वाशिंगटन और नई दिल्ली से ग्राउंड रिपोर्ट — अमेरिकी राजनीति के केंद्र में एक बार फिर डोनाल्ड ट्रंप छाए हुए हैं। पिछले कुछ घंटों में उनके कई बयानों और फैसलों ने वैश्विक स्तर पर नई बहस छेड़ दी है। चाहे वह रूस और यूक्रेन के बीच ऊर्जा ठिकानों पर हमलों को रोकने का दावा हो या फिर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर उनकी सख्त प्रतिक्रिया, हर तरफ ट्रंप की चर्चा हो रही है। हमारी टीम ने इन तमाम अंतरराष्ट्रीय घटनाओं और भारतीय बाजार पर इनके पड़ने वाले असर की गहराई से पड़ताल की है।
ताजा घटनाक्रम में डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि रूस और यूक्रेन के बीच एनर्जी सीजफायर यानी ऊर्जा संयंत्रों पर हमलों को लेकर सहमति बन गई है। उन्होंने दोनों देशों को कड़ी चेतावनी दी है कि वे इस समझौते को बिल्कुल न तोड़ें। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि यह सीजफायर जमीन पर लागू होता है, तो युद्ध के मैदान में यह एक बड़ा कदम साबित हो सकता है। हालांकि, दोनों देशों की तरफ से इस पर अभी तक कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगी है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर इसका असर जरूर दिख रहा है।
रियाद एयरपोर्ट पर हूती हमले की कड़ी निंदा
इस बीच, पश्चिम एशिया से एक और बड़ी खबर सामने आई है। सऊदी अरब के रियाद एयरपोर्ट पर हुए हूती विद्रोहियों के हमले की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तीखे शब्दों में निंदा की है। ट्रंप ने साफ कहा है कि इस तरह के हमले क्षेत्रीय शांति के लिए बड़ा खतरा हैं और अमेरिका अपने सहयोगियों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस बयान के बाद खाड़ी देशों में सुरक्षा इंतजामों को और ज्यादा कड़ा कर दिया गया है।
दूसरी ओर, ट्रंप के कुछ बयानों ने सोशल मीडिया से लेकर मुख्यधारा की मीडिया तक अजीब सी बहस छेड़ दी है। हाल ही में उन्होंने महासागरों के नाम बदलने और होर्मुज जलडमरूमध्य का नाम 'ट्रंप स्ट्रेट' रखने जैसे अजीबो-गरीब सुझाव दिए हैं। इंटरनेट पर इन बयानों के बाद कई तरह के चुटकुले और मीम्स भी वायरल हो रहे हैं। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर उनके साथ नजर आ रही केटी जकारिया नाम की एक महिला की तस्वीरें भी अचानक इंटरनेट पर चर्चा का विषय बन गई हैं।
भारतीय आईटी इंडस्ट्री पर ट्रंप के फैसलों का शिकंजा
केवल कूटनीति ही नहीं, बल्कि कारोबार के मोर्चे पर भी ट्रंप के बयानों का असर भारतीय कंपनियों पर पड़ रहा है। टीसीएस, इंफोसिस और विप्रो जैसी दिग्गज भारतीय आईटी कंपनियों पर अमेरिकी नीतियों के प्रभाव को लेकर बाजार में चर्चा तेज हो गई है। जानकारों का कहना है कि वीजा नियमों और अमेरिकी नीतियों में संभावित बदलावों से भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ सकता है। निवेशक अभी से ही हर एक अमेरिकी नीति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।
जमीनी स्तर पर इसका सीधा असर उन भारतीय युवाओं पर भी पड़ सकता है जो अमेरिका में नौकरी की तलाश कर रहे हैं। आईटी सेक्टर के जानकारों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में अमेरिकी आव्रजन और व्यापार नीतियों को लेकर कुछ कड़े फैसले आ सकते हैं। भारतीय कंपनियों ने भी अपनी रणनीतिक तैयारियां शुरू कर दी हैं ताकि किसी भी अचानक आए बदलाव से निपटा जा सके। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे मामले पर अपनी नजर बनाए हुए है और जैसे ही नए आंकड़े आएंगे, हम सबसे पहले आप तक पहुंचाएंगे।






