नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर मुख्यधारा की खबरों तक एक नया विवाद तेजी से चर्चा में है। यह पूरा मामला सिटिज़न्स फॉर जस्टिस एंड पीस यानी सीजेपी को मिलने वाली विदेशी फंडिंग और अमेरिकी सहयोग से जुड़ा हुआ है। अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन ने हाल ही में इस विषय पर एक बड़ा बयान दिया था। उनके उस बयान के बाद देश के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में हलचल मच गई थी। इस बीच, स्वतंत्र शोधकर्ता और विश्लेषक अभिजीत दीपके ने इस पूरे मामले में सामने आकर सच्चाई सबके सामने रखने की बात कही है।
मैरी मिलबेन के दावों के बाद से ही यह सवाल उठ रहा था कि क्या भारत के मामलों में अमेरिकी हस्तियां इस तरह के बयान क्यों दे रही हैं। अभिजीत दीपके ने इस विषय पर गहरी नजर रखी है और शुरुआती पड़ताल के बाद कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। दीपके का कहना है कि बाहर से आने वाले बयानों के पीछे एक बड़ा एजेंडा काम कर रहा है। उन्होंने जनता के बीच इन सभी बातों को साफ तौर पर रखने का फैसला किया है। इसी सिलसिले में वे इन दिनों विशेष रूप से दिल्ली पहुंचे हैं ताकि मीडिया और जनता के सामने पूरे दस्तावेज रख सकें।
दिल्ली पहुंचकर अभिजीत दीपके का बड़ा ऐलान
राजधानी दिल्ली में मीडिया से बातचीत करते हुए अभिजीत दीपके ने अपनी अगली रणनीति का साफ ऐलान किया है। उन्होंने बताया कि वे इस पूरे विदेशी फंडिंग और बयानों के खेल की परतें एक-एक करके खोलेंगे। दीपके ने सोशल मीडिया के जरिए भी लोगों को इस बात की जानकारी दी है। उन्होंने अपनी घोषणा में बताया है कि वे इस मामले से जुड़े तमाम सबूत और तथ्य सबके सामने पेश करेंगे। उनके इस ऐलान के बाद से समर्थकों और विरोधियों दोनों के बीच भारी उत्सुकता बनी हुई है कि वे कौन से नए खुलासे करने वाले हैं।
अभिजीत दीपके द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, इस पूरे मामले का सच सामने लाने के लिए एक निश्चित समय तय किया गया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर बताया है कि वे आगामी 16 अक्टूबर को शाम 5 बजे इस पर विस्तार से बोलेंगे। इस प्रेस वार्ता या ऑनलाइन संबोधन में वे मैरी मिलबेन के दावों की सच्चाई का कच्चा चिट्ठा खोलेंगे। लोग यह जानने के लिए बेताब हैं कि आखिर इस फंडिंग नेटवर्क के पीछे कौन लोग हैं और इसका असल मकसद क्या है।
मैरी मिलबेन के दावों और CJP विवाद की जमीनी हकीकत
मैरी मिलबेन ने जिस तरह से सीजेपी के पक्ष में और अमेरिका से मिलने वाले समर्थन पर बात रखी, उसे लेकर कई सवाल खड़े हो गए। भारत में कई संगठनों और विचारकों का मानना है कि बाहरी ताकतों को देश के आंतरिक मामलों में दखल देने का कोई हक नहीं है। अभिजीत दीपके इसी बात का विरोध करते आए हैं कि कैसे विदेशी मंचों का इस्तेमाल करके भारत की छवि को नुकसान पहुंचाया जाता है। उन्होंने पहले भी कई मुद्दों पर तथ्यात्मक रिपोर्टिंग और विश्लेषण के जरिए अपनी बात रखी है।
इस पूरे घटनाक्रम पर आम जनता की भी कड़ी नजर है। सोशल मीडिया पर लोग लगातार अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं और पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। क्या वास्तव में सीजेपी को अमेरिकी चंदा मिल रहा है और इसके तार कहां तक जुड़े हैं, इसका असली जवाब 16 अक्टूबर को मिलने की उम्मीद है। अभिजीत दीपके के इस खुलासे के बाद इस विवाद के और तूल पकड़ने की पूरी संभावना है, जिस पर देश भर के मीडिया का ध्यान टिका हुआ है।


