मिडिल ईस्ट में एक बार फिर बड़ा सैन्य संकट खड़ा हो गया है। यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की धरती को निशाना बनाते हुए बड़ा हमला किया है। इस हमले में सऊदी अरब के दो प्रमुख एयरपोर्ट्स को भारी नुकसान पहुंचा है। हूती विद्रोहियों के इस ड्रोन और मिसाइल हमले की चपेट में आने से तीन आम नागरिक घायल हो गए हैं। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। सऊदी प्रशासन ने अपनी हवाई सुरक्षा प्रणालियों को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है और इस दुस्साहस का कड़ा जवाब देने की तैयारी शुरू कर दी है।
शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह हमला बेहद सुनियोजित तरीके से किया गया था। हूती विद्रोहियों ने केवल एयरपोर्ट्स को ही नहीं, बल्कि सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण पोर्ट सिटी यांबू को भी दहलाने का दावा किया है। सऊदी अरामको की तेल संपत्तियों और औद्योगिक इलाकों के पास इन हमलों के निशान देखे गए हैं। हालांकि सऊदी रक्षा बलों ने कई ड्रोनों और मिसाइलों को हवा में ही नष्ट करने का दावा किया है, लेकिन कुछ मिसाइलें अपने निशाने पर जा गिरीं। इस हमले के बाद से कच्चे तेल की सप्लाई और वैश्विक बाजार पर इसके असर को लेकर चिंताएं फिर से गहरी हो गई हैं।
पाकिस्तान का रुख और सैन्य मदद का प्रस्ताव
इस पूरे घटनाक्रम के बीच पाकिस्तान के राजनीतिक गलियारों से भी बड़े बयान सामने आ रहे हैं। पाकिस्तानी नेता ख्वाजा आसिफ ने एक बयान में कहा है कि उनका देश हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब को सैन्य मदद देने के लिए तैयार है। हालांकि पाकिस्तान के पिछले बयानों और समझौतों के इतिहास को देखते हुए कई रक्षा विश्लेषक इसे लेकर संशय में हैं। सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच पहले भी कई रक्षा समझौते रहे हैं, लेकिन वक्त आने पर कई बार सहयोग को लेकर असमंजस की स्थिति बनती रही है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि क्या पाकिस्तान वाकई अपनी सेना को इस संघर्ष में उतारता है या यह महज कूटनीतिक बयानबाजी बनकर रह जाती है.
विश्लेषकों का मानना है कि हूती विद्रोहियों की ताकत पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ी है। उन्हें अत्याधुनिक ड्रोन और मिसाइल तकनीक मिलने के कारण उनकी मारक क्षमता कई गुना हो गई है। यही वजह है कि सऊदी अरब की राजधानी रियाद और उसके तेल प्रतिष्ठान लगातार इन विद्रोही समूहों के निशाने पर रहते हैं। सऊदी अरब के लिए यह स्थिति सबसे बड़ा सिरदर्द बन चुकी है। अपनी संप्रभुता और आर्थिकिक हितों की रक्षा के लिए रियाद को अब अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं में बड़ा बदलाव करना पड़ रहा है।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर मंडराता नया खतरा
हूती विद्रोहियों के इन लगातार हमलों ने खाड़ी देशों की सुरक्षा नीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अमेरिकी और पश्चिमी देशों के हथियारों से लैस होने के बावजूद सऊदी रक्षा तंत्र इन कम लागत वाले ड्रोनों को पूरी तरह रोकने में कई बार नाकामयाब रहा है। इस परिस्थिति से निपटने के लिए अब कूटनीतिक स्तर पर नए समीकरण बन रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स में यहां तक चर्चा है कि सऊदी अरब इस संकट से पार पाने के लिए अपने पारंपरिक सहयोगियों के अलावा अन्य विकल्पों पर भी विचार कर रहा है, जिससे मध्य पूर्व की राजनीति में एक नया मोड़ आ सकता है।
जमीनी स्तर पर हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। एयरपोर्ट्स पर उड़ानों की आवाजाही को अस्थायी रूप से प्रभावित किया गया है ताकि सुरक्षा जांच पूरी की जा सके। स्थानीय प्रशासन ने लोगों को एहतियात बरतने की सलाह दी है। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे मामले पर करीबी नजर बनाए हुए है और आने वाले दिनों में होने वाले सैन्य व कूटनीतिक घटनाक्रमों की पल-पल की अपडेट आप तक पहुंचाती रहेगी।




