नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय रिजर्व बैंक ने घरेलू मुद्रा रुपये को संबल देने के लिए बड़ा और अहम कदम उठाया है। पिछले कुछ दिनों से डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हो रहा था जिस पर लगाम लगाने के लिए केंद्रीय बैंक ने कमर कस ली है। रिजर्व बैंक ने विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करते हुए डॉलर बेचने का फैसला किया है। इस कदम से बाजार में डॉलर की सप्लाई बढ़ेगी और रुपये पर पड़ रहा दबाव कम होगा। द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल के मुताबिक, केंद्रीय बैंक की इस पहल से वित्तीय बाजारों में सकारात्मक संदेश गया है और शुरुआती कारोबार में रुपये की स्थिति में सुधार देखा गया है।
रुपये की इस जंग में सबसे बड़ा मोड़ सरकारी तेल कंपनियों के लिए आया है। देश की सरकारी तेल कंपनियां कच्चे तेल के आयात के लिए हर महीने भारी मात्रा में डॉलर खरीदती हैं। इस भारी मांग के कारण विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की कमी हो जाती है और रुपया टूटने लगता है। इसे रोकने के लिए आरबीआई ने इन कंपनियों के लिए एक स्पेशल डॉलर विंडो की शुरुआत की है। अब इन कंपनियों को खुले बाजार से डॉलर खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी बल्कि इन्हें सीधे केंद्रीय बैंक से डॉलर की सप्लाई मिलेगी। इससे बाजार में डॉलर की भारी मांग का दबाव अचानक कम हो गया है और घरेलू मुद्रा को सीधी ताकत मिली है।
तेल कंपनियों के लिए स्पेशल डॉलर विंडो का असर
विशेषज्ञों का मानना है कि तेल कंपनियों को सीधे डॉलर मिलने से फॉरेक्स मार्केट में अफरातफरी नहीं मचेगी। सामान्य दिनों में जब तेल कंपनियां भारी मात्रा में डॉलर खरीदती थीं, तो रुपये में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिलता था। अब आरबीआई की इस सीधी सप्लाई व्यवस्था से पारदर्शिता भी आएगी और सट्टेबाजों पर भी लगाम लगेगी। बैंक अधिकारियों का कहना है कि यह कदम देश के विदेशी मुद्रा भंडार का रणनीतिक उपयोग है ताकि अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से बचाया जा सके। आम आदमी के लिए इसका सीधा मतलब यह है कि पेट्रोल-डीजल के आयात पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा का प्रबंधन बेहतर तरीके से हो पाएगा।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच विदेशी मुद्रा कारोबार के नियमों में भी कड़ाई कर दी गई है। रिजर्व बैंक ने सट्टेबाजी और अनावश्यक डॉलर की जमाखोरी को रोकने के लिए ट्रेडिंग नियमों को सख्त बना दिया है। बैंकों और वित्तीय संस्थानों को निर्देश दिए गए हैं कि वे विदेशी मुद्रा के लेनदेन में पूरी सतर्कता बरतें। नियमों की अनदेखी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। इन नए नियमों के बाद से मुद्रा बाजार में अवांछित गतिविधियों पर लगाम लगी है और केवल वास्तविक व्यावसायिक जरूरतों के लिए ही विदेशी मुद्रा का आदान-प्रदान सुनिश्चित किया जा रहा है।
विदेशी मुद्रा कारोबार और ट्रेडिंग नियमों में सख्ती
सख्त नियमों का असर अब फॉरेक्स डीलर्स और बड़े निवेशकों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। मुद्रा कारोबारियों का कहना है कि नियमों के दायरे में रहकर ही अब बड़े सौदे किए जा रहे हैं जिससे बाजार में स्थिरता लौट रही है। हालांकि, कुछ व्यापारियों का यह भी मानना है कि शुरुआती दौर में इन पाबंदियों के कारण कामकाज में थोड़ी सुस्ती आ सकती है, लेकिन लंबे समय में यह देश की अर्थव्यवस्था और रुपये के स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा। वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनावों के बीच यह कदम भारत की आर्थिक रक्षा पंक्ति को और मजबूत करता है।
द फ्रीलान्स की पड़ताल बताती है कि आने वाले हफ्तों में भी रिजर्व बैंक बाजार की गतिविधियों पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा। यदि रुपये पर दबाव फिर से बढ़ता है, तो केंद्रीय बैंक और भी कड़े कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। आम जनता को फिलहाल मुद्रा बाजार के इन बड़े उतार-चढ़ाव से तुरंत घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि देश का विदेशी मुद्रा भंडार अभी भी मजबूत स्थिति में है। रिजर्व बैंक के समय पर उठाए गए इन कदमों से यह साफ हो गया है कि सरकार और केंद्रीय बैंक भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिरता को लेकर पूरी तरह गंभीर और सतर्क हैं।
बाजार और निवेशकों पर क्या होगा इसका असर
मुद्रा बाजार के जानकारों का मानना है कि इन फैसलों से निवेशकों का भरोसा भारतीय बाजार पर और गहरा होगा। जब देश की मुद्रा स्थिर रहती है, तो विदेशी निवेशक भी यहां बिना किसी बड़े जोखिम के पैसा लगाते हैं। आयातित सामानों की कीमतें जो डॉलर के महंगे होने से बढ़ जाती थीं, उन पर भी अब लगाम लगने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, आरबीआई का यह दांव रुपये की गिरती सेहत के लिए एक संजीवनी बूटी की तरह काम कर रहा है, जिसके दूरगामी सकारात्मक परिणाम आने वाले महीनों में देखने को मिलेंगे।








