देश के कई राज्यों में इस वक्त मानसून और भारी बारिश की वजह से बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। बिहार से लेकर असम और पंजाब तक नदियां उफान पर हैं और पानी रिहायशी इलाकों में घुस चुका है। लोग अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने को मजबूर हैं। भोजपुर से लेकर मुंगेर तक बिहार के कई जिले बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं और जनजीवन पूरी तरह थम सा गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की तरफ से मदद मिलने में अभी भी वक्त लग रहा है।
असम में बाढ़ की स्थिति बेहद डरावनी बनी हुई है। यहां के बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों का कहना है कि उनके पास खाने के लिए सूखा राशन तो दूर, पीने का साफ पानी तक नहीं है। लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं जिससे बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। प्रशासन राहत सामग्री बांटने का दावा कर रहा है, लेकिन पानी का स्तर इतना ज्यादा है कि हर गांव तक पहुंचना अभी भी बहुत मुश्किल हो रहा है। एनडीआरएफ की टीमें लगातार लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के काम में जुटी हुई हैं।
बिहार और पंजाब में नदियां उफान पर
बिहार के कई जिलों में गंगा और कोसी जैसी नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। खेतों में खड़ी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं किसानों की सालभर की मेहनत पानी में बह गई है। वहीं दूसरी तरफ पंजाब के कई इलाकों में भी बारिश और बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। खेतों और सड़कों पर कई फीट पानी भरा हुआ है जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया है। ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक लोग अपने घरों की छतों पर रात गुजारने को मजबूर हैं क्योंकि नीचे कमरों में बाढ़ का पानी भरा हुआ है।
उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में भी बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। स्थिति का जायजा लेने के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव खुद बाढ़ पीड़ितों के बीच पहुंचे और उन्होंने हालात का मुआयना किया। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि इस भारी बाढ़ का एक बड़ा कारण प्राकृतिक जल स्रोतों पर अवैध अतिक्रमण है। उन्होंने मौके पर मौजूद सभी अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करें और पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट जल्द से जल्द सरकार को सौंपें।
राहत और बचाव कार्यों की जमीनी हकीकत
प्रभावित इलाकों में राहत शिविर तो बनाए गए हैं, लेकिन वहां बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी देखने को मिल रही है। लोग टेंटों के नीचे रहने को मजबूर हैं और छोटे बच्चों तथा बुजुर्गों के लिए दूध और दवाइयों की भारी किल्लत है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांवों में कैंप लगाकर लोगों की जांच कर रही हैं ताकि पानी से होने वाली बीमारियों को समय रहते रोका जा सके। नेपाल की तरफ से छोड़े गए पानी ने भी उत्तर भारत के कई मैदानी इलाकों में मुश्किलें और ज्यादा बढ़ा दी हैं।
द फ्रीलान्स की टीम जब बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंची तो लोगों का गुस्सा और लाचारी साफ दिखाई दी। लोगों का कहना है कि हर साल बरसात के मौसम में उन्हें इस तबाही का सामना करना पड़ता है, लेकिन स्थाई समाधान आज तक नहीं निकल पाया है। सरकार और प्रशासन भले ही बाढ़ रोकने के बड़े-बड़े दावे कर रहे हों, लेकिन जमीनी हकीकत यही है कि आम आदमी आज भी भगवान भरोसे जीने को मजबूर है।
प्रशासन की चेतावनी और आगामी कदम
मौसम विभाग ने आने वाले कुछ दिनों तक देश के कई हिस्सों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इसे देखते हुए प्रशासन ने नदियों के किनारे रहने वाले लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। जिला प्रशासन ने नियंत्रण कक्ष स्थापित किए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके। आने वाले दिनों में स्थिति कितनी गंभीर होती है, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि बारिश रुकती है या नहीं।






