नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय शेयर बाजार में आज सुबह कारोबार शुरू होते ही जबरदस्त हाहाकार मच गया। निवेशकों के देखते ही देखते बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 1200 से अधिक अंकों की भारी गिरावट के साथ धड़ाम हो गया। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी लुढ़क कर साल के अपने सबसे निचले स्तर के करीब आ गया। बाजार की इस अचानक आई बड़ी गिरावट से निवेशकों में भारी भगदड़ मच गई और उनकी गाढ़ी कमाई पलक झपकते ही डूब गई। सुबह से ही मेटल, हेल्थकेयर और बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में बिकवाली का भारी दबाव देखने को मिला।
बाजार के जानकारों और शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस अचानक मची तबाही के पीछे कई बड़े और अहम कारण काम कर रहे हैं। रिजर्व बैंक के हालिया फैसलों और अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिले कमजोर संकेतों ने निवेशकों के उत्साह को ठंडा कर दिया है। इसके अलावा विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार पैसा निकाले जाने के कारण भी बाजार का सेंटिमेंट पूरी तरह बिगड़ गया है। टाटा ग्रुप और अन्य दिग्गज कंपनियों के शेयरों में भी आज उतार-चढ़ाव का माहौल रहा, जिससे छोटे और खुदरा निवेशकों को बड़ा झटका लगा है।
सेंसेक्स में 1200 अंकों की गिरावट के पीछे कौन से हैं मुख्य कारण?
दलाली स्ट्रीट पर मचे इस भूचाल के बाद हर कोई यही जानना चाहता है कि आखिर बाजार इतनी बुरी तरह क्यों टूटा। जानकारों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर मंदी की आशंका और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह है। रिजर्व बैंक के सख्त रुख से भी बाजार में निराशा फैली है क्योंकि इससे कंपनियों की उधारी लागत बढ़ जाती है। इसके साथ ही भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने भी निवेशकों की नींद उड़ा रखी है। बाजार में बिकवाली इतनी तेज थी कि मिनटों में निवेशकों के लाखों करोड़ रुपये स्वाहा हो गए।
इस भारी उठापटक के बीच सिर्फ कुछ चुनिंदा शेयरों को छोड़कर ज्यादातर बड़ी कंपनियों के शेयर लाल निशान पर बंद हुए। निफ्टी बैंक और वित्तीय सेवाओं से जुड़े शेयरों में भी 500 से अधिक अंकों की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। जानकारों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए बाजार में यह उतार-चढ़ाव अभी कुछ और दिन जारी रह सकता है। एक्सपर्ट्स निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि वे ऐसे समय में घबराकर अपने शेयर औने-पौने दाम पर न बेचें और पूरी सूझबूझ के साथ ही कोई नया कदम उठाएं।
क्या छोटे निवेशकों को इस समय बाजार में पैसा लगाना चाहिए?
जब भी बाजार में ऐसी बड़ी गिरावट आती है, तो सबसे ज्यादा नुकसान छोटे और नए निवेशकों का होता है जो बिना सोचे-समझे पैसा लगा देते हैं। इस समय भी कई रिटेल निवेशकों ने भारी नुकसान उठाया है क्योंकि मेटल और हेल्थकेयर शेयरों में अचानक जबरदस्त बिकवाली शुरू हो गई थी। वित्तीय सलाहकारों का कहना है कि बाजार के इस तरह के उतार-चढ़ाव से डरने के बजाय लंबी अवधि के नजरिए से अच्छे फंडामेंटल वाले शेयरों पर नजर रखनी चाहिए। बाजार में फिलहाल अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है इसलिए हर एक कदम बहुत सावधानी से उठाने की जरूरत है।
देश के प्रमुख शेयर बाजारों में आई इस तेज गिरावट ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि बाजार जोखिमों के अधीन है। नियामक संस्थाएं और बड़े निवेशक भी इस स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं ताकि बाजार में किसी भी तरह की अफवाहों पर लगाम लगाई जा सके। आने वाले दिनों में कंपनियों के तिमाही नतीजे और वैश्विक आर्थिक आंकड़े ही यह तय करेंगे कि बाजार किस दिशा में आगे बढ़ेगा। फिलहाल निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करने और सुरक्षित निवेश रणनीतियों अपनाने की सलाह दी जा रही है।
बाजार की इस बड़ी चाल पर निवेशकों की आगे की रणनीति क्या होनी चाहिए?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बड़े करेक्शन कई बार मजबूत शेयरों को सस्ते दाम पर खरीदने का मौका भी देते हैं। हालांकि, जिन लोगों ने कर्ज लेकर या शॉर्ट-वेव ट्रेडिंग के जरिए पैसा लगाया है, उन्हें भारी आर्थिक चोट का सामना करना पड़ा है। बाजार के जानकारों का सुझाव है कि निवेशकों को अपनी जोखिम लेने की क्षमता के हिसाब से ही निवेश करना चाहिए और किसी भी तरह की पैनिक सेलिंग से बचना चाहिए।
द फ्रीलान्स की जमीनी पड़ताल से यह साफ होता है कि वैश्विक और घरेलू दोनों मोर्चों पर दबाव बना हुआ है, जिसका सीधा असर शेयर बाजार की चाल पर दिख रहा है। आने वाले हफ्तों में आने वाले आर्थिक आंकड़े और मौद्रिक नीतियां ही बाजार की अगली दिशा तय करेंगी। निवेशकों के लिए यही बेहतर है कि वे पूरी जानकारी के साथ और लॉन्ग-टर्म विजन के साथ ही शेयर बाजार में अपना अगला दांव खेलें।






