नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई ने देश के करोड़ों आम लोगों और बैंक ग्राहकों को बड़ा झटका दिया है। केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति यानी एमपीसी की बैठक में रेपो रेट को 0.25 प्रतिशत बढ़ाने का फैसला किया गया है। पूरे तीन साल के लंबे अंतराल के बाद ब्याज दरों में यह बढ़ोतरी की गई है। इस बड़े बदलाव के बाद अब देश भर में होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन सब कुछ महंगा हो जाएगा। बैंक लोन की ब्याज दरें बढ़ने से सीधे तौर पर आम आदमी की जेब पर असर पड़ेगा और हर महीने चुकाई जाने वाली ईएमआई यानी किस्त की रकम बढ़ जाएगी।
आरबीआई के इस फैसले के तुरंत बाद देश के सभी सरकारी और निजी बैंकों ने अपनी ब्याज दरों की समीक्षा शुरू कर दी है। जिन लोगों ने पहले से लोन ले रखा है, उनके लोन की अवधि या फिर मासिक किस्त बढ़ जाएगी। हालांकि, इस फैसले का दूसरा पहलू यह भी है कि बैंक अब फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी पर अधिक ब्याज देना शुरू करेंगे। जो लोग बैंक में एफडी के जरिए पैसा जमा करते हैं, उनके लिए यह एक अच्छी खबर है क्योंकि अब उन्हें पहले से ज्यादा रिटर्न मिलेगा। इसके साथ ही आरबीआई ने देश की जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को भी बढ़ाया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि देश की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है।
बैंकों के लिए चौदह नए कड़े नियम जारी
ब्याज दरों में बढ़ोतरी के साथ-साथ आरबीआई ने बैंकिंग सेक्टर को लेकर भी बेहद सख्त रुख अपनाया है। केंद्रीय बैंक ने बैंकों के लिए चौदह नए कड़े नियम जारी किए हैं। इन नए नियमों का मुख्य मकसद बैंकिंग प्रणाली को और अधिक सुरक्षित बनाना और एनपीए यानी डूबते कर्ज की समस्या से समय रहते निपटना है। आरबीआई ने साफ निर्देश दिए हैं कि अब बैंकों को लोन डूबने का इंतजार करने की कोई जरूरत नहीं है। बैंकों को किसी भी खाते में खराबी के शुरुआती लक्षण दिखते ही पहले से पूरी तैयारी करनी होगी और एहतियाती कदम उठाने होंगे ताकि आम जनता का पैसा पूरी तरह सुरक्षित रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ महीनों में महंगाई के आंकड़ों और वैश्विक बाजार की स्थिति को देखते हुए यह कदम उठाना जरूरी हो गया था। महंगाई को काबू में रखने के लिए केंद्रीय बैंकों के पास ब्याज दरें बढ़ाने के अलावा कोई और बड़ा विकल्प नहीं बचता है। हालांकि, इससे उन मध्यमवर्गीय परिवारों को जरूर परेशानी होगी जो अपने सपनों का घर या गाड़ी खरीदने के लिए बैंक लोन के सहारे हैं। अब हर ग्राहक को अपनी मासिक डायरी का बजट नए सिरे से संभालना होगा क्योंकि बैंक की हर छोटी बढ़ोतरी सीधे घर के खर्चों को प्रभावित करती है।
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बिहार में टीचर भर्ती और अन्य अपडेट्स
इस बीच देश के दूसरे हिस्सों में रोजगार और शिक्षा से जुड़े बड़े प्रशासनिक फैसले भी सामने आए हैं। बिहार राज्य में शिक्षकों के एक लाख बीस हजार पदों पर बंपर भर्ती की तैयारी शुरू हो चुकी है। राज्य के मुख्यमंत्री ने बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा यानी बीपीएससी टीआरई चार दशमलव शून्य को जल्द से जल्द आयोजित करने का कड़ा निर्देश दिया है। राज्य के युवाओं के लिए यह एक बहुत बड़ी राहत और उम्मीद की किरण है जो लंबे समय से सरकारी शिक्षक बनने की तैयारी में जुटे थे। सरकार चाहती है कि खाली पड़े सभी पदों को तय समय सीमा के भीतर पूरी पारदर्शिता के साथ भरा जाए।
जमीनी स्तर पर बात करें तो आम आदमी के लिए आने वाले दिन आर्थिक रूप से थोड़े चुनौतीपूर्ण रहने वाले हैं। एक तरफ जहां लोन की बढ़ती किस्तें लोगों का पसीना छुड़ाएंगी, वहीं दूसरी तरफ बैंकों के कड़े नियमों के कारण लोन मिलना भी थोड़ा मुश्किल हो सकता है। बैंक अब हर दस्तावेज और ग्राहक की वित्तीय स्थिति की बहुत बारीकी से जांच करेंगे। द फ्रीलान्स की टीम लगातार इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और जैसे ही बैंक आधिकारिक रूप से नई ब्याज दरों की सूची जारी करेंगे, हम आप तक सबसे पहले सटीक जानकारी पहुंचाएंगे।
आम जनता और निवेशकों को क्या करना चाहिए
मौजूदा आर्थिक हालात को देखते हुए वित्तीय सलाहकारों का कहना है कि आम लोगों को अब अपने खर्चों में थोड़ी कटौती करनी चाहिए। यदि आपके पास पुराना लोन चल रहा है और आप समय से पहले कुछ हिस्सा चुका सकते हैं, तो यह सही समय होगा ताकि ईएमआई का बोझ कम हो सके। नए लोन के लिए आवेदन करने वालों को अलग-अलग बैंकों की दरों की तुलना जरूर करनी चाहिए क्योंकि हर बैंक अपनी नीति के हिसाब से दरें तय करता है। एफडी निवेशकों के लिए यह सही मौका है कि वे लंबी अवधि के लिए निवेश करके बढ़ी हुई ब्याज दरों का पूरा लाभ उठाएं।



