कानपुर/ग्राउंड ब्यूरो — उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर में मौसम का मिजाज इन दिनों लगातार बदल रहा है। पिछले कुछ दिनों से आसमान में हल्के बादल छाए रहने और उमस भरी गर्मी ने लोगों का जीना बेहाल कर रखा था। अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया जा रहा था, जिससे आम जनजीवन काफी प्रभावित था। लेकिन अब मौसम विभाग ने एक बार फिर राहत और आफत दोनों के संकेत दिए हैं। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, एक नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस यानी पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो गया है, जिसके असर से शहर में बादलों की आवाजाही और तेज हो गई है।
स्थानीय मौसम केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार, इस सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से कानपुर और आसपास के इलाकों में हल्की बूंदाबांदी या हल्की बारिश हो सकती है। हवा का रुख बदलने से तापमान में एक से दो डिग्री सेल्सियस की गिरावट भी दर्ज की जा सकती है, जिससे लोगों को उमस भरी गर्मी से थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, मौसम का यह बदलाव केवल एक दिन का नहीं है, बल्कि आने वाले कुछ घंटों तक बादलों और धूप के बीच आंख मिचौली का खेल जारी रहने की पूरी संभावना है।
12 घंटे की मूसलाधार बारिश से धंसी जाजमऊ वीआईपी सड़क
मौसम के इस नए मिजाज के बीच शहरवासी अभी भी पिछली भारी बारिश के जख्मों से उबर नहीं पाए हैं। कुछ समय पहले कानपुर में लगातार 12 घंटे तक हुई झमाझम बारिश ने पूरे शहर के बुनियादी ढांचे की पोल खोल दी थी। स्थिति यह हो गई थी कि ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण जाजमऊ वीआईपी सड़क का एक बड़ा हिस्सा करीब 18 फीट नीचे धंस गया था। इस सड़क के धंसने से यातायात पूरी तरह ठप हो गया और स्थानीय लोगों के लिए आवागमन का एक बड़ा संकट खड़ा हो गया। प्रशासन और लोक निर्माण विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभालने का प्रयास किया, लेकिन नुकसान इतना बड़ा था कि राहत कार्यों में काफी समय लगा।
बारिश का यह तांडव केवल सड़कों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शहर की कई मुख्य बस्तियों और बाजारों में भी तबाही मचा गया। आरटीओ रोड पूरी तरह से एक बड़े तालाब में तब्दील हो गई थी, जिससे वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई इलाकों में रिहायशी घरों और दुकानों के अंदर तक बारिश का पानी घुस गया, जिससे लोगों का कीमती सामान और घरेलू उपयोग का सामान पूरी तरह भीग कर खराब हो गया। दुकानदारों का कहना है कि जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण उन्हें हर बार बारिश के मौसम में इस तरह के भारी नुकसान का सामना करना पड़ता है।
पूरे उत्तर प्रदेश में मानसून की सक्रियता और बाढ़ का खतरा
कानपुर ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी मौसम का यही हाल देखने को मिल रहा है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में हो रही लगातार बारिश के कारण नदियां उफान पर हैं और कई जगहों पर बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में हेलिकॉप्टर से कुशीनगर के बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया और अधिकारियों को राहत कार्यों में तेजी लाने के कड़े निर्देश दिए। इसके अलावा बिजनौर में राष्ट्रीय राजमार्ग पर पानी भर जाने से यातायात प्रभावित हुआ है, बदायूं में सड़कें बह गई हैं और बाराबंकी में भी नदियां खतरे के निशान के करीब बह रही हैं।
प्रशासन की ओर से लगातार यह दावे किए जा रहे हैं कि जलभराव और आपदा से निपटने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। नगर निगम की टीमें शहर के निचले इलाकों से पानी निकालने के लिए पंपिंग सेटों का इस्तेमाल कर रही हैं। हालांकि, ज़मीनी हकीकत यह है कि थोड़ी सी भी भारी बारिश शहर के ड्रेनेज सिस्टम की कलई खोल देती है। आम जनता अब प्रशासन से यह उम्मीद कर रही है कि वे केवल तात्कालिक राहत देने के बजाय स्थायी समाधान निकालें, ताकि हर बार बारिश आने पर लोगों को इस प्रकार की गंभीर समस्याओं का सामना न करना पड़े।
मौसम के इस दौर में आम जनता और प्रशासन की तैयारी
मौसम विभाग की ताजा चेतावनियों को देखते हुए कानपुर जिला प्रशासन ने भी अपनी तरफ से सतर्कता बढ़ा दी है। आपदा प्रबंधन टीमों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अलर्ट मोड पर रखा गया है। डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को भी निर्देशित किया गया है कि बारिश के बाद फैलने वाली बीमारियों जैसे मलेरिया, डेंगू और वायरल फीवर से निपटने के लिए पूरी तैयारी रखी जाए। जलभराव वाले क्षेत्रों में ब्लीचिंग पाउडर और एंटी-लारवा का छिड़काव शुरू कर दिया गया है ताकि संक्रमण फैलने का खतरा न रहे।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि आम नागरिक अब बदलते मौसम को लेकर काफी सतर्क हो गए हैं। लोग अपने घरों की छतों और नालियों की सफाई खुद करने लगे हैं ताकि पानी का जमाव न हो सके। हालांकि, शहर के बुनियादी ढांचे में सुधार की जो मांग लंबे समय से उठ रही है, उस पर नीति निर्माताओं को गंभीर मंथन करने की आवश्यकता है। जब तक शहर का ड्रेनेज सिस्टम और मजबूत नहीं होगा, तब तक हर बार आने वाला वेस्टर्न डिस्टरबेंस या हल्की बारिश भी कानपुर के लिए एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी।




