हाजीपुर/ग्राउंड ब्यूरो — बिहार के हाजीपुर से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहां गंगा नदी में एक नाव पलटने से बड़ा हादसा हो गया है। इस दर्दनाक हादसे में कुल 13 लोगों की जान चली गई है। मरने वाले सभी लोग एक रिश्तेदार के यहाँ भोज खाने के लिए जा रहे थे। रास्ते में ही यह भयानक आपदा आ गई और खुशियां मातम में बदल गईं।
शुरुआती जानकारी के अनुसार इस नाव पर क्षमता से बहुत ज्यादा लोगों को बैठाया गया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि नाव में करीब 15 से 20 लोग सवार थे। ओवरलोडिंग के अलावा नाव पुरानी थी और उसमें पहले से ही एक छेद था। पानी भरने की वजह से नाविक संतुलन खो बैठा और नाव बीच नदी में जाकर पलट गई। देखते ही देखते कई लोग गहरे पानी में समा गए।
गंगा में समा गए सपने, एक साथ पहुंचे 13 शव
इस हादसे के बाद पूरे इलाके में चीख-पुकार मच गई। आसपास के गोताखोरों और स्थानीय लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर कुछ लोगों को बचाने की कोशिश की। राहत और बचाव कार्य के दौरान एक के बाद एक शव बाहर निकाले गए। जब एक साथ 13 मासूमों और लोगों के शव उनके घरों पर पहुंचे, तो पूरा गांव रो पड़ा। किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि कुछ घंटे पहले जो लोग हंसते-खेलते घर से निकले थे, वे इस तरह दुनिया छोड़कर चले जाएंगे।
प्रशासन की शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस यात्रा के दौरान सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं थे। नाव में लाइफ जैकेट या बचाव के दूसरे साधन मौजूद नहीं थे। नदी पार कराने वाले स्थानीय नाविकों की लापरवाही भी इसमें साफ तौर पर दिखाई दे रही है। बिना मौसम और पानी के बहाव का ठीक से अंदाजा लगाए नाव को नदी में उतार दिया गया था, जिसके कारण यह अनहोनी हो गई।
प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा पर बड़े सवाल
इस भीषण हादसे के बाद स्थानीय लोगों में प्रशासन के खिलाफ भारी गुस्सा है। लोगों का कहना है कि गंगा घाटों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कभी नहीं रहते हैं। अवैध और जर्जर नाविकों का संचालन धड़ल्ले से जारी रहता है, लेकिन अधिकारी कोई ठोस कार्रवाई नहीं करते हैं। पुलिस और जिला प्रशासन के बड़े अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं और हालात का जायजा ले रहे हैं।
बिहार सरकार और जिला प्रशासन की तरफ से पीड़ित परिवारों को आर्थिक मदद देने का ऐलान किया गया है। लेकिन अपनों को खोने वाले परिवारों के लिए यह मुआवजा काफी नहीं है। इस घटना ने एक बार फिर नदी पार करने वाले ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। लोग अब मांग कर रहे हैं कि ऐसे लापरवाह नाविकों पर सख्त कार्रवाई हो ताकि भविष्य में किसी और की जान न जाए।
द फ्रीलान्स की अंतिम ग्राउंड पड़ताल
हमारी टीम ने जब घटनास्थल का दौरा किया तो पाया कि गंगा के कई घाटों पर आज भी नियमों को ताक पर रखकर नावें चलाई जा रही हैं। क्षमता से अधिक लोगों को बैठाना और सुरक्षा उपकरणों की अनदेखी करना आम बात बन चुकी है। जब तक प्रशासनिक अमला कड़े कदम नहीं उठाएगा, तब तक ऐसे हादसों को रोकना मुश्किल होगा। हाजीपुर का यह हादसा पूरे तंत्र के लिए एक बड़ी चेतावनी है।





