नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की राजनीति में इस समय उत्तर प्रदेश से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने सोशल मीडिया पर एक ऐसा संदेश लिखा है जिससे सियासी गलियारों में भूचाल आ गया है। उन्होंने अपनी पोस्ट में सिर्फ 'टाटा-बाय-बाय' लिखा है जिसके बाद से राजनीतिक जानकारों का माथा ठनक गया है। कयास लगाए जा रहे हैं कि राज्यसभा चुनाव में टिकट न मिलने के कारण वह पार्टी से खासे नाराज चल रहे हैं। यह पोस्ट सामने आने के बाद से ही सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही है और लोग इसके अलग-अलग मतलब निकाल रहे हैं।
धर्मेंद्र कश्यप वही नेता हैं जिन्होंने साल 2014 और साल 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर शानदार जीत दर्ज की थी। वह पार्टी के पुराने और वफादार नेताओं में गिने जाते हैं। लेकिन हाल ही में जब राज्यसभा के लिए उम्मीदवारों के नामों का ऐलान हुआ, तब उनका नाम सूची में शामिल नहीं किया गया। इसके बाद से ही उनके समर्थकों में मायूसी छाई हुई थी। अब अचानक उनका यह cryptic संदेश सामने आना इस बात का संकेत दे रहा है कि पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।
टिकट कटने के बाद क्यों भड़के पूर्व सांसद?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि धर्मेंद्र कश्यप राज्यसभा जाने की उम्मीद लगाए बैठे थे। जब पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया तो उनकी नाराजगी खुलकर सामने आने लगी। हालांकि उन्होंने अपनी पोस्ट में सीधे तौर पर किसी का नाम नहीं लिया है और न ही अपनी नाराजगी की खुली वजह बताई है। लेकिन 'टाटा-बाय-बाय' जैसे शब्दों के इस्तेमाल से यह साफ हो गया है कि वह पार्टी के फैसलों से संतुष्ट नहीं हैं। उत्तर प्रदेश भाजपा में पिछले कुछ समय से टिकट बंटवारे को लेकर भीतरखाने नाराजगी की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। कौशल किशोर के बाद अब धर्मेंद्र कश्यप का नाम इस फेहरिस्त में जुड़ गया है।
इस पूरे मामले पर अभी तक भारतीय जनता पार्टी के किसी बड़े नेता या प्रदेश नेतृत्व का आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। पार्टी के रणनीतिकार इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। स्थानीय स्तर पर भी कार्यकर्ता और नेता इस बात को लेकर पसोपेश में हैं कि आखिर पूर्व सांसद का अगला कदम क्या होगा। क्या वह सचमुच पार्टी से किनारा कर लेंगे या यह सिर्फ सोशल मीडिया पर निकाली गई उनकी भड़ास है? इस सवाल का जवाब आने वाले दिनों में ही मिल पाएगा जब धर्मेंद्र कश्यप खुद मीडिया के सामने आकर अपनी स्थिति साफ करेंगे।
विपक्ष की नजर और सोशल मीडिया पर चर्चा
जैसे ही धर्मेंद्र कश्यप की यह पोस्ट वायरल हुई, विपक्षी दलों को भी बैठे-बिठाए मुद्दा मिल गया। विपक्षी नेताओं का कहना है कि भाजपा के भीतर अब सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है और धरातल पर पार्टी के पुराने नेता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। हालांकि राजनीतिक विश्लेषक इसे सिर्फ एक तात्कालिक भावनात्मक प्रतिक्रिया मान रहे हैं। उनका मानना है कि चुनाव के समय इस तरह के बयान नेताओं की नाराजगी दिखाने का एक पुराना तरीका होते हैं ताकि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व उनका संज्ञान ले।
मैदानी स्तर पर हमारे संवाददाताओं ने जब स्थानीय लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं से बात की, तो मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ लोगों का कहना है कि धर्मेंद्र कश्यप ने पार्टी के लिए बहुत काम किया है और उनकी अनदेखी नहीं होनी चाहिए थी। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि अनुशासन पार्टी सर्वोपरि होता है और किसी को भी इस तरह सार्वजनिक रूप से बयानबाजी नहीं करनी चाहिए। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भाजपा हाईकमान इस मामले में दख देकर पूर्व सांसद को मना पाता है या फिर यह दूरी और बढ़ जाती है।
पार्टी के भीतर बढ़ती खींचतान और आगे की राह
भारतीय जनता पार्टी हमेशा से अपनी अनुशासित कार्यशैली के लिए जानी जाती है, लेकिन हालिया दौर में टिकट वितरण को लेकर कई राज्यों में असंतोष की आवाजें उठी हैं। धर्मेंद्र कश्यप का यह मामला उसी असंतोष की एक बानगी माना जा रहा है। हमारे सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के वरिष्ठ नेता डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं ताकि इस नाराजगी को और आगे बढ़ने से रोका जा सके। उत्तर प्रदेश में आगामी राजनीतिक समीकरणों को साधने के लिए बीजेपी हर कदम फूंक-फूंक कर रख रही है।
द फ्रीलान्स की टीम इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है। हम यह भी जानने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या धर्मेंद्र कश्यप ने वाकई पार्टी छोड़ने का मन बना लिया है या यह सिर्फ एक दबाव बनाने की रणनीति है। जैसे ही इस मामले में कोई नया आधिकारिक अपडेट आएगा, हम सबसे पहले अपने पाठकों तक पहुंचाएंगे। फिलहाल तो गेंद भाजपा हाईकमान के पाले में है कि वह अपने इस नाराज नेता को कैसे और कब मनाते हैं।





