दिल्ली की सड़कों पर विरोध के नाम पर सुरक्षा बलों को उकसाने की साजिश
देश की राजधानी दिल्ली में इन दिनों चल रहे विभिन्न विरोध प्रदर्शनों के बीच एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर मामला सामने आया है। प्रदर्शनों और रैलियों की आड़ में कुछ तथाकथित यूट्यूबर और उपद्रवी तत्व कानून व्यवस्था को चुनौती देने से बाज नहीं आ रहे हैं। ताजा मामला कनॉट प्लेस और राजीव चौक मेट्रो स्टेशन के पास का है, जहां सुरक्षा में तैनात पैरामिलिट्री फोर्स और दिल्ली पुलिस के जवानों के साथ सरेआम अभद्रता की गई। स्थिति तब और बिगड़ गई जब भीड़ में शामिल एक युवती ने यूट्यूबर होने का नाटक करते हुए ड्यूटी पर तैनात महिला सुरक्षा जवान को थप्पड़ जड़ दिया। इस पूरी घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।
प्राथमिक जांच और चश्मदीद सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस पूरी घटना को एक सुनियोजित साजिश के तहत अंजाम दिया गया था। उपद्रवियों का मुख्य उद्देश्य सुरक्षा बलों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना और उन्हें आक्रामक होने के लिए मजबूर करना था। रणनीति यह थी कि यदि जवान जवाबी कार्रवाई करते हैं, तो उस फुटेज को तोड़-मरोड़कर सोशल मीडिया पर प्रसारित किया जाएगा और पुलिस प्रशासन की छवि को धूमिल किया जाएगा। हालांकि, मौके पर मौजूद अन्य सुरक्षाकर्मियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने गजब का संयम दिखाते हुए स्थिति को और अधिक बिगड़ने से रोक लिया, वरना माहौल पूरी तरह से बेकाबू हो सकता था।
कैमरे की फुटेज और सोशल मीडिया हैंडल्स खंगाल रही दिल्ली पुलिस
घटना के तुरंत बाद हरकत में आई दिल्ली पुलिस अब उन सभी चेहरों की पहचान करने में जुटी है जो इस पूरी अराजकता के पीछे मास्टरमाइंड के रूप में काम कर रहे थे। घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर अपलोड किए गए तमाम वीडियो फुटेज को फोरेंसिक जांच के लिए सुरक्षित रख लिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। पहचान सुनिश्चित होने के बाद सभी आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं के तहत कानूनी मुकदमे दर्ज किए जाएंगे और अदालती प्रक्रिया के तहत शिकंजा कसा जाएगा।
"कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने और ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मियों पर हाथ उठाने वालों को किसी भी कीमत पर माफ नहीं किया जाएगा। तकनीकी साक्ष्यों और वीडियो फुटेज के आधार पर दोषियों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।"— वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, दिल्ली पुलिस
इसके साथ ही, पुलिस साइबर सेल उन सोशल मीडिया अकाउंट्स पर भी पैनी नजर बनाए हुए है जो इस प्रकार के वीडियो को संपादित करके भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं। कई ऐसे हैंडल्स की पहचान की गई है जो भड़काऊ कैप्शन के साथ वीडियो पोस्ट कर रहे हैं ताकि आम जनता और युवाओं को उकसाया जा सके। पुलिस का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एक सुनियोजित एजेंडे के तहत फेक नैरेटिव गढ़ा जा रहा है, जिसका पर्दाफाश करना बेहद जरूरी हो चुका है।
सुरक्षाकर्मियों की निजी जानकारी लीक करने वालों पर कसेगा शिकंजा
इस पूरे प्रकरण का एक और डरावना पहलू सामने आया है, जो सीधे तौर पर सुरक्षा बलों के जवानों की व्यक्तिगत सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। पुलिस महकमे के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, कुछ चुनिंदा सोशल मीडिया हैंडल्स पर ड्यूटी पर तैनात महिला और पुरुष पुलिसकर्मियों के साथ-साथ पैरामिलिट्री जवानों के चेहरे, उनके नाम, व्यक्तिगत सोशल मीडिया अकाउंट्स और यहां तक कि उनके घरों के पते तक सार्वजनिक किए जा रहे हैं। इन पोस्ट के जरिए जवानों और उनके परिवारों को खुलेआम धमकियां दी जा रही हैं, जो कि राष्ट्रीय सुरक्षा और व्यक्तिगत गोपनीयता दोनों के लिहाज से एक गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम यूनिट इन तमाम आपत्तिजनक पोस्ट और आईडी का डेटाबेस तैयार कर रही है। जिन अकाउंट्स के जरिए सुरक्षाकर्मियों की पहचान उजागर की जा रही है, उनकी डिजिटल गतिविधियों को ट्रैक किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि वर्दी में तैनात जवानों के खिलाफ इस प्रकार का मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने और उन्हें सोशल मीडिया पर प्रताड़ित करने वालों के खिलाफ आईटी एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की प्रासंगिक धाराओं के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे किसी भी तरह के भ्रामक या असत्यापित वीडियो को आगे शेयर करने से बचें।
राजधानी से लेकर मुंबई तक उम्मीद से फीका रहा राजनीतिक मार्च
एक तरफ जहां जमीन पर इस तरह की छिटपुट घटनाएं और उकसावे की कार्रवाई देखने को मिलीं, वहीं दूसरी ओर दिल्ली से लेकर मुंबई तक आयोजित किए गए कुछ राजनीतिक और वैचारिक मार्च अपेक्षित जनसमर्थन जुटाने में पूरी तरह नाकाम साबित हुए। रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली के कनॉट प्लेस और मुंबई के आज़ाद मैदान में आयोजित कार्यक्रमों में उम्मीद से बेहद कम संख्या में लोग पहुंचे। दिल्ली में हालांकि सुरक्षा के कड़े इंतजाम जरूर किए गए थे, लेकिन मेट्रो सेवाएं सामान्य रूप से सुचारू रहीं, इंटरनेट सेवाएं बंद नहीं की गईं और बाजार भी पूरी तरह खुले रहे।
सिर्फ कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क के आसपास एहतियातन कुछ पाबंदियां लगाई गई थीं, लेकिन इसके बावजूद आयोजकों के दावों के विपरीत युवाओं और आम जनता ने इन आयोजनों से दूरी बनाए रखी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सोशल मीडिया के जरिए बड़े-बड़े दावे करने वाले संगठन जमीनी स्तर पर जनता का भरोसा जीतने में पूरी तरह असफल साबित हो रहे हैं। बहरहाल, पुलिस प्रशासन अब पूरी तरह से सतर्क है और राजधानी में शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए हरसंभव एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं ताकि किसी भी उपद्रवी तत्व को अपने मंसूबों में कामयाब होने का मौका न मिल सके।












