फैसला सुनाती है और इसका केरल की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।




