कन्नूर — केरल का यह खूबसूरत जिला इन दिनों देश भर में अपनी अलग और सकारात्मक पहलों के कारण चर्चा का विषय बना हुआ है। हाल ही में सोशल मीडिया पर कन्नूर रेलवे स्टेशन के वीडियो ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि अगर नागरिक चाहें तो हमारे सार्वजनिक स्थल कितने साफ-सुथरे हो सकते हैं। एक यात्री द्वारा शेयर किए गए इस वीडियो में स्टेशन की चमक और वहां का अनुशासन देखकर हर कोई इसकी तारीफ कर रहा है। लोग इसे असली नागरिक समझ यानी सिविक सेंस का बेहतरीन उदाहरण मान रहे हैं। प्लेटफॉर्म से लेकर पटरियों के आसपास की सफाई देखकर बड़े-बड़े महानगरों के रेलवे स्टेशन भी इससे प्रेरणा ले सकते हैं।
रेलवे के मोर्चे पर ही कन्नूर को एक और बड़ी सौगात मिलने जा रही है। यात्रियों की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करते हुए रेलवे ने कन्नूर से तिरुवनंतपुरम जनशताब्दी एक्सप्रेस में पुशबैक सीटें लगाने का फैसला किया है। अगले दस दिनों के भीतर इस लोकप्रिय ट्रेन के डिब्बों में आरामदायक पुशबैक सीटें लगा दी जाएंगी। इस बदलाव से लंबी दूरी तय करने वाले यात्रियों को बड़ा आराम मिलेगा। उत्तर केरल से दक्षिण केरल तक सफर करने वाले हजारों दैनिक यात्रियों और पर्यटकों के लिए यह किसी बड़ी राहत से कम नहीं है। रेलवे प्रशासन ने यात्रियों के सफर को और ज्यादा सुगम बनाने के लिए यह कदम उठाया है, जिसकी स्थानीय स्तर पर काफी सराहना हो रही है।
साहस और सूझबूझ से बची मासूम की जान
सिर्फ साफ-सफाई और ट्रेन ही नहीं, कन्नूर से जुड़ा एक और वीडियो इन दिनों इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो ने लोगों के रोंगटे खड़े कर दिए और साथ ही एक स्थानीय युवक की सूझबूझ की हर तरफ चर्चा हो रही है। दरअसल, एक छोटी बच्ची के गले में अचानक च्युइंग गम फंस गई थी, जिससे उसका सांस लेना मुश्किल हो गया था। बच्ची की हालत बिगड़ती देख वहां मौजूद एक सतर्क युवक ने तुरंत अपनी समझदारी दिखाई। उसने सही तकनीक का इस्तेमाल करते हुए बच्ची की जान बचा ली। 'अंकल बचा लो' की गुहार लगाती उस बच्ची को सुरक्षित देखकर वहां मौजूद सभी लोगों ने राहत की सांस ली और उस युवक की जमकर पीठ थपथपाई।
दूसरी ओर, राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में भी कन्नूर हमेशा से एक बेहद संवेदनशील और सक्रिय क्षेत्र रहा है। यहां के राजनीतिक समीकरण हमेशा से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनते रहे हैं। पिछले लोकसभा चुनावों में भी इस सीट पर रिकॉर्ड तोड़ मतदान देखने को मिला था। केरल की इस हॉट सीट पर करीब बयासी प्रतिशत से ज्यादा मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था। यहां का हर चुनाव अपनी राजनीतिक सरगर्मी और कड़े मुकाबले के लिए जाना जाता है, जहां की राजनीतिक जमीन पर हर दल अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंक देता है।
स्थानीय प्रकाशन और जनजीवन की हलचल
क्षेत्र की जमीनी खबरों और राजनीतिक-सामाजिक गतिविधियों को स्थानीय मीडिया प्रमुखता से उठा रहा है। देशोभिमानी जैसे स्थानीय और क्षेत्रीय अखबारों के कन्नूर संस्करण में हर रोज यहां की स्थानीय समस्याओं, विकास कार्यों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की विस्तृत रिपोर्ट छपती है। इन खबरों से यह साफ पता चलता है कि कन्नूर सिर्फ राजनीति या वायरल वीडियो तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां का स्थानीय जनजीवन और कला-संस्कृति भी उतनी ही समृद्ध और जीवंत है। आम लोगों की छोटी-छोटी समस्याएं और प्रशासन द्वारा उन पर की जाने वाली त्वरित कार्रवाई इस क्षेत्र को एक जीवंत लोकतंत्र का उदाहरण बनाती है।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल में यह बात सामने आई है कि कन्नूर के लोग अपने शहर की साफ-सफाई और सुरक्षा को लेकर काफी जागरूक हो चुके हैं। रेलवे स्टेशन की स्वच्छता हो या किसी संकट के समय एक-दूसरे की मदद करने का जज्बा, यहां का समाज अपनी सकारात्मक ऊर्जा से आगे बढ़ रहा है। प्रशासनिक प्रयास और जनसहयोग का यह मेल आने वाले दिनों में कन्नूर को देश के सबसे विकसित और अनुशासित जिलों की श्रेणी में खड़ा कर सकता है। यहाँ के लोग बदलाव के प्रति न केवल तैयार हैं, बल्कि खुद उस बदलाव का हिस्सा भी बन रहे हैं।



