नई दिल्ली/कीव — यूक्रेन और रूस के बीच चल रही खूनी जंग का दायरा अब समंदर के रास्ते दुनिया भर के व्यापार और बेगुनाह लोगों तक पहुंच चुका है। ब्लैक सी से गुजर रहे एक तेल टैंकर पर यूक्रेनी ड्रोन ने जोरदार हमला किया, जिससे जहाज में भीषण आग लग गई। आसमान में काले धुएं के गुबार छा गए और इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय बिचौलियों और नाविकों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। राहत की बात यह है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है, लेकिन युद्ध के मैदान से दूर समंदर में भी नाविकों की जान पर बन आई है।
इस पूरे मामले की सबसे गंभीर बात यह है कि जिस तेल टैंकर को निशाना बनाया गया है, उस पर भारतीय नाविक भी सवार हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पिछले अड़तालीस घंटे के भीतर इस जहाज पर यह तीसरा हमला हुआ है। ब्लैक सी में लगातार हो रहे इन हमलों से यह साफ हो गया है कि यूक्रेन अब रूस की सप्लाई चेन को तोड़ने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। ड्रोन हमलों की वजह से ना सिर्फ जहाजों को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि उन पर काम करने वाले आम कर्मचारियों की जिंदगी भी खतरे में पड़ गई है।
ब्लैक सी में तेल टैंकर पर ड्रोन हमला और नाविकों की सुरक्षा
युद्ध के इस मौजूदा दौर में केवल समंदर ही नहीं, बल्कि जमीन पर भी हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। यूक्रेन के कई शहर ऐसे 'मौत के क्षेत्र' बन चुके हैं जहां आम नागरिकों का जीना मुहाल हो गया है। हाल ही में रूस ने यूक्रेन के लाखों गाड़ियों और नागरिकों के लिए बेहद अहम माने जाने वाले दो बड़े पुलों को भी ड्रोन हमलों से निशाना बनाया है। इन पुलों के टूटने से यातायात पूरी तरह ठप हो गया है और युद्धग्रस्त इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाना भी लगभग नामुमकिन हो गया है। स्थानीय लोग डर के साये में जीने को मजबूर हैं।
दूसरी तरफ कूटनीतिक मोर्चे पर भी यूक्रेन की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। यूरोपीय संघ अब यूक्रेन की सबसे प्रमुख वस्तु पर स्थायी प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहा है। जैसे ही इस प्रतिबंध की खबर सामने आई, यूक्रेन की तरफ से प्रतिक्रिया और भी ज्यादा आक्रामक हो गई है। जानकारों का मानना है कि यूरोपीय देशों के इस रुख से आने वाले दिनों में जंग का दायरा और बढ़ सकता है, जिसका सीधा असर वैश्विक बाजार और तेल की कीमतों पर पड़ेगा।
यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों का खतरा और यूक्रेनी प्रतिक्रिया
जमीनी हकीकत यह है कि रूस और यूक्रेन दोनों ही पक्ष अब एक-दूसरे की रीढ़ तोड़ने पर आमादा हैं। रूसी सेनाएं जहां लगातार ड्रोन हमलों के जरिए यूक्रेन के बुनियादी ढांचे को तबाह कर रही हैं, वहीं यूक्रेनी सेनाएं ब्लैक सी में रूसी तेल और सामान ले जाने वाले जहाजों को रोक रही हैं। इस आर्थिक और सैन्य संघर्ष में सबसे बड़ा नुकसान उन आम लोगों और नाविकों का हो रहा है जिनका इस राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। भारतीय नाविकों वाले जहाज पर हुआ यह हमला इस बात का सबूत है कि समंदर का रास्ता भी अब सुरक्षित नहीं बचा है।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि आने वाले दिनों में यह युद्ध और अधिक भीषण रूप ले सकता है। दोनों देशों के बीच शांति की कोई उम्मीद फिलहाल नजर नहीं आ रही है। भारत सरकार और संबंधित एजेंसियां ब्लैक सी में फंसे भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क हैं और लगातार संपर्क बनाए हुए हैं। जैसे-जैसे जंग के नए मोर्चे खुल रहे हैं, दुनिया भर की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस बढ़ते संकट को रोकने के लिए क्या कदम उठाता है।



