वाशिंगटन/नई दिल्ली — अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और रक्षा गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी और खतरनाक खबर सामने आ रही है। दुनिया की महाशक्ति अमेरिका एक बार फिर ईरान के खिलाफ किसी बड़े और कड़े सैन्य कदम उठाने की योजना बना रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी रक्षा विभाग ईरान पर 'मदर ऑफ ऑल बम' यानी एमओएबी गिराने के विकल्पों पर विचार कर रहा है। यह हथियार अपनी भीषण मारक क्षमता और बड़े पैमाने पर तबाही मचाने के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। इस संभावित सैन्य कदम से मध्य पूर्व में तनाव का पारा एक बार फिर बहुत ऊपर पहुंच गया है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिकी राजनीतिक हलकों से भी लगातार बयानबाजी सामने आ रही है। अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के खिलाफ चल रहा मौजूदा सैन्य संघर्ष अब लगभग पूरा होने की कगार पर है। इसके साथ ही उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ इस पूरी स्थिति पर हुई चर्चा की जानकारी भी साझा की है। अमेरिकी प्रशासन के भीतर एक तरफ जहां सैन्य विकल्पों पर मंथन चल रहा है, वहीं दूसरी तरफ कूटनीतिक स्तर पर बातचीत के संकेत भी दिए जा रहे हैं।
क्या है अमेरिका का 'मदर ऑफ ऑल बम' और इसकी ताकत
आम भाषा में जिसे 'मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स' कहा जाता है, उसका आधिकारिक सैन्य नाम जीयूयू-43/बी जीबीयू-43/बी मैसिव ऑर्डनेंस एयर ब्लास्ट है। यह अमेरिका का अब तक का सबसे शक्तिशाली गैर-परमाणु बम माना जाता है। इस एक भारी-भरकम बम का वजन लगभग 21,600 पाउंड यानी करीब 9,8 टन होता है। यह जमीन के भीतर गहराई में बने बंकरों, सुरंगों और गुप्त ठिकानों को पूरी तरह नेस्तनाबूद करने की क्षमता रखता है। इसके एक ही धमाके से मीलों दूर तक धरती कांप जाती है और भारी तबाही मच सकती है।
सैन्य जानकारों का मानना है कि इस तरह के हथियारों का इस्तेमाल केवल तभी किया जाता है जब दुश्मन देश अपने अहम सैन्य अड्डों को जमीन के अंदर बहुत सुरक्षित छिपा लेता है। ईरान के कई परमाणु और सैन्य ठिकाने पहाड़ों के नीचे और भारी कंक्रीट के बंकरों में सुरक्षित बताए जाते हैं। अमेरिका के सैन्य रणनीतिकारों का एक धड़ा मानता है कि ऐसे बंकरों को भेदने के लिए केवल सामान्य हवाई हमले काफी नहीं हैं। यही वजह है कि एमओएबी जैसे सर्वनाशकारी हथियार को इस्तेमाल करने की चर्चा फिर से जोर पकड़ने लगी है।
अंतरराष्ट्रीय राजनीति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर इसका असर
अमेरिका और ईरान के बीच चल रही इस तनातनी का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर पड़ रहा है। मध्य पूर्व के देशों में इस बात का बड़ा डर सता रहा है कि अगर अमेरिका ने इस बड़े बम का इस्तेमाल किया, तो पूरा क्षेत्र एक भयानक युद्ध की आग में झुलस जाएगा। तेल की सप्लाई बाधित हो सकती है और दुनिया भर में महंगाई का नया संकट खड़ा हो सकता है। पड़ोसी देश भी इस स्थिति पर बेहद करीबी नजर बनाए हुए हैं और शांति की अपील कर रहे हैं।
दूसरी तरफ, इसी दौरान अमेरिका के घरेलू मोर्चे पर भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। हाल ही में ओरेगन राज्य के एक प्राइमरी स्कूल में हुई अंधाधुंध गोलीबारी की घटना ने अमेरिकी समाज को झकझोर कर रख दिया है। इस भयानक गोलीबारी में तीन बच्चों सहित पांच लोगों की मौत हो गई और हमलावर भी मारा गया। एक तरफ जहां अमेरिका अपने देश के भीतर हिंसक घटनाओं से जूझ रहा है, वहीं दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान के खिलाफ इतने बड़े सैन्य कदम उठाने की चर्चाएं तेज हैं।
युद्ध के मुहाने पर खड़े मध्य पूर्व का भविष्य
द फ्रीलान्स की ग्राउंड रिपोर्ट और वैश्विक रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि ईरान पर इस तरह के बड़े हथियार का इस्तेमाल करने के परिणाम बहुत ही विनाशकारी हो सकते हैं। ईरान ने भी साफ कर दिया है कि अगर उस पर किसी भी प्रकार का बड़ा हमला होता है, तो वह चुप नहीं बैठेगा और इसका मुंहतोड़ जवाब देगा। रूस और चीन जैसे देश भी इस पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर रखे हुए हैं। आने वाले कुछ दिन मध्य पूर्व के भविष्य और वैश्विक शांति के लिहाज से बेहद संवेदनशील और अहम साबित होने वाले हैं।





