नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश के कई राज्यों में इस समय मौसम ने अचानक एक नया और हैरान करने वाला रुख ले लिया है। अक्टूबर का महीना चल रहा है और आमतौर पर इस समय देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश का दौर थम चुका होता है, लेकिन इस बार हालात बिल्कुल अलग हैं। दिल्ली-एनसीआर से लेकर राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश तक लगातार हो रही बारिश ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। हमारी फील्ड टीम ने जब जमीनी हालात का जायजा लिया, तो पाया कि कई इलाकों में सितंबर जैसी भारी मानसूनी बारिश का अहसास फिर से लौट आया है। इस अचानक हुए बदलाव से न केवल शहरों में ट्रैफिक जाम और जलभराव की समस्या पैदा हुई है, बल्कि खेती-किसानी पर भी इसका सीधा असर पड़ रहा है।
राजधानी दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में सुबह से ही आसमान में काले बादल छाए रहे और झमाझम बारिश शुरू हो गई। इस अचानक हुई मानसूनी गतिविधि के कारण इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उड़ानों का संचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ। एयरलाइंस कंपनियों को सुरक्षा कारणों से करीब 25 उड़ानों को रद्द करना पड़ा या उनके समय में बदलाव करना पड़ा। सड़कों पर भारी जलभराव के कारण सुबह दफ्तर जाने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। मौसम विभाग के जानकारों का कहना है कि एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी वाली हवाओं के मेल ने उत्तर भारत के मौसम का मिजाज पूरी तरह से बिगाड़ दिया है।
राजस्थान में बांधों पर चली चादर, नदियां उफान पर
राजस्थान के कई जिलों में पिछले चौबीस घंटों से लगातार बारिश का दौर जारी है, जिससे बांधों और जलाशयों में पानी का स्तर तेजी से बढ़ गया है। दौसा जिले में स्थित प्रसिद्ध मोरेल बांध पर पांच इंच की पानी की चादर चल रही है, जिसे देखने के लिए स्थानीय लोगों की भीड़ जुट रही है। कोटपूतली-बहरोड़ और खैरथल जिलों में हालात इतने खराब हो गए हैं कि कई मुख्य सड़कें और अंडरपास पूरी तरह पानी में डूब चुके हैं। जयपुर और अलवर में लगातार हो रही बरसात के कारण निचले इलाकों में पानी भर गया है और प्रशासन को राहत एवं बचाव कार्य शुरू करने पड़े हैं। जयपुर में पिछले एक घंटे से अधिक समय तक हुई मूसलाधार बारिश ने नगर निगम के दावों की पोल खोल दी है, जहां मुख्य मार्गों पर पानी भर जाने से यातायात ठप हो गया।
बीसलपुर बांध में भी चार सेंटीमीटर नया पानी आया है, जिससे जयपुर और टोंक जिले को पीने का पानी उपलब्ध कराने वाले इस मुख्य जलाशय के जलस्तर में सुधार हुआ है। हालांकि, दूसरी ओर कोटा जिले में लगातार बढ़ रहे जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए नोनेरा और ऐबरा बांध के तीन बड़े गेट खोलने पड़े हैं। करौली जिले के हिंडौन क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं, जहां प्रशासन ने नदी किनारे बसे गांवों को सतर्क रहने की चेतावनी जारी कर दी है। स्थानीय ग्रामीण बताते हैं कि इस मौसम में इतनी भारी बारिश उन्होंने पिछले कई सालों में नहीं देखी थी, जिससे उनकी धान और सोयाबीन की पकी हुई फसलें खेतों में ही खराब होने की कगार पर पहुंच गई हैं।
मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में बाढ़ जैसे हालात
मध्य प्रदेश में मौसम का यह बदला हुआ मिजाज कम से कम 25 अक्टूबर तक ऐसा ही बने रहने की आशंका जताई जा रही है। मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के अधिकांश जिलों में तापमान में गिरावट दर्ज की गई है और आसमान में बादल छाए रहने के साथ रुक-रुक कर बारिश का सिलसिला जारी है। पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भी भारी बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। धार्मिक नगरी वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर और स्थानीय स्तर पर हुई भारी बारिश के चलते एक पूरी पुलिस चौकी पानी में डूब गई है, जिससे पुलिसकर्मियों को अपना कामकाज दूसरे स्थान पर शिफ्ट करना पड़ा है।
मैदानी इलाकों में हो रही इस बेमौसम बरसात से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है और जिला प्रशासन ने सभी प्रभावित क्षेत्रों में अलर्ट घोषित कर दिया है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कहा गया है ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके। स्वास्थ्य विभाग को भी निर्देश दिए गए हैं कि जलभराव वाले क्षेत्रों में फैलने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए तुरंत दवाइयों का छिड़काव किया जाए। द फ्रीलान्स की टीम लगातार इन सभी राज्यों के आपदा प्रबंधन विभागों के संपर्क में है और जमीनी स्तर पर राहत कार्यों की हर एक अपडेट आप तक पहुंचाती रहेगी।
किसानों की बढ़ी चिंता और आगामी दिनों का अनुमान
इस अचानक आई बारिश और खराब मौसम ने देश के अन्नदाता यानी किसानों की नींद उड़ा दी है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में धान, सोयाबीन और कपास की फसलें कटाई के लिए तैयार खड़ी थीं। खेतों में पानी भर जाने और लगातार धूप न मिलने के कारण इन फसलों के सड़ने का खतरा पैदा हो गया है। किसानों का कहना है कि अगर मौसम ने जल्द ही सुधार नहीं दिखाया, तो उनकी महीनों की मेहनत पानी में मिल जाएगी। कृषि विशेषज्ञों का सुझाव है कि किसान कटी हुई फसल को सुरक्षित स्थानों पर ढककर रखें और जल निकासी के लिए तुरंत खेतों में नालियां बनाएं।
मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले दो से तीन दिनों तक उत्तर और मध्य भारत के इन राज्यों में मौसम का मिजाज ऐसा ही नरम-गरम बना रह सकता है। हालांकि, 25 अक्टूबर के बाद से मानसून की पूरी तरह विदाई और मौसम के साफ होने की उम्मीद जताई जा रही है। तब तक के लिए प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक रूप से जलभराव वाले रास्तों पर जाने से बचें और मौसम विभाग की चेतावनियों पर पूरी नजर रखें। द फ्रीलान्स की यह विशेष ग्राउंड रिपोर्ट आपको देश के बदलते मौसम के हर एक सच से लगातार अवगत कराती रहेगी।








