नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश भर में मौसम का मिजाज इन दिनों काफी अजीब बना हुआ है। एक तरफ जहां केरल में मानसून के पूरी तरह पहुंचने से झमाझम बारिश शुरू हो गई है, वहीं दूसरी तरफ कर्नाटक, राजस्थान और मध्य प्रदेश के कई इलाकों में आसमान साफ है और लोग बादलों के लिए तरस रहे हैं। मौसम विभाग यानी आईएमडी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, देश के करीब 40 प्रतिशत हिस्से में अभी भी मानसून की बारिश सामान्य से कम दर्ज की गई है। इस असमान बारिश ने किसानों और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
दक्षिण भारत के राज्यों में मौसम की स्थिति इस समय दो बिल्कुल अलग रूपों में दिखाई दे रही है। केरल के तटीय इलाकों में मानसून की सक्रियता बहुत तेज है और वहां लगातार भारी बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने निचले इलाकों में जलभराव और भूस्खलन की चेतावनी भी जारी की है। इसके उलट, पड़ोसी राज्य कर्नाटक के कई जिलों में अभी तक मानसून पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाया है। खेतों में नमी कम होने से किसानों की परेशानी बढ़ती जा रही है और वे आसमान की तरफ टकटकी लगाए बैठे हैं।
केरल में झमाझम बारिश और आईएमडी का अलर्ट
केरल पहुंचने के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून अब धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक केरल के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इसे देखते हुए प्रशासन ने भी पूरी तैयारी कर ली है और आपदा प्रबंधन टीमों को मुस्तैद कर दिया गया है। तटीय इलाकों में मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है क्योंकि हवा की रफ्तार तेज हो सकती है। राज्य के पहाड़ी इलाकों में भी लगातार बारिश से नदियों का जलस्तर बढ़ने लगा है।
दूसरी ओर, उत्तर भारत के कुछ राज्यों में भी प्री-मानसून गतिविधियों ने गर्मी से राहत दी है। दिल्ली-एनसीआर और आसपास के इलाकों में धूल भरी आंधी के साथ हल्की बारिश दर्ज की गई है जिससे तापमान में गिरावट आई है। हालांकि, उत्तर प्रदेश और बिहार के लोग अभी भी मुख्य मानसून के आगमन का इंतजार कर रहे हैं। मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले हफ्तों में मानसून उत्तर भारत के मैदानी इलाकों की तरफ तेजी से रुख कर सकता है।
कर्नाटक और मध्य भारत में बारिश की कमी
डेटा के अनुसार देश के लगभग 40 प्रतिशत हिस्से में अभी भी बारिश का कोटा पूरा नहीं हुआ है। कर्नाटक के अलावा राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में बादलों की आवाजाही बहुत कम है। इन राज्यों में तेज धूप और उमस भरी गर्मी ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ दिनों में इन इलाकों में अच्छी बारिश नहीं हुई, तो खरीफ की फसलों की बुवाई पर बुरा असर पड़ सकता है।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड टीम ने जब स्थानीय किसानों से बात की तो उन्होंने अपनी चिंता साफ जाहिर की। कर्नाटक के एक किसान ने बताया कि समय पर बारिश न होने के कारण उन्हें दोबारा बुवाई करनी पड़ सकती है या फिर सिंचाई के लिए महंगे साधनों का सहारा लेना होगा। भूजल स्तर पहले ही नीचे जा चुका है जिससे संकट और गहराता जा रहा है।
उत्तर भारत में कब पहुंचेगा असली मानसून?
आम जनता के मन में यह सवाल सबसे बड़ा है कि उत्तर भारत में मानसून की असली फुहारें कब बरसेंगी। आईएमडी के ताजा अपडेट के मुताबिक, उत्तर भारत के राज्यों में मानसून के पहुंचने की सामान्य तारीखों के आसपास ही इसके आगे बढ़ने की संभावना है। दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में जून के अंतिम सप्ताह तक मानसून के पूरी तरह छा जाने का अनुमान जताया गया है। तब तक लोगों को बीच-बीच में आने वाली आंधी और हल्की बारिश से ही संतोष करना होगा।




