नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की राजधानी दिल्ली में आम लोगों, मजदूरों और राजनीतिक दलों के लिए अपनी आवाज उठाना अब और भी ज्यादा महंगा और मुश्किल हो गया है। दिल्ली का ऐतिहासिक रामलीला मैदान हमेशा से बड़े आंदोलनों और प्रदर्शनों का गवाह रहा है। लेकिन अब इस मैदान में धरना देना आम आदमी की पहुँच से बाहर होता जा रहा है। ताजा ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक रामलीला मैदान की बुकिंग इस साल के अंत तक लगभग पूरी तरह फुल हो चुकी है।
हाल ही में जंतर-मंतर पर प्रदर्शनों को लेकर कड़े नियम लागू किए गए थे। इसके बाद अब रामलीला मैदान में भी हालात काफी बदल गए हैं। स्थिति यह है कि आने वाले ढाई महीनों तक इस मैदान में एक भी दिन खाली नहीं है। पूरे साल भर के कैलेंडर को देखें तो रामलीला मैदान इस साल केवल तीन दिनों के लिए ही खाली बचा है। आंदोलन करने वाले संगठनों और राजनीतिक दलों के सामने अब बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
एक दिन की बुकिंग पर खर्च होंगे 1.21 लाख रुपये
रामलीला मैदान में कार्यक्रम या विरोध प्रदर्शन आयोजित करने के लिए अब भारी-भरकम फीस चुकानी होगी। नए नियमों के तहत आयोजकों को बुकिंग के समय ही एक लाख इक्कीस हजार रुपये जमा करने होंगे। इतनी बड़ी रकम चुकाना छोटे संगठनों या आम नागरिकों के लिए बहुत कठिन काम है। पहले जहाँ लोग आसानी से अपनी बात रखने के लिए मैदान बुक कर लेते थे, वहीं अब बढ़ती फीस ने उनकी कमर तोड़ दी है।
दिल्ली नगर निगम और संबंधित प्रशासन के इन नए नियमों के बाद प्रदर्शनकारियों को वैकल्पिक जगहों की तलाश करनी पड़ रही है। जंतर-मंतर के बाद अब रामलीला मैदान का रास्ता भी महंगा होने से विरोध के स्वर दबाए जाने की चर्चा आम हो गई है। जानकारों का मानना है कि इतनी अधिक फीस वसूलने से लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत अपनी बात रखना आम आदमी के लिए सपना बनता जा रहा है।
प्रशासनिक पाबंदियां और आयोजकों की बढ़ रही मुश्किलें
मैदान की बुकिंग फुल होने और भारी फीस के कारण कई बड़े सामाजिक संगठन विरोध प्रदर्शन की तारीखें आगे बढ़ाने पर मजबूर हो रहे हैं। पुलिस और प्रशासन की ओर से मिलने वाली अनुमति की प्रक्रिया भी अब और ज्यादा पेचीदा हो गई है। सुरक्षा और साफ-सफाई के नाम पर तय की गई ये शर्तें आयोजकों के लिए जी का जंजाल बन गई हैं।
जमीनी स्तर पर पड़ताल करने पर पता चला कि कई छोटे संगठन बिना अनुमति के ही छोटे समूहों में अपनी बात रखने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन प्रशासन की सख्ती के चलते उन्हें तुरंत हटा दिया जाता है। रामलीला मैदान के आसपास तैनात सुरक्षाकर्मियों का कहना है कि उन्हें ऊपर से सख्त आदेश मिले हैं कि बिना पूरी बुकिंग और वैध अनुमति के किसी को भी अंदर जाने न दिया जाए।
लोकतांत्रिक अधिकारों पर मंडराता नया वित्तीय संकट
संविधान ने देश के हर नागरिक को शांतिपूर्ण ढंग से विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार दिया है। लेकिन जब ऐसे मैदानों की बुकिंग इतनी महंगी हो जाए, तो गरीब और मजदूर वर्ग अपनी आवाज कैसे उठाएगा? यह सवाल आज हर उस इंसान के मन में है जो न्याय की आस में दिल्ली की सड़कों पर उतरता है।
द फ्रीलान्स की इस विशेष पड़ताल से साफ है कि आने वाले दिनों में दिल्ली में बड़े आंदोलन देखना और भी मुश्किल हो जाएगा। सरकार और प्रशासन की इन नीतियों के खिलाफ अब कई सामाजिक संगठन एकजुट होकर आवाज उठाने की तैयारी कर रहे हैं। देखना होगा कि क्या आने वाले समय में आम जनता के लिए प्रदर्शन के नियमों में कुछ राहत मिलती है या फिर यह पाबंदियां और ज्यादा सख्त होती हैं।





