नई दिल्ली और उत्तर प्रदेश के मैदानों से आ रही खबरें बताती हैं कि कानून की रक्षा करने वाले वकील खुद कितने सुरक्षित हैं। गूगल ट्रेंड्स पर 'लॉयर' यानी वकील शब्द अचानक शीर्ष पर आ गया है। इस ट्रेंड के पीछे कई बड़ी और चौंकाने वाली घटनाएं हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश के शमसाबाद में एक अधिवक्ता का रुमाल से गला घोंटने की कोशिश का मामला सामने आया है। क्रेटा कार में सवार कुछ दबंगों ने बीच रास्ते में वकील को रोका और उन पर जानलेवा हमला किया। इस मामले में चार नामजद आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है और लगातार छापेमारी की जा रही है।
दूसरी ओर, कानपुर देहात से भी एक ऐसा ही अजीब मामला सामने आया है जहां रेप के आरोपी के समर्थन में कई वकील सीधे एसपी दफ्तर पहुंच गए। इस घटना ने स्थानीय स्तर पर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है क्योंकि एक तरफ जहां छात्रा के माता-पिता मुकदमे को सही बता रहे हैं, वहीं वकीलों का एक धड़ा आरोपी के समर्थन में उतर आया है। इन तमाम घटनाओं के बीच अदालती मामलों में वकीलों के बयानों की गूंज भी तेज हो गई है। हाल ही में चर्चित मुस्कान-साहिल मामले में बचाव पक्ष की वकील का बड़ा बयान सामने आया है जिसमें उन्होंने कहा कि आरोपियों को फांसी की सजा के बजाय उम्रकैद मिल सकती थी।
व्हाइट हाउस की नई प्रेस सचिव की डिग्री पर उठे गंभीर सवाल
विवाद केवल देश के भीतर ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी वकीलों की भूमिका को लेकर गरमाया हुआ है। अमेरिका में व्हाइट हाउस की नई प्रेस सचिव के रूप में नियुक्त की गईं केटी जकारिया इन दिनों भारी विवादों में घिर गई हैं। उनके द्वारा खुद को वकील होने का दावा किए जाने पर अमेरिकी मीडिया और कानूनी हलकों में सवाल उठ रहे हैं। लोग उनकी शैक्षिक डिग्रियों और बार काउंसिल के रजिस्ट्रेशन की जांच की मांग कर रहे हैं। इस खुलासे के बाद से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में वकीलों की साख और उनके दावों की सत्यता पर एक बार फिर बहस छिड़ गई है।
इन सभी अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय घटनाओं ने मिलकर इंटरनेट पर 'लॉयर' शब्द को सबसे ज्यादा सर्च किए जाने वाला विषय बना दिया है। एक तरफ जहां व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव की डिग्री की वैधता जांची जा रही है, वहीं दूसरी तरफ भारत के छोटे शहरों में वकीलों पर हो रहे हमलों ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी इन मामलों में लीपापोती करने के बजाय अब सख्त कार्रवाई की बात कह रहे हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं।
उत्तर प्रदेश में वकीलों पर बढ़ते हमले और पुलिस की सुस्त कार्रवाई
शमसाबाद की घटना ने साफ कर दिया है कि पेशेवर रूप से काम करने वाले अधिवक्ता भी अपराधियों के निशाने पर हैं। दिन दहाड़े सड़क पर एक वकील को रोकने और उसका गला घोंटने की कोशिश इस बात का प्रमाण है कि बदमाशों के मन में कानून का डर खत्म हो चुका है। स्थानीय बार एसोसिएशन ने इस घटना के खिलाफ कड़ा रोष जताया है और पुलिस को अल्टीमेटम दिया है कि सभी चारों आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए। वकीलों का कहना है कि यदि उनके साथियों को इस तरह निशाना बनाया जाएगा, तो आम जनता को न्याय कौन दिलाएगा।
दूसरी तरफ, कानपुर देहात की घटना ने यह दिखा दिया है कि कई बार वकीलों के अपने पेशेवर आचरण पर भी सवाल उठ जाते हैं। जब किसी गंभीर अपराध के आरोपी के समर्थन में वकील पुलिस अधीक्षक के कार्यालय पहुंच जाते हैं, तो पीड़ित परिवार का न्याय से भरोसा उठने लगता है। समाजशास्त्रियों का मानना है कि वकीलों को अपनी पेशेवर सीमाओं और सामाजिक उत्तरदायित्व के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है, वरना न्याय व्यवस्था से आम आदमी का विश्वास डगमगा सकता है।
वैश्विक राजनीति से लेकर स्थानीय कचहरी तक वकीलों की भूमिका
द फ्रीलान्स की इस ग्राउंड पड़ताल से यह साफ हो जाता है कि वकील शब्द केवल अदालतों की चार दीवारों तक सीमित नहीं है। अमेरिका की सत्ता के गलियारों से लेकर उत्तर प्रदेश के थानों और सड़कों तक, वकीलों की मौजूदगी हर जगह चर्चा का केंद्र बनी हुई है। एक तरफ जहां पेशेवर डिग्रियों की सच्चाई पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ वकीलों की व्यक्तिगत सुरक्षा और उनके काम करने के तरीकों पर भी बड़ी बहस छिड़ी हुई है। आने वाले दिनों में इन सभी मामलों की जांच के बाद कई और बड़े खुलासे होने की पूरी उम्मीद है।










