नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश भर में इस समय गर्मी अपने तीखे तेवर दिखाना शुरू कर चुकी है। मौसम विभाग ने साफ कह दिया है कि आने वाले दिनों में तापमान में और ज्यादा उछाल आएगा। चेन्नई और उसके आसपास के इलाकों में गर्मी अब जानलेवा साबित होने लगी है। मौसम के जानकारों का कहना है कि तापमान सामान्य से काफी ऊपर जा रहा है। लोग चिलचिलाती धूप और उमस से बुरी तरह परेशान हो चुके हैं।
चेन्नई के मौसम पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों के मुताबिक, शहर और आसपास के जिलों में हालात बहुत गर्म होने वाले हैं। हालांकि दक्षिण और अंदरूनी हिस्सों में हल्की बारिश राहत दे सकती है, लेकिन उत्तर और आंध्र प्रदेश की सीमा से लगे इलाकों में पारा तेजी से भागेगा। महानगर के बाहरी इलाकों में तापमान चालीस डिग्री का आंकड़ा पार कर सकता है। यह इस बात का संकेत है कि इस बार गर्मी अपने पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़ सकती है।
चुनाव प्रचार के बीच मौसम की मार और बढ़ती तपिश
एक तरफ देश में चुनावी सरगर्मी पूरे उफान पर है और नेता रैलियां कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ मौसम का पारा भी लगातार चढ़ रहा है। मौसम विभाग का अनुमान है कि चुनाव प्रचार के इन गर्मा-गर्म दिनों में तापमान छत्तीस-सैंतीस डिग्री से बढ़कर सीधे चालीस डिग्री के आसपास पहुंच जाएगा। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि चिलचिलाती धूप में बाहर निकलने वाले लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। प्रशासन ने भी आम जनता को धूप से बचने की सलाह दी है।
बढ़ती गर्मी का असर सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया इसकी चपेट में है। अंतरिक्ष एजेंसी नासा के आंकड़े बताते हैं कि वैश्विक स्तर पर पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ रहा है। ब्रिटेन से लेकर फ्रांस तक गर्मी ने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। ब्रिटेन में सबसे गर्म दिन के दौरान आग लगने की घटनाएं सामने आईं, जिन्हें बुझाने के लिए दमकल कर्मियों को भारी मशक्कत करनी पड़ी। हालात यह हो गए कि फ्रांस जैसे देशों को अपने परमाणु रिएक्टरों को बंद करना पड़ा क्योंकि नदियों का पानी बहुत ज्यादा गर्म हो चुका था।
बदला हुआ वैश्विक मौसम और पर्यावरण पर संकट
दुनिया भर में मौसम का चक्र पूरी तरह से बदल चुका है। कभी अत्यधिक बारिश तो कभी रिकॉर्ड तोड़ गर्मी ने इंसानी जीवन को मुश्किल में डाल दिया है। वैज्ञानिक लगातार यह चेतावनी दे रहे हैं कि अगर कार्बन उत्सर्जन पर रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले वर्षों में स्थिति और अधिक भयानक हो जाएगी। गगनी चुम्बी इमारतों और कंक्रीट के जंगलों में बदल चुके शहर अब गैस चैंबर की तरह बन चुके हैं, जहां रात के समय भी ठंडक महसूस नहीं होती है।
स्थानीय स्तर पर आम जनता इस भीषण गर्मी से निपटने के लिए तरह-तरह के उपाय कर रही है। लोग घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं और ठंडे पेय पदार्थों का सहारा ले रहे हैं। अस्पतालों में गर्मी से बीमार होने वाले मरीजों की संख्या में भी इजाफा देखा जा रहा है। डॉक्टरों की सलाह है कि इस मौसम में जितना हो सके पानी पिएं और सीधे धूप के संपर्क में आने से बचें।
प्रशासन की तैयारियां और एहतियाती कदम
बढ़ती गर्मी को देखते हुए कई राज्य सरकारों ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है ताकि छोटे बच्चों को चिलचिलाती धूप का सामना न करना पड़े। मजदूरों और खुले में काम करने वाले लोगों के लिए दोपहर के समय काम रोकने या छांव में रहने के निर्देश दिए गए हैं। नगर निगमों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सार्वजनिक स्थानों पर पानी की टंकियां और प्याऊ की व्यवस्था करें ताकि राहगीरों को राहत मिल सके।
द फ्रीलान्स की जमीनी पड़ताल यह बताती है कि आने वाले हफ्तों में गर्मी से राहत मिलने की कोई खास उम्मीद नहीं है। मानसून के आने से पहले का यह समय देश के अधिकांश हिस्सों के लिए सबसे कठिन दौर होता है। पानी की कमी और बिजली की भारी मांग से ग्रिड पर भी दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में नागरिकों और प्रशासन दोनों को मिलकर इस आपदा से निपटने के लिए पूरी तैयारी रखनी होगी।





