कन्नूर/ग्राउंड ब्यूरो — केरल का कन्नूर शहर इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर धरातल तक कई वजहों से सुर्खियों में बना हुआ है। 'द फ्रीलान्स' की टीम ने जब इस तटीय जिले की जमीनी हकीकत टटोली, तो एक के बाद एक कई दिलचस्प और प्रेरणादायक पहलू सामने आए। चाहे वह रेलवे स्टेशन पर दिखने वाली गजब की सफाई हो या फिर किसी की जान बचाने वाला कोई जांबाज युवा, हर तरफ कन्नूर की चर्चा हो रही है। आम लोग भी इन स्थानीय मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रख रहे हैं और प्रशासन के काम की सराहना कर रहे हैं।
इस सिलसिले में सबसे ताजा मामला कन्नूर रेलवे स्टेशन का है। हाल ही में एक यात्री ने जब इस स्टेशन का वीडियो बनाकर इंटरनेट पर साझा किया, तो देखने वाले हैरान रह गए। स्टेशन के प्लेटफॉर्म से लेकर पटरियों के आसपास की साफ-सफाई देखकर हर कोई इसकी तारीफ कर रहा है। लोग इसे सही मायनों में नागरिकों की सामाजिक जिम्मेदारी यानी सिविक सेंस का बेहतरीन उदाहरण मान रहे हैं। आमतौर पर रेलवे स्टेशनों पर गंदगी आम बात होती है, लेकिन कन्नूर ने इस मामले में एक नया मानक स्थापित कर दिया है।
गले में फंसी च्युइंग गम और एक सतर्क युवक की सूझबूझ
सफाई के अलावा कन्नूर से एक ऐसा वीडियो भी सामने आया जिसने सोशल मीडिया पर आते ही तहलका मचा दिया। एक छोटी सी बच्ची के गले में अचानक च्युइंग गम फंस गई थी जिससे उसका दम घुटने लगा था। बच्ची बुरी तरह घबरा गई और उसने एक स्थानीय युवक से मदद की गुहार लगाई। वक्त गंवाए बिना उस युवक ने तुरंत सही तकनीक का इस्तेमाल किया और बच्ची के गले से च्युइंग गम बाहर निकाल दी। समय पर मिली इस मदद से बच्ची की जान बच गई और अब उस युवक की बहादुरी के चर्चे हर जगह हो रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर इस घटना ने लोगों को यह सिखा दिया है कि आपातकालीन स्थिति में प्राथमिक जानकारी होना कितना जरूरी है। च्युइंग गम जैसी छोटी लगने वाली चीजें बच्चों के लिए कितनी खतरनाक साबित हो सकती हैं, इस पर अभिभावक भी अब ज्यादा सतर्क नजर आ रहे हैं। कन्नूर के लोग उस युवक की पीठ थपथपा रहे हैं जिसने बिना डरे अपनी समझदारी से एक बड़ी अनहोनी को टाल दिया। प्रशासन भी इस तरह की घटनाओं से सबक लेते हुए सार्वजनिक जगहों पर जागरूकता बढ़ाने की बात कह रहा है।
ट्रेनों में आधुनिक सुविधाओं की मांग और राजनीतिक हलचल
दूसरी तरफ यात्रा से जुड़े मोर्चे पर भी कन्नूर में काम तेजी से हो रहा है। दक्षिण रेलवे के अंतर्गत चलने वाली कन्नूर-तिरुवनंतपुरम जनशताब्दी एक्सप्रेस में बहुत जल्द पुश-बैक सीटें लगाई जाने वाली हैं। अगले कुछ दिनों में इन आधुनिक और आरामदायक सीटों के लग जाने से यात्रियों का सफर काफी आसान हो जाएगा। लंबे सफर के दौरान यात्रियों को होने वाली पीठ दर्द की समस्या से राहत दिलाने के लिए यह कदम उठाया गया है, जिसकी मांग लंबे समय से की जा रही थी।
राजनीतिक और सामाजिक गलियारों की बात करें तो कन्नूर हमेशा से एक संवेदनशील और जागरूक क्षेत्र रहा है। पिछले लोकसभा चुनावों के दौरान यहां करीब 83 प्रतिशत तक का भारी मतदान दर्ज किया गया था जो यह साबित करता है कि यहां के लोग अपने लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर कितने गंभीर हैं। यहां के राजनीतिक समीकरण हमेशा से देश भर के राजनीतिक विश्लेषकों के लिए अध्ययन का विषय रहे हैं। चुनाव के दौरान यहां की राजनीतिक सरगर्मी और सुरक्षा व्यवस्था देखने लायक होती है।
स्थानीय प्रकाशन और विकास की रफ्तार पर जनता की नजर
क्षेत्र की खबरों और स्थानीय संस्कृति को सहेजने में क्षेत्रीय मीडिया की भूमिका भी यहां काफी अहम है। 'देशाभिमानि' जैसे स्थानीय अखबार कन्नूर के कोने-कोने की खबरें और विकास कार्यों का ब्योरा रोजाना पाठकों तक पहुंचाते हैं। चाहे वह स्थानीय प्रशासन के फैसले हों या फिर सांस्कृतिक कार्यक्रम, हर खबर पर पैनी नजर रखी जाती है। स्थानीय लोग अखबारों और डिजिटल माध्यमों के जरिए अपनी बात खुलकर प्रशासन तक पहुंचाते हैं और समस्याओं का समाधान मांगते हैं।
द फ्रीलान्स की पड़ताल कहती है कि कन्नूर में साफ-सफाई, जनसुविधाएं और नागरिकों की सतर्कता का यह मिला-जुला रूप इसे बाकी शहरों से अलग बनाता है। एक तरफ जहां तकनीक और आधुनिकीकरण के जरिए ट्रेनों में सीटें सुधारी जा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ लोग अपने आपसी मेलजोल और मानवीय संवेदनाओं को भी जिंदा रखे हुए हैं। आने वाले दिनों में देखना होगा कि प्रशासन इस साफ-सफाई के स्तर को और कितनी दूर तक बनाए रख पाता है।




