गाजा पट्टी में इजरायली सेना और हमास के बीच चल रही खूनी जंग का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक गाजा में एक बार फिर इजरायली हवाई हमला हुआ है। यह हमला हमास के ठिकानों को निशाना बनाकर किया गया है। क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई दौर की बातचीत हो चुकी है। लेकिन युद्धविराम समझौते पर अब तक कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई है। इस बीच युद्ध के मैदान से लगातार बच्चों और आम नागरिकों की दर्दनाक तस्वीरें सामने आ रही हैं, जो पूरी दुनिया का ध्यान खींच रही हैं।
संघर्ष की इस आग के बीच यमन के हूती विद्रोहियों ने एक नया मोर्चा खोल दिया है। हूती संगठनों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि वे समंदर में इजरायल से जुड़े जहाजों पर हमला करेंगे। इस धमकी के बाद अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडराने लगा है। अमेरिका और उसके सहयोगी देश इस इलाके में लगातार गश्त कर रहे हैं। इसके बावजूद जहाजों पर हमले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। पश्चिम एशिया के इस तनाव ने दुनियाभर के बाजारों में चिंता बढ़ा दी है। तेल की कीमतों से लेकर सप्लाई चेन तक पर इसका असर साफ दिखने लगा है।
गाजा में युद्धविराम और बंधकों की रिहाई पर फंसा पेंच
कतर और मिस्र की मध्यस्थता से गाजा में युद्धविराम को लेकर लगातार बैठकें हो रही हैं। दोनों पक्ष कुछ शर्तों के साथ समझौते के करीब पहुंचना चाहते हैं। लेकिन बंदियों की रिहाई और गाजा से सैनिकों की वापसी पर बात अटक जाती है। हमास पूरी तरह युद्ध रोकने की मांग कर रहा है। वहीं इजरायल का कहना है कि जब तक हमास का पूरी तरह सफाया नहीं होता, तब तक सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी। इस जिद के कारण आम जनता पिस रही है। गाजा के अस्पतालों में दवाओं की भारी कमी हो गई है। खाने-पीने के सामान के लिए भी लोग तरस रहे हैं। राहत सामग्री के ट्रक भी बहुत मुश्किल से अंदर पहुंच पा रहे हैं।
युद्ध के इस माहौल में सोशल मीडिया पर फेक न्यूज यानी झूठी खबरों का बाजार भी गर्म है। अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर पुराने वीडियो और एडिटेड तस्वीरें शेयर की जा रही हैं। तमिलनाडु लोक सेवा आयोग यानी टीएनपीएससी ने भी हाल ही में ऐसी फर्जी और भ्रामक संदेशों को लेकर चेतावनी जारी की है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अनवेरिफाइड खबर पर भरोसा न करें। युद्ध की विभीषिका के बीच इंटरनेट पर फैलती अफवाहें समाज में तनाव और भ्रम पैदा कर रही हैं। पुलिस और साइबर सेल ऐसे मामलों पर कड़ी नजर रख रहे हैं ताकि फर्जीवाड़े को रोका जा सके।
मासूम बच्चों पर पड़ रहा है जंग का सबसे बड़ा असर
इस क्रूर युद्ध की सबसे दर्दनाक कीमत वहां के मासूम बच्चे चुका रहे हैं। मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्ट बताती है कि गाजा में इजरायली हमलों की वजह से कई छोटे बच्चों ने अपने हाथ-पैर गंवा दिए हैं। हूर नुसेइर जैसी छोटी बच्चियां इस खौफनाक हकीकत का जीता-जागता उदाहरण हैं। अस्पताल के बेड पर बिना अंगों के लेटे ये बच्चे दुनिया को झकझोर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय कानून के जानकारों का कहना है कि युद्ध के दौरान बच्चों की सुरक्षा तय करना सभी पक्षों की जिम्मेदारी है। लेकिन ज़मीनी हालात इसके बिल्कुल उलट हैं। स्कूल, अस्पताल और शरणार्थी शिविर भी सुरक्षित नहीं बचे हैं।
आने वाले दिनों में अगर युद्धविराम पर कोई समझौता नहीं हुआ, तो यह संकट और गहरा सकता है। लेबनान सीमा पर हिजबुल्लाह के साथ भी इजरायल की झड़पें तेज हो गई हैं। क्षेत्रीय युद्ध का खतरा अब टालना मुश्किल लग रहा है। दुनिया भर के देश शांति की अपील कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र भी लगातार मानवीय सहायता पहुंचाने की गुहार लगा रहा है। लेकिन फिलहाल तो बंदूकों की गड़गड़ाहट के आगे शांति की हर आवाज कमजोर पड़ती दिख रही है। जमीन पर खूनखराबा जारी है और आम आदमी इस राजनीतिक खेल की सबसे बड़ी कीमत चुका रहा है।
लाल सागर में मंडराता खतरा और वैश्विक अर्थव्यवस्था
हूती विद्रोहियों की धमकियों के बाद समुद्री जहाजों को लंबे और महंगे रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। इससे माल ढुलाई का खर्च काफी बढ़ गया है। भारत समेत कई एशियाई देशों को यूरोप भेजने वाले सामान के लिए अब ज्यादा समय लग रहा है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित हुई है। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो महंगाई और तेजी से बढ़ेगी। व्यापारी और शिपिंग कंपनियां लगातार अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल से यह साफ है कि पश्चिम एशिया का यह संकट केवल दो देशों की लड़ाई नहीं है। इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर पड़ रहा है। जब तक इजरायल और हमास किसी राजनीतिक समाधान पर राजी नहीं होते, तब तक अमन की उम्मीद करना बेमानी होगा। भारत जैसे देशों के लिए भी यह स्थिति रणनीतिक रूप से बहुत संवेदनशील है। सरकार हर घटनाक्रम पर बारीकी से नजर बनाए हुए है ताकि देश के हितों और वहां रह रहे नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो सके।





