नई दिल्ली और मध्य पूर्व के हवाई क्षेत्र से एक बेहद सनसनीखेज और डरावनी खबर सामने आ रही है। हाल ही में एयरलाइन कंपनी फ्लाइदुबई के एक विमान को लेकर सुरक्षा एजेंसियों में भारी हड़कंप मच गया था। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई थी कि इजरायल की सुरक्षा सेनाओं को आसमान में ही विमान को मार गिराने तक का शक होने लगा था। इस गंभीर खतरे को देखते हुए इजरायली वायु सेना के घातक फाइटर जेट्स को तुरंत आसमान में तैनात कर दिया गया था। यह पूरी घटना अंतरराष्ट्रीय विमानन सुरक्षा और मध्य पूर्व के मौजूदा हालात पर बहुत बड़े सवाल खड़े करती है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, यह मामला तब शुरू हुआ जब विमान के संचालन के दौरान कुछ संदिग्ध गतिविधियां या कम्यूनिकेशन गैप सामने आया। ऐसे संवेदनशील समय में जब पूरा क्षेत्र पहले से ही भयंकर तनाव और युद्ध जैसे हालातों से गुजर रहा है, किसी भी विमान का संपर्क टूटना बहुत बड़ा खतरा बन जाता है। एयर ट्रैफिक कंट्रोल यानी एटीसी को यह शक हुआ कि कहीं इस कमर्शियल फ्लाइट को किसी ने हाइजेक तो नहीं कर लिया है। इस तरह के मामलों में देश की सुरक्षा एजेंसियां कोई भी जोखिम उठाने से बचती हैं और तुरंत कड़े कदम उठाती हैं।
आसमान में कैसे पैदा हुआ हाइजैकिंग का शक?
जब भी कोई यात्री विमान तय रूट से अलग हटता है या पायलट का संपर्क जमीन पर मौजूद अधिकारियों से कट जाता है, तो प्रोटोकॉल के तहत उसे खतरे के रूप में देखा जाता है। फ्लाइदुबई के इस विमान के साथ भी कुछ ऐसा ही तकनीकी या संवाद का अवरोध देखा गया था। इजरायल का एयरस्पेस दुनिया के सबसे ज्यादा सुरक्षित और कड़े पहरे वाले हवाई क्षेत्रों में गिना जाता है। वहां की सुरक्षा व्यवस्था हर सेकंड आसमान की निगरानी करती है। जैसे ही विमान की स्थिति में असमानता दिखी, रडार पर तैनात अधिकारियों की सांसे अटक गईं और तुरंत सर्वोच्च स्तर पर अलर्ट जारी कर दिया गया।
सुरक्षा के इन कड़े नियमों के तहत ही इजरायली वायु सेना के लड़ाकू विमानों को तुरंत रनवे से हवा में भेज दिया गया। फाइटर पायलटों को यह साफ निर्देश दिए गए थे कि वे स्थिति पर पूरी नजर रखें और जरूरत पड़ने पर कड़ा कदम उठाने के लिए तैयार रहें। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फाइटर जेट्स ने संदिग्ध विमान को हवा में ही घेर लिया था और उसके पायलट से संपर्क साधने की लगातार कोशिश की जा रही थी। अगर पायलट समय रहते सही जवाब नहीं देता, तो स्थिति और भी ज्यादा भयानक हो सकती थी और विमान को हवा में ही निशाना बनाया जा सकता था।
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गनीमत यह रही कि अंतिम क्षणों में पायलट और ग्राउंड कंट्रोल के बीच बातचीत बहाल हो गई। पायलट ने अपनी स्थिति स्पष्ट की और यह साबित कर दिया कि विमान में किसी भी तरह की कोई हाइजैकिंग या आपराधिक गतिविधि नहीं चल रही है। यह सिर्फ एक तकनीकी खराबी या गलतफहमी का मामला था जिसके कारण संपर्क टूट गया था। इस खुलासे के बाद इजरायली सेना ने राहत की सांस ली और फाइटर जेट्स को वापस बुला लिया गया। फ्लाइदुबई का यह विमान अंततः सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य की ओर निकल गया और एक बड़ा नरसंहार होने से बच गया।
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि मौजूदा दौर में वैश्विक आसमान कितना संवेदनशील हो चुका है। जरा सी चूक या संवाद की कमी सैकड़ों बेकसूर लोगों की जान पर भारी पड़ सकती है। विमानन विशेषज्ञ मान रहे हैं कि एयरलाइंस और सुरक्षा बलों के बीच तालमेल को और अधिक बेहतर बनाने की जरूरत है। आम यात्रियों के लिए भी यह सोचना डरावना है कि वे आसमान में सफर के दौरान कितने बड़े भू-राजनीतिक तनावों के बीच से गुजरते हैं।
फ्लाइदुबई और अंतरराष्ट्रीय उड्डयन पर इसका असर
इस पूरे घटनाक्रम के सामने आने के बाद से ही वैश्विक स्तर पर विमानन कंपनियों ने अपनी सुरक्षा बैठकों का दौर शुरू कर दिया है। मध्य पूर्व के ऊपर से गुजरने वाली उड़ानों के लिए सुरक्षा मानकों की दोबारा समीक्षा की जा रही है। फ्लाइदुबई की तरफ से हालांकि अभी तक कोई बहुत बड़ा आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन उनके प्रवक्ता ने इतना जरूर कहा है कि यात्रियों की सुरक्षा उनकी पहली प्राथमिकता है। इस तरह की घटनाएं भविष्य में न हों, इसके लिए हरसंभव तकनीकी सुधार किए जा रहे हैं।
द फ्रीलान्स की टीम इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है। अंतरराष्ट्रीय विमानन नियामक संस्थाएं भी इस बात की जांच कर रही हैं कि आखिर वह कौन सी तकनीकी वजह थी जिसके कारण इतना बड़ा भ्रम पैदा हुआ। आम जनता और यात्रियों के मन में भी अब अपने हवाई सफर को लेकर डर बैठ गया है। लेकिन प्रशासन का दावा है कि वे हर स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह सक्षम और सतर्क हैं ताकि किसी भी निर्दोष नागरिक की जान को खतरा न हो।




