नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — वैश्विक शेयर बाजारों में इन दिनों हलचल तेज बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिल रहे संकेतों का असर अब दुनिया भर के निवेशकों पर साफ देखा जा सकता है। अमेरिकी बाजार पिछले सत्र में सुस्त रहे और मिला-जुला कारोबार देखने को मिला। डाओ जोंस और एसएंडपी पांच सौ जैसे बड़े सूचकांक सपाट बंद हुए, जबकि नैस्डैक में हल्की गिरावट दर्ज की गई। ऐसे माहौल में यूरोपीय बाजार और खासकर जर्मनी का डैक्स इंडेक्स भी निवेशकों का खास ध्यान खींच रहा है। बाजार के जानकारों का मानना है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी की आशंका और महंगाई के आंकड़ों के बीच निवेशक बहुत फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं।
जर्मनी के प्रमुख शेयर सूचकांक डैक्स इंडेक्स में इस समय तकनीकी स्तरों पर कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। इंट्राडे कारोबार के दौरान डैक्स इंडेक्स के लिए छब्बीस हजार बीस का स्तर एक मजबूत रुकावट यानी रेजिस्टेंस बना हुआ है। विश्लेषकों का कहना है कि जब तक बाजार इस अहम दायरे को पार नहीं करता, तब तक बड़ी तेजी की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी। एशिया के बाजारों में भी कमजोरी का रुख बना हुआ है, जिसका असर यूरोपीय और अमेरिकी फ्यूचर्स पर भी पड़ रहा है। निवेशकों के पास इस समय स्पष्ट दिशा का अभाव है, क्योंकि वे दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों के अगले कदमों का इंतजार कर रहे हैं।
अमेरिका में महंगाई और जीडीपी के आंकड़ों पर टिकी निवेशकों की नजर
इस हफ्ते वैश्विक वित्तीय बाजारों की दिशा तय करने वाले कई बड़े आंकड़े आने वाले हैं। अमेरिका में इस हफ्ते फेडरल रिजर्व के पिछले नीतिगत बैठक के मिनट्स जारी किए जाएंगे। इसके अलावा चौथी तिमाही के जीडीपी अनुमान और पीसीई यानी पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर प्राइस इंडेक्स के आंकड़े भी सामने आने वाले हैं। महंगाई के मोर्चे पर पिछले कुछ समय में राहत के संकेत मिले हैं, लेकिन इसके बावजूद अमेरिकी बाजार में जोश की कमी साफ दिख रही है। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक ये ताजे आंकड़े आधिकारिक तौर पर जारी नहीं होते, तब तक बाजार के बड़े खिलाड़ी किसी भी तरह का बड़ा दांव लगाने से बच रहे हैं।
अमेरिका में महंगाई दर घटने के बावजूद बाजारों में सुस्ती इस बात का संकेत है कि निवेशक भविष्य को लेकर सतर्क हैं। ब्याज दरों में कटौती को लेकर अमेरिकी केंद्रीय बैंक का रुख क्या रहता है, इस पर पूरी दुनिया के शेयर बाजारों की नजर टिकी है। यदि महंगाई के आंकड़े उम्मीद से बेहतर आते हैं, तो वैश्विक बाजारों में फिर से रौनक लौट सकती है। इसके विपरीत, यदि आंकड़े निराशाजनक रहे तो डैक्स और अन्य प्रमुख सूचकांकों पर बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है। यही कारण है कि इस समय हर छोटी बड़ी खबर पर बाजार की चाल बदल रही है।
एशियाई बाजारों में कमजोरी और वैश्विक रुख का असर
एशियाई बाजारों से भी आज सुबह सुस्त और कमजोर संकेत ही मिले हैं। जापान, हांगकांग और चीन के बाजारों में बिकवाली का दबाव देखा गया है, जिससे वैश्विक सेंटिमेंट थोड़ा कमजोर हुआ है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिंसों यानी कमोडिटीज के दामों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव भी निवेशकों की चिंता बढ़ा रहे हैं। जानकारों का कहना है कि मौजूदा समय में शॉर्ट-ट्रेडर्स के लिए बाजार में जोखिम बहुत ज्यादा है। ऐसे में रिटेल निवेशकों को बिना सोचे-समझे किसी भी पोजीशन में उतरने से बचना चाहिए और तकनीकी स्तरों का पूरा ध्यान रखना चाहिए।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि आने वाले कुछ दिन वैश्विक बाजारों के लिए बेहद अहम साबित होने वाले हैं। डैक्स इंडेक्स के तकनीकी आंकड़ों से लेकर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के बयानों तक, हर एक पहलू बाजार की अगली चाल तय करेगा। भारतीय निवेशक भी ग्लोबल मार्केट के इन उतार-चढ़ाव पर पैनी नजर रखे हुए हैं, क्योंकि विदेशी निवेशकों की गतिविधियों का सीधा असर घरेलू बाजार पर भी पड़ता है।












