नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — यमन के हूती विद्रोहियों ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसने पूरे इलाके में हलचल मचा दी है। उनके विदेश मंत्री ने साफ-साफ कहा है कि वे भारत के खिलाफ पाकिस्तान के साथ खड़े हैं। उन्होंने पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल मुनीर को एक सीधी सलाह भी दी है। हूती विदेश मंत्री ने कहा है कि जनरल मुनीर को सऊदी अरब के बहकावे में नहीं आना चाहिए। यह खबर गूगल ट्रेंड्स पर तेजी से ऊपर आ रही है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब लाल सागर में हूतियों की वजह से जहाजों की आवाजाही पर खतरा मंडरा रहा है। इस बयान से भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में एक नया मोड़ आ सकता है। साथ ही, सऊदी अरब की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
हूती विद्रोहियों का यह बयान सिर्फ जुबानी नहीं है। इसके पीछे लाल सागर में उनकी बढ़ती ताकत है। हूती विद्रोही लगातार जहाजों पर हमले कर रहे हैं। वे इजरायल से जुड़े जहाजों को निशाना बनाने का दावा करते हैं। लेकिन इससे दुनिया भर के व्यापार पर असर पड़ रहा है। भारत के व्यापारिक जहाज भी इस रास्ते से गुजरते हैं। ऐसे में हूतियों का भारत के खिलाफ पाकिस्तान का साथ देने का बयान चिंता बढ़ाने वाला है। यह बयान क्षेत्रीय राजनीति में एक नया समीकरण पैदा कर सकता है। इससे पहले ईरान ने भी इस्लामाबाद में शांति वार्ता में हिस्सा लेने की बात कही थी। ईरान को हूतियों का समर्थक माना जाता है।
लाल सागर में हूतियों की बढ़ती ताकत और भारत पर असर
हूती विद्रोही यमन में एक बड़ा राजनीतिक और सैन्य समूह है। वे लंबे समय से सऊदी अरब समर्थित सरकार के खिलाफ लड़ रहे हैं। हाल के महीनों में उन्होंने लाल सागर में अपनी ताकत दिखाई है। उन्होंने कई व्यापारिक जहाजों पर हमले किए हैं। इन हमलों से वैश्विक व्यापार मार्ग बाधित हुआ है। कई शिपिंग कंपनियों ने लाल सागर से अपने जहाज मोड़ लिए हैं। इससे जहाजों को लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है। इससे माल ढुलाई का खर्च बढ़ गया है। भारत के लिए यह एक बड़ी समस्या है। भारत का बड़ा व्यापार लाल सागर के रास्ते ही होता है। हूतियों का यह बयान भारत के लिए एक कूटनीतिक चुनौती है। भारत को अपनी समुद्री सुरक्षा और व्यापारिक हितों को बचाना होगा।
हूतियों के विदेश मंत्री का यह बयान पाकिस्तान के लिए भी अहम है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल मुनीर को सऊदी अरब से दूर रहने की सलाह दी गई है। पाकिस्तान और सऊदी अरब के रिश्ते बहुत पुराने और गहरे हैं। सऊदी अरब ने पाकिस्तान को कई बार आर्थिक मदद दी है। पाकिस्तान की सेना भी सऊदी अरब की सुरक्षा में मदद करती रही है। ऐसे में हूतियों का यह बयान पाकिस्तान को एक मुश्किल स्थिति में डाल सकता है। पाकिस्तान को भारत और सऊदी अरब दोनों के साथ अपने रिश्तों को साधना होगा। यह बयान क्षेत्रीय संतुलन को बिगाड़ने की कोशिश हो सकता है।
पाकिस्तान और सऊदी अरब के पुराने रिश्ते, अब नई चुनौती
पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच दशकों पुराने मजबूत संबंध हैं। सऊदी अरब पाकिस्तान का एक अहम सहयोगी रहा है। उसने पाकिस्तान को आर्थिक संकट के समय कई बार सहारा दिया है। पाकिस्तान की सेना के अधिकारी और जवान सऊदी अरब में सुरक्षा और प्रशिक्षण में मदद करते रहे हैं। जनरल मुनीर का सऊदी अरब से दूर रहने का बयान इन पुराने रिश्तों पर सीधा हमला है। हूतियों का मकसद शायद पाकिस्तान को सऊदी अरब से दूर करना है। वे पाकिस्तान को अपने पाले में खींचना चाहते हैं। यह बयान दिखाता है कि क्षेत्रीय शक्तियों के बीच खींचतान कितनी बढ़ गई है। सऊदी अरब भी हज और उमराह यात्रियों की लापरवाही पर सख्त कार्रवाई कर रहा है। इससे पता चलता है कि वह अपनी छवि को लेकर कितना गंभीर है।
ईरान का इस पूरे मामले में एक बड़ा रोल है। ईरान को हूतियों का मुख्य समर्थक माना जाता है। ईरान ने हाल ही में इस्लामाबाद में शांति वार्ता में हिस्सा लेने की बात कही है। यह दिखाता है कि ईरान पाकिस्तान के साथ अपने रिश्तों को मजबूत करना चाहता है। ईरान ने समंदर में 'टोलबूथ' सिस्टम भी शुरू किया है। वह जहाजों से टैक्स वसूल रहा है। यह उसकी बढ़ती क्षेत्रीय ताकत का संकेत है। हूतियों का बयान ईरान की क्षेत्रीय रणनीति का हिस्सा हो सकता है। वे भारत को एक तरफ रखकर पाकिस्तान को अपनी तरफ खींचना चाहते हैं। इससे दक्षिण एशिया और मध्य पूर्व की राजनीति और उलझ सकती है।
भारत की कूटनीति और क्षेत्रीय संतुलन की चुनौती
भारत हमेशा से क्षेत्रीय शांति और स्थिरता का समर्थक रहा है। भारत के सभी देशों के साथ अच्छे संबंध हैं। भारत ने लाल सागर में हूतियों के हमलों पर चिंता जताई है। लेकिन उसने किसी भी पक्ष का साथ नहीं दिया है। हूतियों का यह बयान भारत के लिए एक नई कूटनीतिक चुनौती है। भारत को अपने हितों की रक्षा करनी होगी। उसे पाकिस्तान और सऊदी अरब के साथ अपने रिश्तों को भी मजबूत रखना होगा। भारत को इस पूरे मामले पर बहुत सावधानी से चलना होगा। उसे किसी भी तरह के टकराव से बचना होगा। यह बयान दिखाता है कि दुनिया की राजनीति कितनी जटिल हो गई है।
द फ्रीलान्स की पड़ताल बताती है कि हूतियों का यह बयान सिर्फ एक जुबानी हमला नहीं है। यह एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। वे लाल सागर में अपनी धाक जमाना चाहते हैं। वे क्षेत्रीय शक्तियों के बीच दरार पैदा करना चाहते हैं। भारत को इस चुनौती का सामना अपनी मजबूत कूटनीति से करना होगा। उसे सभी पक्षों से बात करनी होगी। उसे अपने व्यापारिक हितों और समुद्री सुरक्षा को प्राथमिकता देनी होगी। आने वाले समय में इस बयान के कई गहरे असर देखने को मिल सकते हैं। यह देखना होगा कि पाकिस्तान और सऊदी अरब इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।







