मेरठ/नई दिल्ली — द फ्रीलान्स की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड मामले में अदालत का फैसला आने से ठीक पहले मुख्य आरोपी मुस्कान और साहिल की नींद पूरी तरह उड़ चुकी है। जेल के अंदर की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और दोनों आरोपियों पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है। जुर्म की सजा तय होने के इस अहम दिन से पहले दोनों के चेहरे पर खौफ साफ देखा जा सकता है। कानूनी शिकंजा कसने के बाद से उनकी बेचैनी लगातार बढ़ती जा रही है।
जेल सूत्रों से मिली खास जानकारी के अनुसार, अदालत के फैसले से एक रात पहले मुस्कान और साहिल ने मानसिक तनाव के कारण कुछ भी नहीं खाया। उन्होंने जेल प्रशासन द्वारा दिया गया रात का डिनर पूरी तरह छोड़ दिया और सुबह का नाश्ता भी हाथ नहीं लगाया। दोनों पूरी रात अपने सेल के अंदर टहलते रहे और ठीक से सो नहीं पाए। अपराध की गंभीरता को देखते हुए उन्हें अन्य कैदियों से अलग रखा गया है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके।
कानूनी शिकंजा और कोर्ट की सख्त कार्रवाई
इस सनसनीखेज मामले में अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने पुख्ता सबूत और गवाह पेश किए हैं, जिसके बाद से आरोपियों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। पुलिस की शुरुआती जांच से लेकर अदालत में चली लंबी सुनवाई तक, हर चरण में दोनों के खिलाफ मजबूत तथ्य रखे गए हैं। वकीलों के अनुसार, इस मामले में अदालत का रुख बेहद सख्त रहा है क्योंकि अपराध का तरीका बेहद खौफनाक और सुनियोजित था। सजा के ऐलान से पहले कोर्ट परिसर के आसपास भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
स्थानीय पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए सभी जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। पिछले कुछ हफ्तों से इस हाई-प्रोफाइल मामले पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं। लोग सोशल मीडिया और समाचार चैनलों के जरिए हर पल की अपडेट ले रहे हैं। मेरठ शहर में भी इस फैसले को लेकर लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं और हर कोई कोर्ट के अंतिम आदेश का इंतजार कर रहा है।
जेल के अंदर कैसी कट रही है आरोपियों की रातें
सामान्य तौर पर जेल में बंद कैदियों के लिए एक तय दिनचर्या होती है, लेकिन सजा के मुहाने पर खड़े इन दोनों आरोपियों के लिए पिछले कुछ दिन बेहद भारी गुजरे हैं। पूछताछ के दौरान भी उनके बयानों में लगातार बदलाव देखा गया था, लेकिन अब जब कानून का फंदा कस चुका है तो उनके पास पछतावे के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। जेल के अधिकारियों ने उनकी मानसिक स्थिति पर नजर रखने के लिए डॉक्टर की टीम को भी तैनात किया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।
परिवार और समाज के स्तर पर भी इस घटना की भारी निंदा हुई थी और आज जब न्याय मिलने का अंतिम चरण आ चुका है, तो आम नागरिकों में भी कानून व्यवस्था के प्रति भरोसा मजबूत हुआ है। पुलिस और प्रशासनिक अमला किसी भी तरह की कानून-व्यवस्था की समस्या से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। अदालत कक्ष के भीतर और बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि फैसले के समय पूरी तरह शांति और व्यवस्था बनी रहे।
फैसले के बाद क्या होंगे अगले कानूनी कदम
निचली अदालत के इस फैसले के बाद आरोपियों के पास ऊपरी अदालतों में अपील करने का विकल्प खुला रहेगा, लेकिन फिलहाल मौजूदा सजा के ऐलान पर सभी की निगाहें टिकी हैं। वकीलों का मानना है कि इस तरह के जघन्य मामलों में अदालत का फैसला एक बड़ा उदाहरण बनता है ताकि समाज में ऐसा अपराध करने से पहले लोग डरें। द फ्रीलान्स की टीम इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और कोर्ट के फैसले से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी सबसे पहले आप तक पहुंचाई जाएगी।







