मॉस्को/जेनेवा — रूस से एक बेहद डरावनी और सनसनीखेज खबर सामने आई है। यहाँ की एक गुप्त लैब में प्लेग जैसी खतरनाक बीमारी पर रिसर्च चल रही थी। इसी दौरान लैब के अंदर काम करने वाले एक कर्मचारी की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। इस घटना के सामने आने के बाद रूस के भीतर और बाहर हड़कंप मच गया है। स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत एक्शन लेते ہوئے करीब दो सौ ऐसे लोगों की पहचान की है जो उस कर्मचारी के संपर्क में आए थे। इन सभी लोगों को कड़ी निगरानी में रखा गया है ताकि संक्रमण आगे न फैले।
इस पूरी घटना के सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रूस की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। दुनिया भर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों को डर है कि कहीं यह खतरनाक बैक्टीरिया लैब से बाहर तो नहीं आ गया। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा है कि वह सीधे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात करेंगे और पता लगाएंगे कि आखिर अंदरखाने क्या चल रहा है। ट्रंप ने यह भी सवाल उठाया कि क्या रूस किसी तरह का बायोवेपन बना रहा था जिसकी सच्चाई दुनिया से छुपाई जा रही है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मांगी रूस से सफाई
इस खतरनाक मामले को गंभीरता से लेते हुए संयुक्त राष्ट्र और विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ ने रूस से जवाब तलब किया है। डब्ल्यूएचओ के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें अभी तक इस बात की पूरी जानकारी नहीं मिली है कि लैब के अंदर असल में क्या हादसा हुआ था। संगठन ने रूस से तुरंत एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है ताकि यह साफ हो सके कि संक्रमण का खतरा कितना बड़ा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस बात से डरा हुआ है कि यदि प्लेग का यह बैक्टीरिया लीक हुआ है, तो यह पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी आपदा बन सकता है।
दूसरी तरफ, रूस के स्थानीय प्रशासन और वैज्ञानिकों का दावा है कि स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है। उनका कहना है कि लैब के अंदर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम थे और बीमारी को बाहर फैलने से रोकने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा चुके हैं। हालांकि, रूस की तरफ से अभी तक कोई भी पुख्ता दस्तावेज या पारदर्शी रिपोर्ट दुनिया के सामने नहीं रखी गई है। इसी वजह से शक की सुई रूसी प्रशासन की तरफ घूम रही है कि वे शायद किसी बड़ी गलती को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं।
क्या न्यूमोनिक प्लेग के फैलने का है कोई खतरा?
आम लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह प्लेग हवा के जरिए पूरी दुनिया में फैल सकता है जैसा कोरोना वायरस फैला था। इस पर दुनियाभर के वरिष्ठ डॉक्टरों और शोधकर्ताओं ने अपनी राय दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि न्यूमोनिक प्लेग इंसानों से इंसानों में फैल सकता है, लेकिन आज के समय में हमारे पास आधुनिक दवाएं और एंटीबायोटिक्स मौजूद हैं। इसलिए इस बात की संभावना बहुत कम है कि यह बीमारी कोविड जैसी वैश्विक महामारी का रूप ले सकेगी। आधुनिक मेडिकल साइंस के पास इसका समय पर इलाज करने के पूरे साधन उपलब्ध हैं।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि भले ही महामारी का खतरा कम हो, लेकिन गुप्त लैबों में इस तरह के खतरनाक बैक्टीरिया पर रिसर्च करना मानवता के लिए हमेशा एक बड़ा जोखिम रहा है। रूस की इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि दुनिया भर की सरकारों को अपनी जैव-सुरक्षा यानी बायो-सिक्योरिटी नियमों को और ज्यादा सख्त बनाने की जरूरत है। यदि समय रहते इन लैबों पर लगाम नहीं लगाई गई, तो एक छोटी सी लापरवाही दुनिया को भारी कीमत चुकाने पर मजबूर कर सकती है।
अंतरराष्ट्रीय राजनीति और सुरक्षा पर मंडराते सवाल
रूस में हुई इस घटना का असर अब कूटनीतिक रिश्तों पर भी पड़ने लगा है। पश्चिमी देशों का मानना है कि रूस अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने के लिए गुप्त रूप से खतरनाक हथियारों पर काम कर रहा है। ऐसे में एक वैज्ञानिक की मौत ने इन शक को और ज्यादा मजबूत कर दिया है। अमेरिका और उसके सहयोगी देश लगातार रूस पर दबाव बना रहे हैं कि वह अपनी सभी लैबों के कामकाज की अंतरराष्ट्रीय जांच कराएं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संयुक्त राष्ट्र की बैठकों में भी जोर-शोर से उठाया जा सकता है।
फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें रूस और विश्व स्वास्थ्य संगठन की आगामी बैठकों पर टिकी हुई हैं। आम जनता सिर्फ यही चाहती है कि इस रहस्य से जल्द पर्दा उठे और सच्चाई सामने आए। द फ्रीलान्स इस पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा और जैसे ही कोई नया दस्तावेज या आधिकारिक बयान सामने आएगा, हम सबसे पहले आप तक पहुंचाएंगे। सुरक्षा एजेंसियों और स्वास्थ्य संगठनों की यह जिम्मेदारी है कि वे किसी भी लापरवाही को छिपाने के बजाय जनता के सामने सच रखें।











