द फ्रीलान्स की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में हुए एक भीषण नाव हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस भयानक दुर्घटना में एक ही परिवार के 13 मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई। हादसा इतना भयानक था कि नदी के घाट पर चीख-पुकार मच गई और स्थानीय लोग अपने आंसू नहीं रोक पाए। परिवार के लोग अपने बच्चों की तलाश में नदी किनारे पहुंचे थे, जहां शव मिलने के बाद कोहराम मच गया।
घटनास्थल पर मौजूद मांओं और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। माताओं की चीखें इतनी दर्दनाक थीं कि वहां मौजूद सुरक्षाकर्मी और आम नागरिक भी अपने आंसू नहीं रोक सके। प्रशासनिक लापरवाही और बचाव कार्यों में देरी के आरोपों के बीच हालात काफी तनावपूर्ण हो गए थे। परिजनों का गुस्सा और उनका बेबसी भरा रोना वहां मौजूद हर संवेदनशील व्यक्ति को अंदर तक झकझोर गया।
जिलाधिकारी से लिपटकर रो पड़े परिजन
दुख की इस घड़ी में जब जिले के जिलाधिकारी यानी डीएम मौके पर पहुंचे, तो पीड़ित परिवार का दर्द छलक उठा। परिजन डीएम से लिपटकर बुरी तरह बिलखने लगे और न्याय की गुहार लगाने लगे। इस भावुक पल को देखकर वहां मौजूद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का गला भी भर आया। डीएम ने पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया और हर संभव सरकारी मदद दिलाने का भरोसा दिया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते नाविकों और प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए होते, तो इतनी बड़ी अनहोनी को टाला जा सकता था। क्षमता से अधिक लोगों को नाव पर बैठाना इस हादसे की मुख्य वजह बताया जा रहा है। नदी में तेज बहाव और सुरक्षा जैकेटों की कमी ने इन मासूमों की जान ले ली। प्रशासन ने मामले की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दे दिए हैं और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की बात कही है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
इस बड़े हादसे के बाद नदी घाटों पर संचालित होने वाली नावों की सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बिना लाइसेंस और बिना लाइफ जैकेट के चल रही इन नावों पर रोक लगाने के लिए स्थानीय पुलिस अब सख्त कदम उठा रही है। सरकार की ओर से मृतकों के परिवारों के लिए मुआवजे का ऐलान कर दिया गया है, लेकिन अपनों को खोने वाले परिवारों के लिए यह राहत नाकाफी है।
गांव में मातम का माहौल है और किसी के घर चूल्हा नहीं जला है। एक साथ 13 बच्चों की अर्थियां उठने से पूरा गांव सदमे में है। प्रशासन अब यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोबारा न हो और हर घाट पर सुरक्षा के पूरे इंतजाम किए जाएं। द फ्रीलान्स की टीम इस मामले की आगे भी लगातार निगरानी करती रहेगी और हर नए अपडेट से पाठकों को अवगत कराती रहेगी।
प्रशासनिक मुआवजे और राहत कार्य का जायजा
घटना के तुरंत बाद सरकार हरकत में आई और राहत व बचाव कार्यों को तेज किया गया। गोताखोरों की मदद से सभी शवों को बाहर निकाला गया और पोस्टमार्टम के बाद उन्हें परिजनों को सौंप दिया गया। स्थानीय विधायक और मंत्रियों ने भी शोक संतप्त परिवार से मिलकर उन्हें सांत्वना दी है। हालांकि, जनता में इस बात का भारी गुस्सा है कि चेतावनियों के बावजूद घाटों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए जाते हैं।



