चेन्नई का कोयाम्बेडु बाजार हमेशा से दक्षिण भारत के सबसे व्यस्त इलाकों में एक रहा है। यहां रोजाना हजारों लोग खरीदारी के लिए आते हैं और लाखों टन सामान का लेन-देन होता है। हाल ही में गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर इस बाजार में खरीदारों का सैलाब उमड़ पड़ा था। हर तरफ लोगों की भीड़ और त्योहारी रौनक साफ दिखाई दे रही थी। सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए स्थानीय प्रशासन को भी खासी मशक्कत करनी पड़ी थी।
त्योहारी चमक-दमक के बीच इस इलाके से जुड़ी कुछ बड़ी प्रशासनिक और कानूनी खबरें भी सामने आई हैं। हाल ही में एक मामले में अदालत के आदेश के बाद कोयाम्बेडु बस स्टैंड पर तीन सरकारी बसों को जब्त करने की कार्रवाई की गई। यह कार्रवाई विच्छेद और दुर्घटना मुआवजे का भुगतान समय पर न किए जाने के एक पुराने विवाद के बाद की गई थी। इस घटना से परिवहन महकमे में हड़कंप मच गया और यात्रियों को भी थोड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा।
मेट्रो प्रोजेक्ट के घुमावदार रास्ते और इंजीनियरिंग की चुनौतियां
कोयाम्बेडु और उसके आसपास के इलाकों से गुजरने वाली चेन्नई मेट्रो रेल परियोजना के दूसरे चरण का काम तेजी से चल रहा है। इस नए प्रोजेक्ट के तहत पटरियों को कई तीखे मोड़ों और घुमावों से होकर गुजरना होगा। इंजीनियरों के लिए यह किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है क्योंकि तंग जगहों और भारी ट्रैफिक के बीच मेट्रो के खंभे और ट्रैक बिछाए जा रहे हैं। अधिकारियों का दावा है कि काम पूरा होने के बाद शहर के इस हिस्से में ट्रैफिक जाम से बहुत हद तक राहत मिल जाएगी।
दूसरी तरफ, ट्रांसपोर्ट सेक्टर से जुड़ी समस्याएं भी थमने का नाम नहीं ले रही हैं। कुछ समय पहले लगतार कई दिनों तक चले लारी (ट्रक) चालकों के काम ठप रखने की वजह से कोयाम्बेडु बाजार में सब्जियों के दाम आसमान छूने लगे थे। जरूरी सामान समय पर बाजार न पहुंचने के कारण हरी सब्जियों की कीमतें लगभग दोगुनी हो गई थीं। इससे आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ा और घरेलू बजट पूरी तरह से बिगड़ गया था।
स्वास्थ्य और प्रशासनिक मोर्चे पर एहतियात
महामारी के दौर के बाद से ही कोयाम्बेडु और आसपास के परिवहन केंद्रों पर स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर खास सतर्कता बरती जा रही है। अतीत में यहां से दूसरे जिलों जैसे ककुडलूर जाने वाले कुछ यात्रियों में संक्रमण की पुष्टि होने के बाद प्रशासन पूरी तरह चौकन्ना हो गया था। बाजार और बस अड्डों पर सैनिटाइजेशन और मास्क पहनने की हिदायत लगातार दी जाती रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति से बचा जा सके।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड टीम ने जब बाजार का दौरा किया तो पाया कि व्यापारी और आम लोग महंगाई और यातायात की पुरानी समस्याओं से जूझते हुए अपनी रोजी-रोटी चलाने में जुटे हैं। स्थानीय लोगों की मांग है कि बाजार में मूलभूत सुविधाओं को और बेहतर किया जाए तथा ट्रांसपोर्ट यूनियनों के मुद्दों का स्थायी समाधान निकाला जाए। प्रशासन की ओर से भी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि त्योहारी सीजन में लोगों को किसी बड़ी असुविधा का सामना न करना पड़े।
द फ्रीलान्स की अंतिम ग्राउंड पड़ताल
कुल मिलाकर कोयाम्बेडु बाजार केवल एक व्यापारिक केंद्र नहीं बल्कि चेन्नई की धड़कन है। यहां की हर छोटी-बड़ी घटना पूरे राज्य की अर्थव्यवस्था और यातायात को प्रभावित करती है। चाहे वह त्योहारों की भीड़ हो, मेट्रो निर्माण की तकनीकी पेचीदगियां हों या फिर कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई, हर मोर्चे पर सुधार की गुंजाइश बनी हुई है। हमारी टीम इस पूरे इलाके के घटनाक्रम पर आगे भी पैनी नजर बनाए रखेगी।






