नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय रेल इन दिनों अपनी यात्री सेवाओं, सुरक्षा इंतजामों और माल ढुलाई के मोर्चे पर बड़े बदलावों के दौर से गुजर रही है। ताजा खबरों के मुताबिक, पूर्व मध्य रेल ने लंबी दूरी की ट्रेनों में साफ-सफाई को लेकर एक नया नियम लागू किया है। इसके तहत अब गरीब रथ समेत कई प्रमुख ट्रेनों में हर दो घंटे के भीतर बोगियों की सफाई की जाएगी। रेलवे का यह कदम उन यात्रियों के लिए बड़ी राहत है जो लंबी यात्रा के दौरान गंदगी और बदबू से परेशान रहते थे। ट्रेन के भीतर कचरा उठाने और टॉयलेट साफ करने के लिए अब विशेष सफाई कर्मचारियों की टीम तैनात रहेगी जो तय समय पर अपना काम पूरा करेगी।
दूसरी ओर, यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रेलवे सुरक्षा बल यानी आरपीएफ ने मैदानी स्तर पर अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। बिहार के बिहटा रेलवे स्टेशन और आसपास के इलाकों में आरपीएफ की ओर से एक विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया। इस अभियान के तहत टीम ने लोगों को पटरियां पार न करने, चलती ट्रेन में चढ़ने या उतरने से बचने और रेल परिसर में सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन करने की अपील की। अधिकारियों का कहना है कि जरा सी लापरवाही कई बार बड़ी दुर्घटना का कारण बन जाती है इसलिए लोगों को जागरूक करना बेहद जरूरी है।
हाथियों की आवाजाही से हावड़ा-मुंबई मुख्य रेल मार्ग प्रभावित
एक तरफ जहां साफ-सफाई और सुरक्षा के नए उपाय किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्राकृतिक बाधाओं ने रेल यातायात की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। झारखंड और ओडिशा के जंगलों से गुजरने वाले व्यस्त हावड़ा-मुंबई मुख्य रेल मार्ग पर हाथियों की आवाजाही बढ़ गई है। पटरियों के आसपास हाथियों के आने से ड्राइवरों को मजबूरन अपनी ट्रेनों की गति धीमी करनी पड़ रही है। इस समस्या की वजह से इस मुख्य मार्ग पर चलने वाली करीब बारह महत्वपूर्ण ट्रेनें अपने तय समय से देरी से चल रही हैं। वन विभाग और रेलवे के अधिकारी मिलकर इस स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं ताकि वन्यजीवों को भी सुरक्षित रखा जा सके और रेल यात्रियों को भी ज्यादा परेशानी न उठानी पड़े।
यात्री ट्रेनों के अलावा माल ढुलाई के क्षेत्र में भी रेलवे ने अपनी क्षमता साबित की है। उत्तर प्रदेश के पंडित दीनदयाल उपाध्याय यानी पीडीडीयू रेल मंडल से हाल ही में चार सौ पैंतालीस मालगाड़ियों का सफल आवागमन दर्ज किया गया है। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि देश के आर्थिक गलियारों में माल ढुलाई का पहिया कितनी तेजी से घूम रहा है। मालगाड़ियों के समय पर चलने से देश के विभिन्न हिस्सों में कोयला, खाद्यान्न और अन्य जरूरी औद्योगिक सामानों की आपूर्ति सुचारू रूप से बनी हुई है। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि मालगाड़ियों के रूट को और अधिक स्पष्ट और तेज करने से देश के व्यापार को भी बड़ा बल मिल रहा है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की लाइफलाइन दिल्ली-सहारनपुर रेल लाइन का दोहरीकरण
यात्री सुविधाओं और माल ढुलाई के बीच बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए रेलवे ने एक और बड़ा फैसला लिया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की बेहद अहम दिल्ली-सहारनपुर रेल लाइन के दोहरीकरण का काम जल्द ही तेजी पकड़ेगा। इस महत्वपूर्ण परियोजना के पूरा होने से बागपत और शामली जैसे जिलों के लाखों दैनिक यात्रियों को सीधा फायदा पहुंचेगा। सिंगल लाइन होने की वजह से इस रूट पर अक्सर ट्रेनें घंटों देरी से चलती थीं लेकिन दोहरीकरण के बाद पटरियों पर ट्रेनों का दबाव कम होगा और गाड़ियों की आवाजाही समय पर हो सकेगी। स्थानीय लोग लंबे समय से इस रेल लाइन के चौड़ीकरण और दोहरीकरण की मांग कर रहे थे।
जमीनी स्तर पर मिल रही इन सभी जानकारियों से साफ है कि भारतीय रेलवे केवल यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचाने का साधन नहीं है, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा का एक बहुत बड़ा ढांचा बन चुका है। एक तरफ जहां पटरियों पर हाथियों की सुरक्षा और ट्रेन की सफाई जैसे मानवीय और व्यावहारिक पहलुओं पर ध्यान दिया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ मालगाड़ियों के संचालन और नए ट्रैकों के निर्माण से भविष्य की जरूरतों को भी पूरा किया जा रहा है। 'द फ्रीलान्स' की इस जमीनी पड़ताल से यह स्पष्ट होता है कि रेलवे प्रशासन आने वाले दिनों में अपनी व्यवस्थाओं को और अधिक पारदर्शी और चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।








